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What are the five interesting facts about mathematical sign infinity?

What are the five interesting facts about mathematical sign infinity?

1.गणितीय चिन्ह अनन्त के पाँच रोचक तथ्य क्या हैं का परिचय (Introduction to What are the five interesting facts about mathematical sign infinity?)-

इसआर्टिकल में अनंत के रोचक तथ्यों का वर्णन किया गया है। रोचक तथ्यों की जानकारी से आपके गणित के ज्ञान में वृद्धि तो होगी ही साथ ही आपकी गणित में रुचि व जिज्ञासा  भी बढ़ेगी ।आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें ।गणित के रोचक तथ्यों के बारे में जानकारी हासिल की जाती है उसमें हमारी मनन व चिंतन शैली का विकास होता है ।गणित विषय अन्य विषयों से हटकर इसीलिए है कि इसे अलग ही प्रकार की बौद्धिक क्षमता का विकास होता है जो अन्य विषयों के अध्ययन से नहीं हो सकता है ।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके ।इस आर्टिकल में अनंत के रोचक तथ्यों का वर्णन किया गया है ।

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2.सबसे पहले अनन्त की परिभाषा जान लेते हैं कि अनंत कहते किसे हैं?(Let us first know the definition of infinite, who is called infinite?)- 

अनंत-
(1.)वह राशि जो अपरिमित हो।
(2.)रेखा,समतल अथवा आकाश का वह प्रदेश जो किसी नियत बिंदु से अनंत दूरी पर हो ।जैसे अनंत पर की रेखा अथवा आकाश।
(3.) Infinity-Becoming large beyond any fixed bound.
साधारण शब्दों में कहें तो जब मनुष्य तथा मनुष्य द्वारा निर्मित तकनीकी उपकरणों द्वारा किसी समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता हो अर्थात उसकी क्षमता सीमा से बाहर हो तो उसे अनंत की संज्ञा दी जा सकती है।
मनुष्य के ज्ञान की सीमा है उस सीमा के परे जो भी है उसे अनंत कहा जाता है। ज्ञान अनन्त है, अनन्त का केवल कुछ हिस्सा ही हम जान पाते हैं। हमारे द्वारा जितना जाना हुआ है उसके बजाए अज्ञात का हिस्सा अधिक है। हम अज्ञात में से जितना जानते जाते हैं उतना यही जान पाते हैं कि हमने बहुत कम जाना हैं।
यह स्थिति गणित में ही नहीं है बल्कि हर विषय की है वह भौतिक विषय अथवा आध्यात्मिक विषय हो। यह हो सकता है कि गणित में जिसे अनन्त कहते हैं उसे अन्य विषयों में किसी ओर नाम से पुकारते हों। जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं या हमारी सीमा के बाहर जो चीज है उसे अपरिभाषित या अनन्त कहा जाता है। ज्यों-ज्यों हम अज्ञात में से जानते जाते हैं वह परिभाषित की सीमा या जाने हुए की सीमा में आ जाता है। जो चीज हमारे मस्तिष्क से परे है वह अपरिभाषित या अनन्त कही जाती है।
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गणित विज्ञान भी है। विज्ञान पदार्थ का विश्लेषण करता है। विज्ञान खण्ड-खण्ड पर विचार करता है तथा दर्शन अखण्ड पर भी विचार करता है। विज्ञान पदार्थ के खण्ड-खण्ड करते हुए अणु, परमाणु, प्रोट्रान, न्यूट्रॉन, पोजीट्रान, इलेक्ट्रान तक पहुँच गया अर्थात् खण्ड-खण्ड का विश्लेषण करने में जुटा हुआ है परन्तु खण्ड-खण्ड में पारस्परिक सम्बन्ध पर उसका ध्यान नहीं गया। इस चक्कर में वह अखण्ड को नहीं जान पाता है। गणित का ध्यान भी शून्य की तरफ है उसका ध्यान पूर्ण की तरफ नहीं है। विज्ञान की दृष्टि स्थूल पर पड़ती है सूक्ष्म पर नहीं।
स्थूल कहते हैं जो हमारी ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा जाना जाता है, जाना जा सकता है अर्थात् जो ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ में है। जो ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ में न आए उसे सूक्ष्म कहते हैं। सूक्ष्म, स्थूल का ही एक हिस्सा है परन्तु जो अभी ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ से बाहर है वह सूक्ष्म है। जो किसी भी विधि और उपाय से पकड़ में आ जाए वह स्थूल है। परन्तु जो कभी जाना ही न जा सके उसे अज्ञेय कहते हैं। जो आज अज्ञात है लेकिन कल को जान लिया जाए या जान लिया जा सकता है उसे स्थूल कहते हैं। अज्ञात है उसे हम कभी भी जान सकते हैं परन्तु अज्ञेय है उसे कभी नहीं जान सकते हैं।
इस प्रकार जो हमारी सीमा में नहीं है, अनन्त है, जिसे कभी हम नहीं जान सकते हैं वह अज्ञेय है। जो अज्ञात है तथा किसी भी विधि से जान सकते हैं वह स्थूल है।
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इस आर्टिकल में गणित के ऐसे 5 रोचक व ज्ञानवर्धक तथ्यों का वर्णन किया गया है। इन तथ्यों को जानकर आपको आश्चर्य तो होगा ही साथ ही आपका गणित के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होगा ।जब गणित विषय के प्रति आपका सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा तो आप गणित का अध्ययन कर पाएंगे ।सकारात्मक दृष्टिकोण अर्थात हमारी मानसिकता की भूमिका किसी भी विषय को कठिन व सरल बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है ।यदि हम निराशा,बेमन व उथले मन से गणित को पढ़ते हैं तो वास्तव में वह कठिन ही नहीं बल्कि बहुत कठिन हो जाती है। गणित को यदि सकारात्मक दृष्टिकोण,प्रसन्न मन,प्रसन्न चित्त,उत्साह व उमंग के साथ पढ़ेंगे तो गणित हमें सरल ही नहीं बल्कि गणित हमें बहुत सरल लगने लगेगी।

3.5 ऐसे तथ्य जो आप गणितीय चिन्ह अनन्त (∞) के बारे में नहीं जानते हैं(5 facts you don't know about the mathematical symbol infinite (∞))-

गणित में अनन्त को एक संख्या के रूप में माना जाता है और इसे ∞ के रूप में दर्शाया जाता है। यह एक अंतहीन और असीम अवधारणा है, जो किसी ऐसी संख्या या अवधारणा को प्रस्तुत करता है, जो सभी से बड़ा हैl इस लेख में गणितीय चिन्ह अनन्त (∞) के बारे में कुछ ऐसे तथ्य दिए गए हैं जिन्हें आप नहीं जानते हैं l
APR 14, 2017
गणित में अनन्त को एक संख्या के रूप में माना जाता है और इसे ∞ के रूप में दर्शाया जाता है। यह एक अंतहीन और असीम अवधारणा है, जो किसी ऐसी संख्या या अवधारणा को प्रस्तुत करता है, जो सभी से बड़ा हैl कभी-कभी इसे लेमनीसकेट के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसके किनारे संख्या 8 के आकार की तरह होते हैं।
जैसे प्राचीन संस्कृतियों के प्रकृति की अनन्तता के बारे में विभिन्न विचार थे, वैसे ही अनन्त (∞) के बारे में विभिन्न सिद्धांत मौजूद थेl लेकिन उन्होंने इसे गणित के प्रतीक के रूप में वर्णित नहीं किया है, बल्कि इसे एक दार्शनिक अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया हैl
(1.) ईशावास्योपनिषद में वर्णित एक कविता भी अनन्त (∞) की अवधारणा को बताती है, जिसे भूमा का सिद्धांत कहते हैंl
इस कथन का सार यह है कि अनन्त अपरिवर्तनीय है और इस मंत्र को कहने का प्रतीकात्मक तरीका यह है कि अनन्त से कुछ भी नहीं निकलता हैl यहां तक कि अनन्त से निकलने वाले कुछ विचार भी अनन्त के अपने आवश्यक चरित्र पर आधारित होते हैंl
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(2.) अनन्त के जिस प्रतीक का इस्तेमाल इन दिनों किया जा रहा है, उसका एक लंबा इतिहास है। यह पहली बार सेंट बोनिफेस के क्रॉस में दिखाई दिया था, जो 8वीं शताब्दी में एक मिशनरी के माध्यम से फ्रैंकिश साम्राज्य में ईसाई धर्म को बढ़ावा देते थेl अनन्त का प्रतीक बोनिफेस के क्रॉस में लिपटा हुआ था l
What are the five interesting facts about mathematical sign infinity

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(3.) अतीत में भी अनन्त के प्रतीक का कई लोगों ने बहुत सारे अर्थ बताए हैं। कई स्रोतों के अनुसार,  पूर्णता और द्वैतवाद का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्राचीन काल में भारत और तिब्बत में इसका इस्तेमाल किया जाता था। इसे पुरूष और महिला की एकता के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता थाl यहां तक कि जादुई खेल “टैरो” में यह विपरीत ताकतों के बीच संतुलन का प्रतीक हैl ओरेबोरोस (Ouroboros) के प्राचीन प्रतीक में एक अजगर अनन्त (∞) के आकार में अपनी पूंछ खा रहा है। वास्तव में ऑबोबोरोस ही अनन्त का प्रतीक है और इसे 8 के आकार में बनाया गया है।
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(4.)17 वीं शताब्दी में अनन्त के प्रतीक को अपना गणितीय अर्थ मिला l 1655 में यह पहली बार जॉन वालिस द्वारा इस्तेमाल किया गया था, लेकिन उन्होंने कभी नहीं बताया कि उन्होंने क्यों 8 को अनन्त के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया l वास्तव में इससे मिलते जुलते प्रतीक का इस्तेमाल रोमन लोगों द्वारा बड़ी संख्या को व्यक्त करने के लिए किया जाता थाl जैसे- 1000 को CIƆ की तरह लिखा गया था जिसका अर्थ "कई" था lगणित की शाखा “कैलकुलस” में लिबनिज़ ने “अनन्त संख्या” और उसके उपयोग का अनुमान लगाया।
वास्तविक विश्लेषण में भी अनन्त (∞) के प्रतीक का उपयोग एक असीमित सीमा को दर्शाता हैl
यहां तक कि जटिल विश्लेषण में अनन्त (∞) का प्रतीक बिना चिन्ह वाले एक अनन्त सीमा को दर्शाता हैl
(5.) टैरो के खेल में अनन्त (∞) का प्रतीक एक जादुई कार्ड के ऊपर आता हैl पामेला कॉलमैन राइडर वाइट संस्करण में प्रयोग होने वाले इस कार्ड में एक जादूगर होता है जिसके सिर के ऊपर अनन्त (∞) प्रतीक होता है और लेमनीसकेट (lemniscates) को पूरे जोर से घूमा रहा होता हैl जबकि अन्य संस्करण के कार्ड में उसका सिर उसकी टोपी से ढंका होता हैl


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What are the interesting facts of mathematics?

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1.गणित के रोचक तथ्य क्या है?(What are the interesting facts of mathematics?)-

गणित को टफ व सबसे कठिन विषयों में गणना की जाती है। इसलिए अधिकांश विद्यार्थी गणित को उत्तीर्ण करके जैसे-तैसे पीछा छुड़ाना चाहते हैं ।जबकि कुछ विद्यार्थी गणित को एक खेल व आनंददायक विषय समझकर उसके अंकों से नए-नए तथा रोचक तथ्य प्रकट करते हैं ।वे हमेशा गणित के सवालों, सिद्धांतों ,समीकरणों तथा अंकों में से कुछ नई खोज करने का प्रयास करते रहते हैं ।ऐसे विद्यार्थी आगे जाकर महान गणितज्ञों की श्रेणी में खड़े होते हैं । भारत के महान् गणितज्ञ आर्यभट्ट,ब्रह्मगुप्त ,महावीराचार्य, श्रीधराचार्य ,भास्कराचार्य द्वितीय तथा आधुनिक भारत में प्रोफेसर बीएन प्रसाद ,डॉ गणेश प्रसाद ,श्रीनिवास रामानुजन यूं ही महान गणितज्ञ नहीं हुए हैं। पाश्चात्य देशों में पाइथागोरस, यूक्लिड,गाउस जैसे गणितज्ञ हुए हैं।इन्होंने अपने तप व साधना के बल पर गणित को ऐसे स्थान पर पहुंचाया है कि गणित का स्थान सभी भौतिक विषयों में सर्वोपरि तो माना जाता ही है बल्कि इसका दैनिक जीवन, विज्ञान, तकनीकी तथा प्रौद्योगिकी में गणित के बिना काम नहीं चल सकता है यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी बल्कि उचित ही है। गणित का हर विषय व हर क्षेत्र में इतना समावेश हो गया है कि इसके बिना कोई भी विषय पंगु ही है।आधुनिक युग में कोई भी विषय हो चाहे तकनीकी हो, प्रौद्योगिकी हो ,विज्ञान हो ,भूगोल हो तथा अन्य कोई भी विषय हो गणित के बिना आगे विकसित नहीं हो सकते हैं। गणित के समावेश से उनकी गुणवत्ता तथा सौंदर्य में वृद्धि हुई है ।इस आर्टिकल में कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य आपके लिए ढूंढ कर लाए हैं। हम इसी प्रकार के आर्टिकल लिखकर गणित को रोचक, सरल तथा जिज्ञासा बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं। आप लोग इन आर्टिकल को पढ़कर अपने गणित ज्ञान में वृद्धि तो कर ही सकेंगे साथ ही आपका मनोरंजन भी होगा ।आपकी गणित विषय में रुचि व जिज्ञासा बढ़ेगी ।इस तरह की उपयोगी सामग्री को पढ़कर आप तो लाभान्वित होंगे ही साथ ही अपने साथियों मित्रों में भी इसको शेयर करें ताकि वह भी लाभान्वित हो सके और उनकी भी गणित में रुचि, जिज्ञासा बढ़ सके। हम आप लोगों के लिए ऐसे ही इंटरेस्टिंग आर्टिकल लाते रहते हैं इसलिए आप पहली बार इस वेबसाइट पर आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन से फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल की जानकारी आपको मिलती रहे।

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(2.)पाई की वैल्यू निकालना तो मुश्किल है लेकिन इसे 3•14 या 22/7 माना जाता है ।कई गणितीय गणनाओं में उपर्युक्त मान का ही प्रयोग किया जाता है ।ऐसा भी कह सकते हैं कि बहुत सी कैलकुलेशन पाई के बगैर संभव नहीं है जैसे-वृत की परिधि व क्षेत्रफल ,बेलन का वक्र पृष्ठ का क्षेत्रफल व आयतन ,शंकु का वक्र पृष्ठ का क्षेत्रफल ,संपूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल तथा आयतन इत्यादि बहुत सी गणनाएं पाई के बिना संभव ही नहीं है ।अगर आप पाई की दो अंको तक वैल्यू यानी 3•14 को आईने में देखेंगे तो आपको पाई ही नजर आएगा। पाई के बारे में एक रोचक तथ्य यह भी है कि पाई की गणना करने में एम हारुका जो कि गूगल की कर्मचारी है ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है ,उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग की सहायता से पाई की गणना 31 खरब अंकों तक कर डाली है ।
3.सूरजमुखी की स्पाइरल शेपऔर अन्य पैटर्न फिबोनैकी अनुक्रम का पालन करते हैं । फिबोनैकी अनुक्रम मैथस में ऐसे पैटर्न को कहते हैं जिसमें पहले की दो संख्याओं को जोड़ने से अगली संख्या प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए  1,1,2,3,5,8 आदि ।अनुक्रम का ओर अधिक स्पष्ट अर्थ इस प्रकार है कि किसी समूह के अवयवों को इस प्रकार के क्रम में रखा जाए कि उसके सदस्यों को प्रथम ,द्वितीय, तृतीय संख्या इत्यादि से पहचान सकते हैं। जैसे विभिन्न समूहों में मानव की जनसंख्या अथवा बैक्टीरिया अनुक्रम की रचना करते हैं। कोई धनराशि बैंक खाते में जमा कर दी जाती है तो विभिन्न वर्षो में एक अनुक्रम का निर्माण करती है। किसी सामान की कम हो रही कीमतें एक अनुक्रम बनाती हैं। मानव क्रियाओं के कई क्षेत्रों में अनुक्रम का बहुत महत्वपूर्ण उपयोग है ‌विशिष्ट पैटर्नों का अनुसरण करने वाले अनुक्रम श्रेणी कहलाते हैं ।
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4.पहले तो पैलिनड्राॅमिक नंबर या उल्टा सीधा एक समान का क्या मतलब है ,यह समझते हैं ।कुछ संख्याएं ऐसी होती है कि उनका पीछे या आगे किसी भी तरफ से पढ़े लिखे तो वहीं संख्या होती है, उसमें कुछ भी बदलाव नहीं होता है जैसे 17371 को अगर हम पीछे की तरफ से लिखें तो भी यह 17371 ही होगी ।अगर हम 1234 को उल्टा लिखें तो यह 4321 हो जाएगी अर्थात यह पैलिनड्राॅमिक नंबर का पालन नहीं करती है‌। इसलिए 17371 को तो पैलिनड्रॉमिक नंबर तो कह सकते हैं लेकिन 1234 को नहीं। खैर हम यह बताना चाहते हैं कि 1 से बनी संख्याएं 111, 1111 ,11111या इस तरह की कोई ओर संख्या हो उनको आपस में गुणा करते हैं तो हमें कोई पैलिनड्राॅमिक संख्या ही प्राप्त होती है।जैसे 1111 × 1111=1234321
5. यह समझ ले कि गूगलप्लेक्स (Googolplex)क्या है?
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दरअसलGoogolplex 10 की पावर 10 की पावर 100 की वैल्यू है ।हमारी कायनात में कोई ऐसा कागज़ या साधन नहीं है जिस पर हम उसे लिख सके या फिर कंप्यूटर में भी आप इसको हल करना चाहेंगे तो कोई जवाब नहीं मिलेगा क्योंकि कंप्यूटर में उतनी मेमोरी नहीं होगी ।
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6.7 का हमारी प्रकृति से बहुत लेना-देना है जैसे दुनिया में सात अजूबे हैं, सात समुंदर ,सात दिन ,इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं ,एक ऑनलाइन पोल में भी ज्यादातर लोगों ने 7 को अपना पसंदीदा नंबर बताया है। मारवाड़ी में सात-सात का अर्थ होता है,मिलकर कोई कार्य करना, हिंदी में 7 का अर्थ आनंद व प्रसन्नता होता है। सात-पांच मुहावरा भी है जिसका अर्थ होता है चालाकी, चालबाजी ,बहाना ,तकरार ।
7.6174 को कापरेकर काॅन्सटैंट कहा जाता है। दरअसल 6174 को एक जादुई नंबर भी माना जाता है। चार अंकों की किसी संख्या के कुछ फंक्शन के बाद हमेशा 6174 ही आता है।
8.1 से लेकर 100 तक की सभी संख्याओं को जोड़ा जाए तो 5050 ही आएगा ।इसी प्रकार 9 का कितना ही बड़ा पहाड़ा बना ले और उनके अंको का योग कर ले करें तो अंत में 9 ही आएगा जैसे 999 के अंकों का9+9+9=27, 2+7=9 इत्यादि ।
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9.चीन और जापान में 4 को अशुभ माना जाता है इसका संबंध मौत से जोड़ा जाता है ।इसलिए चीन के कई अस्पतालों में चौथा फ्लोर नहीं होता है। हमारे देश भारत में भी जब कोई व्यक्ति मर जाता है तो हिंदुओं में अर्थी को चार लोग श्मशान तक उठाकर ले जाते हैं ।सोने की खाट के भी चार पाए होते हैं इसलिए उसे चारपाई कहते हैं।
इस तरह यदि हम संख्याओं का अपने दैनिक जीवन से तालमेल बिठाए तो इस तरह के और मनोरंजक तथ्य उभरकर आते हैं ।इस प्रकार के तथ्यों को ढूंढने से हमारे ज्ञान में वृद्धि तो होती है साथ ही गणित में रुचि व जिज्ञासा के साथ हमारी तार्किक क्षमता ,मनन व  चिंतन करने की क्षमता का विकास होता है ।है न !गणित एक अद्भुत विषय।

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A Huge Conflict: What Is Zero Called Until The Power of Zero?

A Huge Conflict: What Is Zero Called Until The Power of Zero?

1.एक विशाल संघर्ष: शून्य को शून्य की घात तक क्या कहा जाता है?का परिचय (Introduction to A huge conflict: What is Zero called until the power of zero?)-

A Huge Conflict: What Is Zero Called Until The Power of Zero?

A Huge Conflict: What Is Zero Called Until The Power of Zero?

शून्य की घात शून्य हो या ऋणात्मक घात हो उसे अपरिभाषित कहा जाता है। अपरिभाषित का अर्थ है "विशिष्ट गणितीय परिभाषा के बिना उपयोग किया जानेवाला शब्द, जिसका अर्थ है कि यह विशुद्ध रूप से मनोवैज्ञानिक है, एक शब्द जो स्वयंसिद्धों को संतुष्ट करता है लेकिन अन्यथा परिभाषित नहीं है।
मनुष्य के ज्ञान की सीमा है उस सीमा के परे जो भी है उसे अपरिभाषित कहा जाता है। ज्ञान अनन्त है, अनन्त का केवल कुछ हिस्सा ही हम जान पाते हैं। हमारे द्वारा जितना जाना हुआ है उसके बजाए अज्ञात का हिस्सा अधिक है। हम अज्ञात में से जितना जानते जाते हैं उतना यही जान पाते हैं कि हमने बहुत कम जाना हैं।
इस आर्टिकल में शून्य की घात शून्य और शून्य की ऋणात्मक को अपरिभाषित बताया गया है। यह स्थिति गणित में ही नहीं है बल्कि हर विषय की है वह भौतिक विषय अथवा आध्यात्मिक विषय हो। जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं या हमारी सीमा के बाहर जो चीज है उसे अपरिभाषित या अनन्त कहा जाता है। ज्यों-ज्यों हम अज्ञात में से जानते जाते हैं वह परिभाषित की सीमा या जाने हुए की सीमा में आ जाता है। जो चीज किसी हमारे मस्तिष्क से परे है वह अपरिभाषित या अनन्त कही जाती है।
गणित विज्ञान भी है। विज्ञान पदार्थ का विश्लेषण करता है। विज्ञान खण्ड-खण्ड पर विचार करता है तथा दर्शन अखण्ड पर भी विचार करता है। विज्ञान पदार्थ के खण्ड-खण्ड करते हुए अणु, परमाणु, प्रोट्रान, न्यूट्रॉन, पोजीट्रान, इलेक्ट्रान तक पहुँच गया अर्थात् खण्ड-खण्ड का विश्लेषण करने में जुटा हुआ है परन्तु खण्ड-खण्ड में पारस्परिक सम्बन्ध पर उसका ध्यान नहीं गया। इस चक्कर में वह अखण्ड को नहीं जान पाता है। गणित का ध्यान भी शून्य की तरफ है उसका ध्यान पूर्ण की तरफ नहीं है। विज्ञान की दृष्टि स्थूल पर पड़ती है सूक्ष्म पर नहीं।
स्थूल कहते हैं जो हमारी ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा जाना जाता है, जाना जा सकता है अर्थात् जो ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ में है। जो ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ में न आए उसे सूक्ष्म कहते हैं। सूक्ष्म, स्थूल का ही एक हिस्सा है परन्तु जो अभी ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ से बाहर है वह सूक्ष्म है। जो किसी भी विधि और उपाय से पकड़ में आ जाए वह स्थूल है। परन्तु जो कभी जाना ही न जा सके उसे अज्ञेय कहते हैं। जो आज अज्ञात है लेकिन कल को जान लिया जाए या जान लिया जा सकता है उसे स्थूल कहते हैं। अज्ञात है उसे हम कभी भी जान सकते हैं परन्तु अज्ञेय है उसे कभी नहीं जान सकते हैं।
इस प्रकार जो हमारी सीमा में नहीं है, अनन्त है, अपरिभाषित है जिसे कभी हम नहीं जान सकते हैं वह अज्ञेय है। जो अज्ञात है तथा किसी भी विधि से जान सकते हैं वह स्थूल है।
यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

2.एक विशाल संघर्ष: शून्य को शून्य की घात तक क्या कहा जाता है?(A huge conflict: What is Zero called until the power of zero?)-

शून्य को शून्य की घात से क्या कहा जाता है? यह एक ऐसा सवाल है जो 35 बिलियन और 378 मिलियन से अधिक बार पूछा गया है। और 98% लोगों ने सही उत्तर नहीं दिया है।
पहला, 2⁵ , का क्या मतलब है? इसका मतलब 2 गुना 2 गुना 2 गुना 2 गुना 2 है। दूसरे शब्दों में, 2 से 5 गुना गुणा करें। अब, हम कह सकते हैं 0⁰ का अर्थ है "0 से गुणा शून्य"। हम्म, वह अजीब है।
आइए विभिन्न दिशाओं में जाएं और अन्य शक्तियों को खोजें।
एक बार जब हम एक घातीय समीकरण जैसे 0⁹ = 0 देखते हैं, तो हम कहेंगे "शून्य से नौवीं घात  शून्य है"।
09=0x0x0x0x0x0x0x0x0,   0100=0,  04=0
02=0  ,03=0,   01=0
सकारात्मक घातों द्वारा उठाए गए शून्य के कुछ उदाहरण।
यह 0⁰ = 0 जैसा दिखता है, लेकिन 0 से -5 वाँ घात  1 ओवर 0 है जो अपरिभाषित है और 0 से -100 वीं घात के समान है। नकारात्मक घातांक 0⁰ को अपरिभाषित होना चाहिए।
0-5=1/05=1/0x0x0x0x0=1/0=undefined
0-4=1/04=1/0x0x0x0=undefined
0-2=1/02=undefined,   0-1=1/0=undefined
नकारात्मक शक्तियों द्वारा उठाए गए शून्य के कुछ उदाहरण।
इसे एक अलग कोण से हमला करते हैं। अन्य संख्याएँ 0 के बराबर 1 बढ़ा दी गईं।
10000000=1,-10=1   ,1790=1,  00=?  ,100=1
शून्य घात  द्वारा उठाए गए संख्याओं के कुछ उदाहरण।
यह पैटर्न बताता है कि 0⁰ भी 1 होना चाहिए। तो, ऐसा लगता है कि निश्चित रूप से एक विशेष सटीक समाधान नहीं है? कौन सा सही है? फिर भी, स्थिति के आधार पर, आप एक उत्तर में काम करते हैं, दूसरों की तुलना में बेहतर हो सकता है। सबसे अच्छा स्पष्टीकरण विश्वसनीय होना चाहिए, अनावश्यक जटिलता को कम करना चाहिए और लाभकारी होना चाहिए।
अधिकांश सिद्धांतकार चुनते हैं कि कई मामलों में, 1, 0⁰ के लिए सबसे अच्छी परिभाषा है। आइए इसके दो कारणों पर नजर डालते हैं। बी को बढ़ाने के लिए बी अवयवों  के सेट की संख्या के रूप में देखा जा सकता है जिन्हें a अवयवों के सेट से चुना जा सकता है।
उदाहरण के लिए, of को एक तत्व के सेट की मात्रा के रूप में देखा जा सकता है जिसे दो तत्वों के सेट से चुना जा सकता है।
A Huge Conflict What Is Zero Called Until The Power of Zero

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और 0⁰ शून्य अवयवों  के सेट की मात्रा है जिसे शून्य अवयवों  के सेट से चुना जा सकता है। जो 1 होना चाहिए! इसलिए, एक्सप्रेशन की समझ के साथ 1 ही एकमात्र विश्वसनीय है।
इस परिप्रेक्ष्य में, कोई अन्य परिभाषा अनावश्यक रूप से चीजों को भ्रमित करेगी। एक अन्य मामले के लिए जहां 0⁰= 1एक लाभकारी परिभाषा है, आइए द्विपद कथन को देखें।
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X = 0 के रूप में, यह 1 = 0⁰ • 1. तक सरल हो जाता है। इस आइटम में, 0⁰ के लिए एकमात्र स्पष्टीकरण जो द्विपद कथन को सही बनाता है, 1. 1. फिर 0⁰ = 1 एकमात्र परिभाषा है जो अनावश्यक जटिलता से बचती है। फिर भी, हम जो गणित कर रहे हैं, उसके आधार पर 1 स्थायी रूप से सर्वोत्तम परिभाषा नहीं हो सकती है।
उदाहरण के लिए आइए कुछ सीमाओं को देखें। एक बिंदु पर एक फ़ंक्शन की सीमा फ़ंक्शन के दृष्टिकोण का मान है क्योंकि इसका इनपुट ए। हम फॉर्म 0⁰की सीमा में शामिल होते हैं जब x = 0. एक साधारण  1,x aproaches 0 के रूप में x⁰ की सीमा होती है। 0. चूंकि xaches = 1 अन्य सभी बिंदुओं पर है, 0 पर इसकी सीमा 1 के साथ-साथ 1 है। इससे यह प्रमाणित होता है कि 0⁰ = 1.
फिर भी विभिन्न मूल्यों के साथ फार्म 0⁰  की अन्य सीमाएं हैं! 0 से x की सीमा दाईं ओर से 0 है ... और बाईं ओर से यह अपरिभाषित है। और फॉर्म की अन्य सीमाएं 0 कोई भी ऐसा मूल्य हो सकता है जो e है।
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A Huge Conflict What Is Zero Called Until The Power of Zero

जब आप सीमा से निपट रहे हों, तो ये विरोध 0⁰ को "अनिश्चित रूप" या "अपरिभाषित" कहने के लिए अच्छे कारण हैं। ये एकमात्र परिभाषाएं हैं जो हम सीमा को परिभाषित करने के तरीके के अनुरूप हैं।तो 0⁰ क्या है? निर्भर करता है! अक्सर, 1 सबसे अच्छा जवाब है। हालांकि, जब सीमाओं के साथ, "अपरिभाषित" या "अनिश्चित रूप" ओएस अधिक समझदार है। गणित के प्रकार के आधार पर, हम परिभाषाएँ और रूढ़ियाँ भी बदल सकते हैं!
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Why We Rationalize The Denominator?

Why We Rationalize The Denominator?

Why We Rationalize The Denominator

Why We Rationalize The Denominator

1.क्यों हम हर का परिमेयकरण करते हैं  का परिचय ??(Introduction of Why We Rationalize The Denominator?)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि व्यंजक का हर ऐसा अंक हो जिसका प्राकृत संख्या में वर्गमूल नहीं निकाला जा सकता हो तो उसके परिमेयकरण की आवश्यकता क्यों हैं और उसका क्या लाभ है? जबकि अंश में करणी चिन्ह में संख्या हो तो उसके परिमेयकरण की आवश्यकता नहीं होती है अथवा उसका परिमेयकरण नहीं करते हैं यदि करते हैं तो कब करते हैं? वास्तविक संख्याएँ दो प्रकार की होती है - (1.)परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) (2.)अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers)

(1.)परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) -

ऐसी संख्याएँ जो p/q के रूप में लिखी जा सकती हैं जहाँ p व q पूर्णांक हैं, दोनो का कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड नहीं है तथा q शून्य नहीं है, परिमेय संख्याएँ कहलाती है।

(2.)अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) -

ऐसी संख्याएँ जो परिमेय नहीं है अपरिमेय संख्याएँ कहलाती है।
√2=1.414213562.......
Pi =3.141592653.........
(3.)यदि दो परिमेय संख्याओं को जोड़ें, घटाएं, गुणा करें तब भी हमें एक अपरिमेय संख्या प्राप्त होती है (अर्थात् जोड़, घटाना, गुणा के सापेक्ष परिमेय संख्याएँ संवृत (closed) होती है। हालांकि अपरिमेय संख्याएँ भी योग और गुणन के क्रमविनिमेय, साहचर्य और बंटन नियमों को संतुष्ट करती है। परन्तु अपरिमेय संख्याओं के योग, अंतर. भागफल और गुणनफल सदा अपरिमेय नहीं होते हैं। इस प्रकार एक परिमेय संख्या में अपरिमेय संख्या जोड़ते हैं और एक परिमेय संख्या को एक अपरिमेय संख्या से गुणा करते हैं तो ये अपरिमेय संख्या होती है।
(4.)एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का जोड़ या घटाने पर एक अपरिमेय संख्या प्राप्त होती है।
(5.)एक अपरिमेय संख्या के साथ एक शून्येत्तर (non-zero) परिमेय संख्या का गुणनफल या भागफल से एक अपरिमेय संख्या प्राप्त होती है।
(6.) यदि हम दो अपरिमेय संख्याओं को जोड़ें, घटाएँ, गुणा करें या एक अपरिमेय संख्या में दूसरी अपरिमेय संख्या का भाग दें तो परिणाम में परिमेय या अपरिमेय कुछ भी हो सकता है।

(7.)परिमेयकरण (rationalise) -

जब एक व्यंजक के हर में वर्गमूल वाला एक पद होता है या कोई संख्या करणी चिन्ह के अन्दर हो तब इसे तुल्य व्यंजक में हर को परिमेय संख्या में परिवर्तित करने की क्रियाविधि को हर का परिमेयकरण कहा जाता है।
(8.)हर का परिमेयकरण करने से व्यंजक का सरलीकरण हो जाता है जिससे हम उसका मान आसानी से निकाल सकते हैं। कभी-कभी अंश के परिमेयकरण से भी व्यंजक का सरलीकरण होता है और हम व्यंजक का मान आसानी से ज्ञात कर सकते हैं।
(9)अंश या हर का परिमेयकरण करने से अपरिमेय संख्या परिमेय संख्या में परिवर्तित हो जाती है जिससे व्यंजक का मान आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
Why We Rationalize The Denominator?

Why We Rationalize The Denominator?

(10.)परिमेयकरण से बहुत बड़ी तथा अव्यवस्थित व्यंजक छोटे रूप में तथा व्यवस्थित रूप में हो जाता है जिससे उससे लिखने व पढ़ने में आसानी रहती है।
(11.)परिमेयकरण से व्यंजक संक्षिप्त हो जाता है और कहा भी गया है कि संक्षिप्त में अपनी बात को कहना या व्यक्त करना, वाक्य या भिन्नों की सुन्दरता को बढ़ाता है। व्यंजक को हल करने में रुचि व जिज्ञासा जाग्रत होती है जबकि जटिल व सम्मिश्र भिन्न अरुचिकर, बोझिल होता है।
(12.)यही कारण है कि किसी व्यंजक का परिमेयकरण किया जाता है या परिमेयकरण करने की आवश्यकता होती है। अक्सर कभी-कभी हम हमारे उत्तर को बिना परिमेयकरण के छोड़ देते हैं। विद्यार्थी अक्सर यही सवाल पूछते हैं कि बिना परिमेयकरण के उत्तर दे दिया जाए तो ठीक होगा या नहीं। उत्तर में निवेदन है कि परिमेयकरण से हमारे ज्ञान की गहराई तथा व्यापकता का पता चलता है इसलिए जहाँ तक हो सके परिमेयकरण करना चाहिए।
(13.)कई बार भिन्नों का मान अंनत या अपरिभाषित प्राप्त होता है परन्तु परिमेयकरण से  अंनत या अपरिभाषित की समस्या समाप्त हो जाती है। 
(14.)यदि यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें ।यदि आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.क्यों हम हर का परिमेयकरण करते हैं ??(Why We Rationalize The Denominator?)-

आपने इसे बार-बार सुना है, "भाजक को युक्तिसंगत बनाएँ। हर को तर्कसंगत बनाने के लिए सुनिश्चित करें! ”लेकिन क्यों ??? किसने तय किया कि मूल को भाजक से और अंश में से निकाला जाना है?आरटीडी अलजेब्रा से कैलकुलस तक मानक क्यों बने, इसके तीन कारण हैं।

3.कॉमन्सेंस कारण(Commonsense Reason)-

आरटीडी की आवश्यकता का मानक कारण पूरी तरह से व्यावहारिक है। जैसा कि आपने सबसे अधिक खोजा है, गणित में आप अक्सर कई अलग-अलग तरीकों और रूपों में समाधान लिख सकते हैं। ये सभी विविधताएं शांत हैं, लेकिन व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, वे आपके कागजात को ग्रेडिंग करने वालों के लिए जीवन को अधिक कठिन बनाते हैं।
उत्तरों के लिए एक मानक रूप को परिभाषित करना और आवश्यक करना आपके शिक्षक को यह सत्यापित करने के लिए समय लेने वाला सिरदर्द बचाता है कि आपका समाधान उत्तर कुंजी के बराबर है, या इससे भी बदतर, गलती से आपके उत्तर को गलत चिह्नित कर रहा है!
जैसे एक अंश को उसके सरलतम रूप में कम करने के लिए, आरटीडी, हर में वर्गमूल  के साथ अंशों को सरल बनाने के लिए प्रोटोकॉल है।

4.उचित कारण(Reasonable Reason)-

एक सामान्य रूप से परिभाषित नामकरण समझ में आता है और सभी, लेकिन फिर भी हमें इस सवाल के साथ छोड़ देता है: हमने क्यों तय किया है कि अंश में वर्गमूल  होना ठीक है, लेकिन हर  में वर्गमूल नहीं है ??
(2√3) / 3  को 2 / √3 का सरल रूप क्यों कहा जाता है?
कारण यह है कि अगर हमें रेडिकल के साथ अंश जोड़ना या घटाना है, तो यह गणना करना आसान है कि तर्कहीन संख्याओं के बजाय हर में पूर्ण संख्याएं हैं। उदाहरण के लिए, गैर-तर्कसंगत संस्करण की तुलना में (2√3 / 3) + ((3 -√ )2) / 7) जोड़ना आसान है: (2 / √3) + (1 / (3 + √2)।
अंशों के पहले सेट को एक साथ जोड़ने के लिए हम सभी को 21 का एक सामान्य भाजक बनाना होगा और फिर अंशों से शब्दों को जोड़ना होगा। यह लगभग स्पष्ट नहीं है कि आम भाजक भिन्न के दूसरे सेट का क्या है।
दूसरी समस्या को हल करने के लिए, आप सबसे पहले हर को युक्तिसंगत बनाने की कोशिश करेंगे और फिर एक साथ फ्रैक्चर को जोड़ने से पहले 21 के सामान्य हर को बनाएं।
इसलिए RTD समाधानों की तुलना और ग्रेडिंग के लिए एक सामान्य रूप प्रदान करता है और साथ ही जरूरत पड़ने पर हाथ से आगे की गणना करना हमारे लिए आसान बनाता है।

5.ऐतिहासिक कारण(Historical Reason)-

इस बिंदु पर आप सोच रहे होंगे, "क्यों न केवल वर्गमूल  को वर्गमूल  में छोड़ दिया जाए और उन्हें तब और युक्तिसंगत बनाया जाए जब मुझे भिन्नों को जोड़ने या घटाने की आवश्यकता होती है?"
और हाँ, यह एक वैध बिंदु है। यही कारण है कि शायद हम आरटीडी के लिए अक्सर ऐसा क्यों करते हैं, इसका सबसे अच्छा जवाब ऐतिहासिक है। उत्तर जो हमें कंप्यूटर और कैलकुलेटर से पहले जीवन में वापस ले जाता है, सर्वव्यापी थे। वापस जब लोगों को नियमित रूप से विभाजन करना पड़ा ... हाथ से! * दम तोड़ देना! *
चलो ऊपर से हमारे दो समकक्ष अंशों पर एक नज़र डालें:
यदि हम वास्तव में इन अंशों को विभाजित करना चाहते हैं तो क्या होगा?
आइए हाथ से 2/√3  विभाजित करके शुरुआत करें।
कैलकुलेटर से पहले, आप हाथ से√3   के एक अनुमान को खोजने के लिए एक एल्गोरिथ्म का उपयोग करके शुरू करेंगे, जो कि 1.73205081 है ... √3 को अनुमानित करने के बाद, आप फिर अपना लंबा विभाजन सेट करेंगे।
यदि यह आपको जटिल लगता है, तो इसका कारण यह है। एक तर्कहीन संख्या होने के कारण विभाजक व्यावहारिक रूप से अनसुना है।
इस विभाजन को करने के लिए, आपको यह तय करना होगा कि आप कितने दशमलव स्थानों को अपने आस-पास रखना चाहते हैं, उस दशमलव स्थान पर चक्कर लगाना चाहते हैं, फिर आपको अपने भाजक को बनाने के लिए लाभांश और भाजक दोनों को दस की बड़ी शक्ति से गुणा करना होगा। एक पूरी संख्या। वह सब करने के बाद आप उन दो अनिर्दिष्ट संख्याओं को विभाजित करने के गन्दे कार्य के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
अब इस बात पर एक नज़र डालते हैं कि हम समतुल्य, परिमेय अंश को विभाजित करने के बारे में कैसे जानते हैं: (2√3) / 3।
कैलकुलेटर के बिना, आप उपरोक्त √3 के लिए सन्निकटन की गणना करके शुरू करते हैं, जो कि 1.73205081 है… अगला, आपने 1.73205081… 2 से गुणा करके 3.46410162 प्राप्त किया… फिर बस अपना विभाजन सेट करें।
यह हाथ से विभाजित करने के लिए बहुत आसान है! हमें कोई भी पूर्व काम नहीं करना है, हम सीधे विभाजन समस्या में कूद सकते हैं।

6.और सबसे महत्वपूर्ण बात, आरटीडी के लिए कैसे :(And most importantly, HOW to RTD )-

अब जब आप समझ गए हैं कि RTD के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है, तो आप इस पर अभ्यास करना चाहते हैं!
यह पहला ट्यूटोरियल बताता है कि मानक वर्ग मूल के साथ भाजक को कैसे युक्तिसंगत बनाया जाए, तब प्रदर्शित करने के लिए चाल को दर्शाता है कि भाजक के परिमेय परिदृश्य को कैसे संभालें जब आपके पास एक पूर्ण संख्या का योग या अंतर हो और भाजक में एक वर्गमूल हो। ऐसा करने के लिए आपको संयुग्म से परिचित कराया जाएगा।
इस दूसरे ट्यूटोरियल में, आप सीखेंगे कि घनमूल और चतुर्थमुल  के साथ अधिक कठिन हर को कैसे युक्तिसंगत बनाया जाए। हम इस बारे में भी बात करेंगे कि प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आप वैकल्पिक भिन्नात्मक घातांक संकेतन का उपयोग कैसे कर सकते हैं।
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The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

1.हनी मधुमक्खियों और गणित के बीच रहस्यमय संबंध का परिचय ( Introduction of The mysterious connection between honey bees and mathematics)-

गणित का ज्ञान प्राप्त करने या सीखने की इच्छाशक्ति हो तो मनुष्य किसी से भी चाहे वह छोटा हो या बड़ा यहाँ तक कि प्रकृति से भी सीख सकता है। सीखने के लिए सद्गुरु के रूप में हमारे अन्दर विवेक अर्थात् प्रज्ञा विद्यमान है। ज्ञान प्राप्ति के लिए मनुष्य में अन्त:करण विद्यमान है शर्त यही है कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए आपमें ज्ञान की प्यास हो,रुचि हो, आप जिज्ञासु प्रवृत्ति के हों। फिर चाहे आप बहुत बड़ गणितज्ञ न हो अर्थात् गणित का भले ही  साधारण ज्ञान ही रखते हों तो आप सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।
सीखने के साथ-साथ आपमें जो काम, क्रोधादि विकार हैं वे दूर होते जाने चाहिए तो समझा जाना चाहिए कि आपके गणित सीखने की दिशा सही है।
बहुत कठोर तप, त्याग, साधना और ध्यान करने पर भी अन्तर्बोध अर्थात् विवेक जाग्रत नहीं होता है परन्तु प्रकृति की कोई घटना ऐसी घटित हो जाती है कि जिससे हमारे अन्दर अन्तर्बोध पैदा हो जाता है। जैसे महात्मा बुद्ध ने कठोर तप व साधना की परन्तु अन्तर्बोध नहीं हुआ परन्तु एक दिन पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे थे और ध्यान कर रहे थे तो उनको अन्तर्बोध हुआ और उस वृक्ष को बोधि वृक्ष कहा जाता है। इसी प्रकार न्यूटन ने पेड़ से सेब गिरते देखकर गुरुत्वाकर्षण के बल की खोज की, चूल्हे पर सब्जी पकते समय भाप के द्वारा बार-बार ढक्कन के ऊपर उठते देखकर जेम्स वाट ने भाप के इंजन का  आविष्कार किया। एक राजा अपना राज्य हार चुका था परन्तु जंगल में मकड़ी के छत से गिरने और वापिस दीवार पर बार-बार चढ़ने को देखकर प्रेरणा व शिक्षा मिली कि जीत के लिए बार-बार प्रयत्न करना आवश्यक है।
गणित को पढ़ना हमारे लिए एक कला या व्यवसाय से बढ़कर अधिक है तो हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम यदि पढ़ने या पढ़ाने को उस तरह प्रेम करते हैं जैसे एक संगीतकार अपने संगीत से प्रेम करता है, कोई चित्रकार अपने चित्र से प्रेम करता है या कोई गायक अपने गाने से करता है। हर सुबह उठते ही यदि सबसे पहले हम परमात्मा का ध्यान करने के बाद इसी बात का ध्यान करें और विचार करें तो अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो सकती है।
शुरुआत के दिनों में मैं परेशान और शारीरिक रूप से अस्वस्थ सा रहता था। यह मेरी कमजोरी बन चुकी थी लेकिन जब मैंने ठान लिया कि इस कमजोरी से मुक्ति प्राप्त करनी है तो आज मैं अपने आपको तरोताजा,स्वस्थ और प्रसन्नचित्त पाता हूं। संघर्ष, कठिनाइयों, समस्याओं से मैंने तनाव, चिंता और आशंका से बचना सीख लिया। 
                                                     धैर्य ,सहनशीलता और समय
मैंने यह भी सीखा कि धैर्य ,सहनशीलता और समय हमारी बहुत सी समस्याओं को सुलझा देता है। जब भी मैं गणित की किसी समस्या से चिंतित होता हूँ तो अपनी समस्या को धैर्यपूर्वक और अपनी बुद्धि व कौशल के आधार का प्रयोग करके हल कर लेता हूँ । आपमें विवेक, धैर्य और साहस के साथ सहनशीलता ,कठिन परिश्रम करने का गुण है तो आप गणित की किसी भी समस्या का समाधान आसानी से कर सकते हैं। धैर्य के बारे में निम्न
विचारकों के कथन पर विचार करें -"प्रकृति का अनुसरण करो - धैर्य उसका रहस्य है। " - एमर्सन"धैर्य कड़वा होता है, पर उसका फल मधुर होता है।" - रूसो
मनुष्य कटु उक्तियों को किसी प्रकार सहन कर लेता है ,परन्तु जब उसके ग्रन्थों और धर्मनेताओं पर आक्रमण होता है तब उसके सहनशीलता की प्राय:समाप्ति हो जाती है।   -हरिऔंध  
इस आर्टिकल में यह बताया गया है कि मधुमक्खी ब्रम्हांड का सबसे मधुर निर्माता है। अपना समय सुदंर फूलों के पास बिताता है और उसकी रचना शहद जो वर्षों बाद भी खराब नहीं होता, जिसके अन्दर गुणों का भण्डार है, मीठा इतना कि खाते रहने पर भी अमृत के समान लगता है, इस प्रकार की वस्तु का निर्माण करती है। इस प्रकार मधुमक्खी एक महान गणितज्ञ साबित होती है। वह हमें सीखाती है कि गणित, प्रकृति और विज्ञान की भाषा है। उसके पास ज्यामितीय रूप से छत्ता निर्माण करने की कला है जो कि हेक्सागोन के आकार का होता है। एक छाता के निर्माण के लिए मधुमक्खी को अर्थव्यवस्था को जानना होता है।
गणित को सीखने के लिए बहुत गहरा ज्ञान होना और बड़े मस्तिष्क के होने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार मधुमक्खी सैल्समैन समस्या को हल करती है, वे अपनी लागत को कम से कम करने के लिए इष्टतम मार्ग का चयन करती है। यही कारण है कि मधुमक्खियां प्रकृति के महान गणितज्ञों में से एक है। गणित सार्वभौमिक भाषा है और जब आप एक मधुकोश को ध्यानपूर्वक देखेंगे तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे उसमें आप सार्वभौमिक भाषा का दर्शन कर सकते हैं।
इस प्रकार मनुष्य सीखना चाहे तो कहीं से भी, कभी भी, किसी से भी ज्ञान प्राप्त कर सकता है, आवश्यकता है निष्कपट तथा निर्मल हृदय की। यदि आपमें ये गुण है तो आपको गणित को सीखने से कोई भी नहीं रोक सकता है। आपके सामने कितनी ही बड़ी चुनौतियां हों और मुसीबतें आ जाएं, चाहे पूरा संसार आपके विरोध में खड़ा हो जाए लेकिन आपमें दृढ़संकल्पशक्ति हैं तो आप निश्चित रूप से सीख सकते हैं।
अन्त में यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर व लाईक कीजिए तथा आपका कोई सुझाव हो या कोई परेशानी हो तो कमेंट करके बताएं ।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.हनी मधुमक्खियों और गणित के बीच रहस्यमय संबंध(The mysterious connection between honey bees and mathematics)-

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"..." ... वह विशाल पुस्तक जो हमारी आंखों के सामने हमेशा के लिए खुल जाती है, मेरा मतलब है कि ब्रह्मांड, ... तब तक पढ़ा नहीं जा सकता जब तक हमने भाषा नहीं सीखी ... यह गणितीय भाषा में लिखा गया है, जिसके बिना ... किसी एक शब्द को समझना मानवीय रूप से असंभव है "- गैलीलियो, आधुनिक विज्ञान के पितामधु मक्खियों के बारे में सभी जानते हैं। हालांकि, मधुमक्खियों ने यह जान लिया है कि मानव गणितज्ञों को हजारों वर्षों तक क्या नहीं पता है। ब्रह्मांड में सबसे मधुर निर्माता हो सकता है। इसका शरीर खूबसूरती से प्रतिरूपित है, जहां चाहे वहां उड़ान भर सकता है, अपना समय सुंदर फूलों के पास बिताता है, प्रकृति में सबसे स्वादिष्ट और अविश्वसनीय पदार्थ पैदा करता है, शहद, और, सबसे महत्वपूर्ण बात, यह एक महान गणितज्ञ है। उनके पास जितना ज्ञान है उनके आसपास की दुनिया विज्ञान और इंजीनियरिंग के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों से स्नातक करने के लिए तुलनीय है। वे हमें दिखाते हैं कि गणित प्रकृति और विज्ञान की भाषा है। अरस्तू शहद मधुमक्खियों के पेचीदा व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने वाले पहले लोगों में से एक थे। सदियों बाद, गणितज्ञ मधुमक्खियों से मोहित हो गए हैं।
मैं निश्चितता के साथ घोषणा कर सकता हूं कि अगर जॉन स्नो उत्तर में राजा थे, तो मधुमक्खी कीट राज्य में राजा हैं। वे जानवरों के साम्राज्य में अन्य प्राणियों की तुलना में आश्चर्यजनक रूप से बुद्धिमान साबित हुए हैं।
The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics,The King in the North.,

The King in the North.


एक प्रसिद्ध गलतफहमी है:
"यदि मधुमक्खी पृथ्वी की सतह से गायब हो जाती है, तो मनुष्य के पास जीने के लिए चार साल से अधिक नहीं होगा।"
मनुष्य शहद की मक्खियों की पूर्णता को नहीं समझ सके जो कि निर्माता द्वारा गणित की खोज तक बनाई गई थी। लेकिन मधु मक्खियों को प्रकृति का सबसे बड़ा गणितज्ञ क्या बनाता है? अब तक, हमारे पास ऐसा मानने के 5 कारण हैं:
उनके पास एक ज्यामितीय रूप से प्रभावशाली मोमी कंघी का उत्पादन करने की क्षमता है।
यही कारण है कि वे अन्य आकारों पर हेक्सागोन पसंद करते हैं
वे आसानी से "ट्रैवलिंग सेल्समैन समस्या" को हल कर सकते हैं
वे शून्य के विचार को समझ सकते हैं।
वे सरल और बुनियादी गणितीय प्रश्न हल कर सकते हैं।
एक दो सप्ताह पुराना मधुकोश मूल रूप से एक मोम प्रिंटर बन जाता है। यह शहद से चीनी को एक मोमी पदार्थ में बदल सकता है। इस बिंदु पर, एक पूरी तरह से प्रभावशाली बात होती है; एक मधुमक्खी और उसके दोस्त यकीनन एक मधुमक्खी के चारों ओर सबसे गणितीय और वास्तुशिल्प रूप से कुशल डिजाइनों में से एक बनाते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि उन्होंने कभी भी टेसूलेशन या इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का अध्ययन नहीं किया है। लेकिन मधुमक्खी के लिए डिजाइन क्यों मायने रखता है? यह सामग्री, मोम के कारण है।
मोम मधुमक्खियों के लिए बेहद मूल्यवान है और एक छत्ते का निर्माण करना एक महंगा काम है। हजारों शहद की मक्खियां हजारों मील की यात्रा करती हैं, अमृत को खोजने, उसे मोम में तब्दील करने के लिए हजारों-हजारों घंटे खर्च करती हैं, और फिर मोम को एक सटीक पैटर्न में बदल देती हैं। वे सभी कदम एक मधुकोश को बहुत मूल्यवान बनाते हैं।
एक छत्ते के निर्माण के लिए, मधु मक्खियों को अर्थव्यवस्था को जानना होगा। वे शहद के भंडारण के लिए यादृच्छिक आकार नहीं बना सकते। एक ज्यामितीय आकृति होनी चाहिए जो किसी भी अन्य की तुलना में अधिक किफायती हो। यहां, "अधिक किफायती" का मतलब है कि मधु मक्खियों को एक ऐसे आकार की आवश्यकता होती है जिसमें बहुत सारे शहद बनाने और संग्रहीत करने के लिए कम से कम मोम की आवश्यकता होती है। दूसरे शब्दों में, सबसे छोटी पार्श्व सतह क्षेत्र और अधिकतम क्षमता। यह एक गणितीय दृष्टिकोण है।
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 Honey Bees on a Honeycomb

सर्कल की कोशिकाओं को एक साथ रखें, वे हनी बी भंडारण प्रणाली के लिए तार्किक नहीं हो सकते हैं। यदि आप एक टेसेलेशन या एक पैटर्न बनाने के लिए हलकों को एक साथ रखते हैं, तो आप उनके बीच अंतराल और व्यर्थ स्थान को नोटिस करेंगे। एक अच्छा अर्थशास्त्री कोई अंतराल नहीं चाहता है इसके अलावा, अगर वे परिपत्र कोशिकाओं को बनाने पर जोर देते हैं, क्योंकि कोई भी दीवार साझा नहीं की जा सकती है, तो उन्हें हर एक सेल के लिए अलग सेल दीवारें बनानी होंगी, जो फिर से मोम सामग्री की बर्बादी और समय की बर्बादी है। इसलिए मधु मक्खियों को नियमित बहुभुजों के साथ काम करने की आवश्यकता होती है।
यहाँ, कुछ महत्वपूर्ण है जिसे मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। कुछ लोग सोच रहे हैं कि मधु मक्खियों ने पहले परिपत्र कोशिकाओं या कोशिकाओं के अन्य आकृतियों का उपयोग किया। विकास और परीक्षण-और-त्रुटि के बाद, उन्हें अंततः सबसे अच्छा समाधान मिला। मैं यहां केवल एक सरल प्रश्न पूछना चाहता हूं: क्या कभी एक मधुकोश जीवाश्म हुआ है जो एक षट्भुज की तुलना में एक अलग आकार का बना है? नहीं! जब तक वे चारों ओर रहे हैं, वे हेक्सागोनल कोशिकाओं का उपयोग करते रहे हैं।
एक त्रिकोण, एक वर्ग, एक पेंटागन, एक षट्भुज, और अन्य ब्लाब्लागन्स ऐसे विकल्प हैं जो कुशलतापूर्वक कोशिकाओं को चुन सकते हैं। इन आकृतियों के लिए, एक दीवार दो का काम कर सकती है। यह सामग्री को बचाने का एक बेहतर तरीका है। यदि मधु मक्खियों को स्मार्ट नहीं किया गया था, तो वे अपनी कोशिकाओं के आकार के रूप में इनमें से किसी एक के साथ जा सकते थे। दैवीय बल का धन्यवाद फिर से, वे सबसे जादुई और आदर्श संरचनात्मक आकार, षट्भुज के साथ गए। आधुनिक विज्ञान ने इसे कई बार साबित किया है। एक षट्भुज के साथ जाकर, वे अपनी कोशिकाओं के निर्माण के लिए कम से कम मोम का उपयोग कर सकते हैं, फिर भी उनके शहद को रखने के लिए सबसे अधिक भंडारण स्थान है। मुझे लगता है कि हमें अब इस दावे को साबित करने की जरूरत है।
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हनी बी की शारीरिक रचना | हनी बी का जीव विज्ञान | द हनीबी
यह दिखाने के लिए एक दिलचस्प प्रयोग है कि हेक्सागोनल मधुकोश सबसे अच्छा क्यों है। एक बेल्ट से घिरे छह कप प्राप्त करें। बेल्ट को धीरे-धीरे खींचे और कप को हल्के से हिलाएं। यदि आप खींचते रहते हैं, तो अंततः आपको छत्ते के छत्ते की तरह छः कप की व्यवस्था होगी, जैसे कि छत्ते में।
अब, आइए देखें कि षट्भुज गणितीय रूप से अन्य आकृतियों से बेहतर क्यों है। यहां हमें इन सवालों के जवाब देने की जरूरत है:
1- सामग्री की न्यूनतम मात्रा का उपयोग करके कैसे बराबर मात्रा के आकार में विभाजित किया जाना चाहिए?
2- आकार क्या होना चाहिए?
ये बहुत ही जटिल उत्तरों के साथ धोखा देने वाले सरल प्रश्न हैं। वे इतिहास के कुछ सबसे पुराने प्रश्न हैं। गणितज्ञ इसे "हनीकॉम्ब अनुमान" कहते हैं। थॉमस सी। हेल्स के इस लेख में इस विषय पर कई पृष्ठ हैं, जिन्हें जटिल गणित के साथ समझाया गया है।
चलो तीन संभव व्यवस्थाओं के साथ शुरू करते हैं। हम त्रिभुजों के साथ एक व्यवस्था लेंगे, फिर हेक्सागोन्स के साथ, और फिर वर्गों के साथ।
मान लें कि हमारे त्रिभुज, वर्ग और षट्कोण सभी में 36 की समान परिधि है।
सबसे पहले, यदि हम त्रिभुज के समान परिधि के साथ एक षट्भुज लेते हैं, तो त्रिभुज के एक तरफ की लंबाई षट्भुज के एक तरफ की लंबाई (3 x 2 = 6) से 2 गुना बड़ी होगी। यहां, हम अपने त्रिकोण में चार छोटे त्रिकोण फिट करने में सक्षम हैं; हालाँकि, यदि हम अपने षट्भुज के साथ ऐसा ही करते हैं, तो हम ध्यान देते हैं कि छह त्रिकोणों को ठीक करने के लिए जगह है। ताकि पता चलता है कि त्रिभुज की तुलना में षट्भुज बेहतर है।
यह देखना थोड़ा मुश्किल है कि वर्ग हेक्सागोन्स से बदतर क्यों हैं। लेकिन चिंता मत करो! यदि आप एक ही परिधि के साथ एक वर्ग बनाते हैं, तो षट्भुज वर्ग की तुलना में एक उच्च क्षेत्र होगा। मान लीजिए कि षट्भुज के एक तरफ की लंबाई 6 सेमी है। परिधि 36 सेमी होगी। षट्भुज का क्षेत्रफल 54 √3 cm² होगा जो 93.530743 है ... दूसरी ओर, यदि हमें 36 सेमी परिधि वाला वर्ग मिलता है, तो वर्ग का क्षेत्रफल 81 cm² होगा। इस प्रकार षट्भुज अधिक कुशल है। यह अन्य सभी आकृतियों के लिए समान है। षट्भुज उन्हें आसानी से हरा सकते हैं।
The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

                    हेक्सागोन्स का स्पष्टीकरण सबसे कुशल आकार क्यों है
आप सोच सकते हैं कि चूंकि एक अष्टकोण राउंडर है और षट्भुज की तुलना में अधिक पक्ष है, यह षट्भुज की तुलना में बेहतर होगा। हालांकि, सर्कल कोशिकाओं की तरह, ऑक्टागॉन, एक साथ फिट नहीं होते हैं, इसलिए वे मधुकोश का समाधान नहीं हो सकते हैं। केवल, एक षट्भुज छह पक्षों से बना होता है जो एक षट्कोणीय मधुकोश बनाने के लिए एक साथ फिट होते हैं। अब हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हेक्सागोन यहाँ उपयोग करने के लिए सबसे अच्छे हैं।
The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics,Convex Regular Polygons

Convex Regular Polygons

दार्शनिकों और गणितज्ञों का मानना ​​है कि मधुमक्खियों को इस गणितीय दृष्टिकोण को पहले से ही पता है जब वे हेक्सागोनल मधुकोश का निर्माण कर रहे हैं। हां, यह संभव है, उसी तरह एक फुटबॉल खिलाड़ी को गेंद को मारने से पहले भौतिकी को समझने की आवश्यकता नहीं होगी या तितली को अपने पंखों के छलावरण के डिजाइन को समझने की जरूरत नहीं होगी। इसलिए, मधुमक्खियों को यह समझने की ज़रूरत नहीं है कि हेक्सागोनल मधुकोश सबसे अच्छा क्यों है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस उल्लेखनीय प्राकृतिक घटना के पीछे एक दैवीय शक्ति है।
बेशक, एक मधुकोश से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। जब मैंने इस विषय पर एक संरचनात्मक इंजीनियर से बात की, तो उसने मुझे अन्य सभी आकारों के बीच षट्भुज के अन्य फायदे दिखाए।उदाहरण के लिए, षट्भुज न केवल सबसे किफायती है, बल्कि सबसे मजबूत भी है। हेक्सागोनल कोशिकाएं पतली मोम की दीवारों की ताकत का अधिकतम उपयोग करती हैं। पैटर्न इतना मजबूत है कि लोड का समर्थन करने के लिए दीवारों में कम सामग्री की आवश्यकता होती है। मधुमक्खियां इसका लाभ उठाती हैं और कोशिकाओं की दीवारों को कागज की शीट से 3,000 गुना पतला बना देती हैं। एक इंजीनियर द्वारा पोलरिस्कोप पैटर्न की समझ के लिए गणित की बहुत आवश्यकता है। वास्तव में, छत्ते की संरचना का गहन अध्ययन करने के लिए गणित में बहुत जटिल है, केवल एक कंप्यूटर उन्हें गणना कर सकता है।
3.मूल गणित(Basic Mathwmatics)-
गणित में मधुमक्खियां महान होने का अगला कारण है क्योंकि वे बुनियादी समस्याओं को समझने और हल करने में सक्षम हैं। हालांकि इन कीड़ों में छोटे मस्तिष्क होते हैं, लेकिन वे जोड़ और घटाव की गणितीय अवधारणाओं को समझ सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने 14 मुक्त-उड़ान मक्खियों और एक वाई-आकार के भूलभुलैया के साथ एक प्रयोग किया। उन्होंने फरवरी 2019 में वैज्ञानिक प्रगति के संस्करण में अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए।
भूलभुलैया के प्रवेश पर, उन्होंने दृश्य उत्तेजनाओं का एक सेट रखा: एक से पांच आकार जो या तो नीले या पीले थे; नीले रंग का सुझाव दिया गया जबकि पीले का मतलब घटाव था। शुरुआती संख्या में आकृतियों को देखने के बाद, वैज्ञानिक ने मधुमक्खियों को "निर्णय के कक्ष" नामक एक छेद के माध्यम से उड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जहां उन्हें एक विकल्प बनाना था। वे या तो भूलभुलैया के बाईं या दाईं ओर उड़ सकते थे। दोनों पक्षों ने सही और गलत उत्तरों का प्रतिनिधित्व किया। प्रवेश द्वार पर नीली आकृतियों को नोटिस करने के बाद, अगर मधुमक्खी ने अधिक आकृतियों के साथ पक्ष को चुना, तो इसे एक सही उत्तर माना गया और थोड़ा गुलजार प्रतिभा को मीठा मीठा पानी का इनाम मिला। यदि इसने उस पक्ष को चुना, जहाँ प्रवेश द्वार पर आकृतियों की संख्या कम थी, तो गलत उत्तर के लिए कड़वे-चटपटे कुनैन को प्राप्त कर उसे दंडित किया गया। यदि शुरुआत में आकृतियों का रंग पीला था तो इसका मतलब था कि उन्हें पुरस्कार पाने के लिए उनमें से कम संख्या में और अगले कक्ष के लिए उड़ान भरनी थी। सही उत्तर ने भूलभुलैया के सिर्फ एक तरफ की यात्रा को सीखने से मधुमक्खियों को रोकने के लिए पूरे प्रयोग में बेतरतीब ढंग से बदलाव किया। सबसे पहले, मधुमक्खी ने यादृच्छिक विकल्प बनाए। लेकिन वे बाद में काम करने में सक्षम थे कि कैसे हल करें और जानें कि नीला का मतलब प्लस 1 और पीला का शून्य 1 था।
फिर, इसे स्पष्ट करने के लिए, वैज्ञानिकों ने एक नया प्रायोगिक क्षेत्र स्थापित किया। उन्होंने हल करने के लिए अंकगणितीय समस्या को बदल दिया और प्रत्येक परीक्षण के लिए यादृच्छिक रूप से सौंपा। उन्होंने उस क्षेत्र के किनारे को बदल दिया जहां सही उत्तर इस संभावना को खत्म करने के लिए थे कि मधुमक्खियां एक तरफ से दूसरे को पसंद कर सकती हैं। उन्होंने इनाम या सजा को भी खत्म कर दिया।
आरएमआईटी अध्ययन के प्रमुख लेखक, स्कारलेट आर। हॉवर्ड ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि लोग इस अध्ययन से दूर होंगे कि कीड़े अनजाने में नहीं हैं। वे चतुर हैं और संज्ञानात्मक रूप से मांग कर सकते हैं। ”इस प्रयोग से साबित होता है कि मधुमक्खियों में कुछ गणितीय क्षमता है। बेशक, यह अत्यंत सरल कार्य है लेकिन यह काफी प्रभावशाली है कि मस्तिष्क के साथ एक कीट जो क्यूबिक मिलीमीटर के बारे में मापता है वह 100 कोशिशों में मूल गणित का पता लगा सकता है। हनीबी के मस्तिष्क में लगभग 1 मिलियन न्यूरॉन्स हैं जो 100 बिलियन न्यूरॉन्स के मानव हार्डवेयर की तुलना में कुछ भी नहीं हैं। लेकिन अगर हमारा दिमाग हमारे दिमाग से लगभग 20 हजार गुना छोटा है तो समीकरण यह संकेत दे सकता है कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) में एक नए दृष्टिकोण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है क्योंकि प्रयोग हमें दिखाता है कि गणित के लिए बड़े मस्तिष्क की आवश्यकता नहीं है और कुछ जटिल गणित केवल सीमित संख्या में अमानवीय कशेरुकी लोगों द्वारा किया जा सकता है। शहद की मक्खियों के छोटे दिमाग की शक्ति में कृत्रिम बुद्धि के भविष्य के विकास के निहितार्थ हैं, जैसे कि तेजी से सीखने में सुधार।

4.एक अमूर्त अवधारणा को समझना(Understanding an Abstract Concept)-

शून्य एक संख्या के अलावा और कुछ नहीं है। यह मनुष्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है। शून्य की एक बहुत ही सरल परिभाषा है लेकिन फिर भी, 6 साल से कम उम्र का बच्चा शून्य के विचार को समझने के लिए संघर्ष करता है क्योंकि यह एक बहुत ही सार और मुश्किल है। जब हम उन्हें गिनने के लिए कहते हैं, तो वे एक से शुरू होते हैं, शून्य से नहीं। यदि उनके पास एक खिलौना है, तो वे कहते हैं कि "मेरे पास एक खिलौना है।" यदि उनके पास कोई खिलौना नहीं है, तो वे यह नहीं कहते हैं कि "मेरे पास शून्य खिलौने हैं।" शून्य उनके लिए एक संख्या भी नहीं है। हालांकि, एक मधुमाई का शाब्दिक अर्थ है कि शून्य क्या है।
यह समझने के लिए कि शून्य एक से कम चुनौतीपूर्ण चीज है क्योंकि यहां तक ​​कि एक बच्चे को बताया जाता है शून्य कुछ का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि एक कुकी की अनुपस्थिति, एक बच्चा अभी भी नहीं मिलता है कि शून्य एक मात्रा का प्रतिनिधित्व करता है। उदाहरण के लिए, चार साल के बच्चों के साथ एक प्रयोग में, शोधकर्ताओं ने बच्चों को सबसे कम डॉट्स वाले कार्ड लेने के लिए कहा, और जब उन्होंने एक खाली कार्ड और एक कार्ड की तुलना एक डॉट से की, तो आधे से भी कम बच्चों को उत्तर सही मिला। । आरएमआईटी विश्वविद्यालय के एक ही वैज्ञानिक हनीबे को सिखाने में सक्षम थे कि शून्य एक से कम मात्रा है। उन्होंने मधुमक्खियों को विभिन्न संख्याओं वाले कार्डों के साथ प्रस्तुत किया। मधुमक्खियों को चीनी पानी से पुरस्कृत किया गया जब उन्होंने सबसे छोटी राशि के साथ कार्ड का चयन किया। मधुमक्खियों को हमेशा कम संख्या का चयन करने के लिए प्रशिक्षित किए जाने के बाद, शोधकर्ताओं ने चुनौती को भुनाया और परीक्षण में खाली कार्ड जोड़े। हैरानी की बात है, हालांकि मधुमक्खियों ने कभी खाली कार्ड नहीं देखा था, उन्होंने खाली कार्ड चुना था। इसने साबित किया कि मधुमक्खियां संख्या रेखा पर एक मात्रा के रूप में शून्य को समझ सकती हैं क्योंकि उन्होंने खाली कार्ड को चुना जब एक बड़ी संख्या की तुलना में पांच या छह की तुलना में जब वे इसे सिर्फ एक से तुलना करते हैं।
मनुष्यों के लिए यह वास्तव में बहुत बड़ी खबर है क्योंकि अगर यह जटिल अमूर्त अवधारणाओं को प्राप्त करने के लिए केवल मधुमक्खी के आकार का मस्तिष्क लेता है, तो शायद एआई को डिजाइन करने के लिए कहीं अधिक कुशल तरीके हैं। हम एक दिन बेहतर, अधिक कुशल कंप्यूटर बना सकते हैं।

5.कॉम्प्लेक्स ट्रैवलिंग सेल्समैन समस्या और वैगल डांस(The Complex Traveling Salesman Problem and Waggle Dance)-

अंत में और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गणित में मधु मक्खियों क्यों महान हैं क्योंकि वे आसानी से जटिल ट्रैवलिंग सेल्समैन समस्या को हल कर सकते हैं जो कंप्यूटर को दिनों तक व्यस्त रख सकते हैं। दूसरे शब्दों में, वे अपनी लागत को कम करने के लिए इष्टतम मार्ग पा सकते हैं। सेल्समैन की समस्या को हल करने के लिए, कंप्यूटर हर संभव मार्ग को देखने, उनकी लंबाई की तुलना करने और सबसे छोटा रास्ता चुनने के बारे में सबसे छोटा रास्ता खोजने के बारे में बताते हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने केवल यह पता लगाया है कि मधुमक्खियों के छत्ते को फूलों के बीच सबसे छोटा रास्ता मिल सकता है और कंप्यूटर के समान निष्कर्ष पर आ सकता है। उन्हें सबसे छोटा रास्ता खोजने के लिए सभी संभावनाओं की गणना करने की आवश्यकता नहीं है। इस तरह की सक्रिय स्मृति और सीखने के बारे में हमने पहले सोचा था कि केवल बड़े दिमाग वाले जानवर ही सक्षम थे लेकिन मधुमक्खी ने हमें गलत साबित कर दिया।
The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

यह कहानी का अंत नहीं है। इस समस्या के बारे में कुछ और दिलचस्प है। मधु मक्खियों के बाद जो भोजन के स्रोत को पाती हैं, वे अपने छत्ते में वापस चली जाती हैं, अलग-अलग मधुमक्खियां समूह के रूप में नहीं, व्यक्तिगत रूप से भोजन स्रोत में जाती हैं। वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि मधु मक्खियों का आपस में बहुत दिलचस्प तरीके से संवाद होता है।
एक मधुमक्खी मधुमक्खी छत्ते में लौटती है और एकत्र छड़ें और अमृत को अपने छत्ते के साथियों के साथ साझा करने से पहले एक आंकड़ा-आठ पैटर्न में उत्साह से घूमती है। मधुमक्खी का नृत्य कॉलोनी के बाकी लोगों को बहुत सारी जानकारी देता है। यदि एक और मधुमक्खी एक ही खाद्य स्रोत से आती है, तो रोटेशन का कोण खिला स्टेशनों और छत्ते के बीच के कोण से ठीक मेल खाता है। दूसरी ओर, यदि एक अलग फीडिंग स्रोत से लौटने वाली मधुमक्खी दूसरे स्थान से आने वाली मधुमक्खियों से अलग नृत्य करती है।
The Mysterious Connection Between Honey Bees And Mathematics

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हनी मधुमक्खियों की आंखें सूर्य से पराबैंगनी और ध्रुवीकृत प्रकाश का पता लगा सकती हैं और वे किसी भी समय सूर्य के सटीक स्थान को निर्धारित करने के लिए अपनी आंखों का उपयोग सबसे अच्छा सौर कम्पास का उपयोग करने के लिए करते हैं। इसके अलावा, मधुमक्खियों के पास एक आंतरिक घड़ी होती है जो मधुमक्खियों को सूर्य की नई स्थिति का अनुमान लगाने में मदद करती है क्योंकि यह पूरे आकाश में यात्रा करती है।
इसलिए मधुमक्खियां नृत्य करते समय अपने सौर कम्पास और आंतरिक घड़ी का उपयोग करके विशेष कोण बनाती हैं। यह साथी श्रमिकों को हमेशा भोजन खोजने के लिए सूर्य से दूर जाने के लिए किस कोण पर जाने देता है।
उनके विशेष नृत्य में एक खाद्य स्रोत की दूरी के बारे में जानकारी शामिल है। नृत्य के इस भाग में बिताए गए लंबे समय का अर्थ है कि भोजन आगे है। शार्ट ड्यूरेशन का मतलब है कि खाना नजदीक है। फिर अगर वह वास्तव में इसके बारे में उत्साहित है जैसे वास्तव में इसके लिए जा रही है तो आप जानते हैं कि यह भोजन का एक अच्छा स्रोत है।
मनुष्य को मधुमक्खियों से बहुत कुछ सीखना है जिन्होंने इस असाधारण उपलब्धि को मस्तिष्क के साथ घास के बीज के आकार में पूरा किया।
तो यही कारण है कि गणितज्ञों को लगता है कि मधुमक्खियां प्रकृति के सबसे महान गणितज्ञों में से एक बनाती हैं। गणित सार्वभौमिक भाषा है और जब आप एक आदर्श मधुकोश को देखते हैं तो आप उस भाषा की छाया देखते हैं। मधुमक्खियों द्वारा गणित को वास्तविक बनाया गया है और मैं निश्चित रूप से मानता हूं कि मधु मक्खियों में सभी तरह का ज्ञान दिव्य बल से आ रहा है। हम कर सकते हैं
सृष्टिकर्ता ने ब्रह्मांड में जिस क्रम का निर्माण किया है, उससे अधिक की खोज। केवल इस प्रकार हम प्रकृति की महान पुस्तक में आगे पढ़ सकते हैं जो हमारे सामने खुली है।
काश मधु मक्खियों मेरे गणित शिक्षक या मेरे दोस्त थे ताकि वे मेरे होमवर्क कर सकें।
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Mathematics Shall Set You Free — From Envy

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1.गणित आप को ईर्ष्या से मुक्त कर देगा का परिचय (Introduction of Mathematics Shall Set You Free — From Envy)-

गणित आपको ईर्ष्या से मुक्त कर देगा गणित विषय निष्पक्ष होता है उसकी कोई इच्छा नहीं होती है। जो इच्छा रहित हो, निष्पक्ष हो उसमें ईर्ष्या ही नहीं बल्कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद इत्यादि विकार भी नहीं रहते हैं। इसलिए हम गणित विषय को हल करते-करते यदि अपनी बुद्धि और विवेक अर्थात् प्रज्ञा का प्रयोग करें तो ईर्ष्या से मुक्त हो सकते हैं।
मनुष्य मन वाला होने के कारण मनुष्य कहलाता है और मनुष्य में प्रज्ञा भी होती है। इसलिए मन के अधीन होकर कार्य करने पर वह विकारों से युक्त हो जाता है और प्रज्ञा का प्रयोग करके अर्थात् प्रज्ञा द्वारा मन पर नियन्त्रण रख करके वह विकारों से मुक्त हो सकता है। गणित को हल करते करते वह गणित से यह सीख सकता है कि जिस प्रकार गणित निष्पक्ष होती है, ईर्ष्या मुक्त और विकारों से मुक्त होती है इसी प्रकार वह भी विकारों से मुक्त हो सकता है। गणित विषय को एक जटिल विषय समझा जाता है और कठिन सवालों, प्रमेयों को हल करता है तो उसे जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ता, ज्यों-ज्यों वह विवेक व प्रज्ञा का प्रयोग करता है त्यों-त्यों विकारों से मुक्त होता जाता है और ये कठिन सवाल सरल होते जाते हैं। सांसारिक कठिनाइयां, समस्याएं व जटिलताएं मनुष्य के सम्मुख आती है और वह उनका सामना करता है तथा उनको हल करता है तब भी वह विकारों से मुक्त होता जाता है।
गणित की समस्याओं को हल करते-करते उसमें विनम्रता आती जाती है और वह ठीक से जब यह समझ लेता है कि ज्ञान अनन्त है और उसकी केवल एक बूँद जितना उसको ज्ञान हुआ है साथ ही उसमें विनम्रता आती जाती है तो वह ईर्ष्या से मुक्त होता जाता है। ईर्ष्या प्रतिस्पर्द्धा से उत्पन्न होती है। जब मनुष्य अपनी तुलना दूसरों के साथ करता है कि दूसरा मनुष्य हमसे आगे निकल गया है और हम आगे नहीं निकल पाते हैं तो हमारे में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न होता है।
इस प्रकार इस आर्टिकल में अपने जीवन की घटना के द्वारा यह बताया गया है कि गणित से जुड़ने पर वह कैसे ईर्ष्या से मुक्त हुआ। आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें और पसंद आए तो शेयर व लाईक कीजिए। आपका कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।

2.गणित आप को ईर्ष्या से मुक्त कर देगा(Mathematics Shall Set You Free — From Envy)-

तलाक, तलाक और मौत को ठीक से कैसे किया जाए
Mathematics Shall Set You Free — From Envy

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मेगन एयर्स और उनके तत्कालीन प्रेमी, नाथन सोखा, को 2009 के पतन में एक दुविधा का सामना करना पड़ा। उन्होंने जमैका के बोस्टन के पड़ोस में बिक्री के लिए एकदम सही कॉन्डो पाया: मैदान: निकटतम मंजिल पर, बस पास से एक मील "ट्रेन स्टेशन, और बोस्टन के एमरल्ड नेकलेस, पार्क और बाइक पथ के सात-मील की श्रृंखला के करीब। संघीय प्रोत्साहन, कम कीमत, और उच्च किराए ने घर-खरीद को एक असामान्य रूप से आकर्षक प्रस्ताव बना दिया था, और जोड़ी कोंडो को स्नैप करने के लिए उत्सुक थी।
लेकिन, जैसा कि युगल के माता-पिता ने धीरे से बताया, अयर्स और सोखा की अभी तक शादी नहीं हुई थी, या सगाई भी नहीं हुई थी। अगर उनके रिश्ते में खटास आ जाती, तो उनके पास ऐसा कोई भी संरक्षण नहीं होता जो शादीशुदा होमबॉयर्स को पसंद हो। "आम तौर पर किरायेदार" के रूप में, उनमें से एक कानूनी रूप से किराए पर ले सकता है या यहां तक ​​कि कॉन्डो के अपने हिस्से को कुल अजनबी को बेच सकता है। ब्रेक-अप की स्थिति में, एयर्स और सोखा ने सोचा कि वे अपने संयुक्त स्वामित्व वाले कॉन्डो पर संघर्ष से कैसे बच सकते हैं?
कई परिवारों को आयर्स और सोखा की क्वैडरी के कुछ संस्करण का सामना करना पड़ रहा है - कैसे प्रतिष्ठित सामानों को विभाजित करना है। कुछ एक संतोषजनक विभाजन प्राप्त करते हैं, और प्रक्रिया में भी मजबूत होते हैं; दूसरों को चीर दिया जाता है। इन उच्च दांवों के बावजूद, परिवार अपनी संपत्ति को विभाजित करने के लिए जिन तरीकों का उपयोग करते हैं, वे बहुत ही तदर्थ होते हैं।
एयर्स और सोखा ने कुछ अलग किया: उन्होंने गणित की ओर रुख किया
शायद किताबों पर सबसे पुरानी निष्पक्ष विभाजन पद्धति - एक जिसका उपयोग समय-समय पर बच्चों द्वारा किया जाता रहा है - दो लोगों के बीच एक केक को विभाजित करने के लिए "आई कट, यू चुनते हैं" विधि है। एक व्यक्ति केक को दो टुकड़ों में काटता है, और दूसरा व्यक्ति यह चुनता है कि कौन सा टुकड़ा लेना है। अब्राहम और लूत ने इस पद्धति का उपयोग उस भूमि को विभाजित करने के लिए किया जिसमें वे बसेंगे: अब्राहम ने भूमि को विभाजित किया, और लूत ने जॉर्डन को चुना, अब्राहम को अब्राहम छोड़ दिया।
"मैं काटता हूं, आप चुनते हैं" में एक बहुत ही आकर्षक संपत्ति है: यह ईर्ष्या-मुक्त है, जिसका अर्थ है कि न तो प्रतिभागी अन्य शेयर के लिए अपने हिस्से का व्यापार करेगा। वह व्यक्ति जो केक काटता है - या भूमि का पथ, या अन्य विभाज्य अच्छा - उसके दृष्टिकोण से दो शेयरों को यथासंभव समान बनाने का एक प्रोत्साहन है, क्योंकि उसे पता नहीं है कि वह किसके साथ समाप्त होगा। यदि वह एक अच्छी कटिंग का काम करती है, तो उसे या तो टुकड़ा देना होगा। दूसरे प्रतिभागी को अपना पसंदीदा टुकड़ा चुनना है, इसलिए न तो व्यक्ति व्यापार करना चाहेगा।
लेकिन जब अच्छा बंटा हुआ है, समरूप नहीं है - जब केक में विभिन्न ठंढों का वर्गीकरण होता है, या भूमि में उपजाऊ घाटियों, खनिज युक्त पहाड़ों, और शुष्क रेगिस्तान का मिश्रण होता है - "मैं काटता हूं, आप चुनते हैं" विधि कम हो जाती है निष्पक्षता और वांछनीयता के अन्य महत्वपूर्ण उपायों पर।
कुछ विभाजन की समस्याओं में, गणितज्ञों ने दिखाया है कि कोई आदर्श विभाजन मौजूद नहीं है।
इन सेटिंग्स में, चयनकर्ता को कटर पर एक अलग लाभ होता है। कटर, सुरक्षित होने के लिए, केक को दो टुकड़ों में विभाजित करना चाहिए, उसके पास, समान मूल्य है। लेकिन चयनकर्ता कटर से बहुत अलग प्राथमिकताएं हो सकती हैं। हो सकता है कि चयनकर्ता के सहूलियत के बिंदु से, किसी एक टुकड़े की कीमत 60 प्रतिशत हो और दूसरे की कीमत 40 प्रतिशत हो, यदि ऐसा है, तो वह खुशी से केक के आधे हिस्से की तुलना में काफी अधिक के साथ चलेगा। गणितीय भाषा में, "I cut, you choose" विधि न्यायसंगत नहीं है।
न केवल विधि समान नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति को वह हिस्सा देने में भी विफल हो सकती है जो उसके लिए सबसे उपयोगी होगा। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि जॉन और जेन एक केक साझा कर रहे हैं जो आधा वेनिला और आधा चॉकलेट है। जॉन को वनीला सबसे अच्छा लगता है, जबकि जेन चॉकलेट पसंद करते हैं। आदर्श विभाजन स्पष्ट रूप से जॉन के लिए वैनिला आधा और जेन चॉकलेट आधा पाने के लिए है। लेकिन अगर जॉन कटर है, तो जब तक वह जेन की वरीयताओं को नहीं जानता, वह आदर्श विभाजन उसके लिए बहुत जोखिम भरा होगा: वह पूरे वेनिला को खो सकता है। इसलिए वह प्रत्येक समान स्वाद के साथ केक को दो समान टुकड़ों में विभाजित करेगा। यह विभाजन "कुशल" नहीं है: ऐसे अन्य विभाजन हैं जो किसी को भी खराब किए बिना कुछ या सभी प्रतिभागियों के शेयरों में सुधार कर सकते हैं।
गणितज्ञों ने साबित किया है कि जब दो लोग एक केक को विभाजित कर रहे हैं, तो हमेशा कुछ विभाजन होता है जो एक साथ ईर्ष्या-मुक्त, न्यायसंगत और कुशल होता है (यह सच है, यह देखने के लिए साइडबार: केक आर फेयर गेम हैं)। लेकिन इस आदर्श विभाजन की पहचान के लिए कोई सरल एल्गोरिथ्म नहीं है। और, कुछ अन्य विभाजन समस्याओं में, गणितज्ञों ने दिखाया है कि कोई आदर्श विभाजन भी मौजूद नहीं है। इसके अनुरूप, गणितज्ञों ने पिछले 20 वर्षों में, विभिन्न प्रकार के विभाजनों के लिए आवश्यक ट्रेड-ऑफ की खोज के लिए एक कठोर रूपरेखा विकसित की, जिससे तलाक, मृत्यु और विभाजन से स्पष्टता लाने में मदद मिली।

3.साइडबार: केक निष्पक्ष खेल हैं(Sidebar: Cakes are fair game)-

जब दो लोग एक केक साझा कर रहे हैं, तो उनकी प्राथमिकताएं जो भी हों, हमेशा कुछ विभाजन होता है जो एक साथ ईर्ष्या-मुक्त, न्यायसंगत और कुशल होता है।यह सच क्यों है इसका मोटा अंदाजा लगाने के लिए, एक सरलीकृत संस्करण पर विचार करें, जिसमें जेन और सैली एक केक को विभाजित कर रहे हैं, जिसका फ्लेवर और फ्रॉस्टिंग केवल ऊर्ध्वाधर धारियों के साथ अलग-अलग होते हैं, और यह मान लेते हैं कि जेन और सैली को केवल एक ऊर्ध्वाधर कटौती को विभाजित करने की अनुमति है केक।
कुछ चाकू की स्थिति है कि जेन 50-50 विभाजन के रूप में देखेंगे, और दूसरी स्थिति जिसे सैली 50-50 विभाजन के रूप में देखेगा। यदि वे दो स्थितियां समान हैं, तो बस वहां केक काटें। अन्यथा, धीरे-धीरे जेन और सैली के चाकू को एक-दूसरे की ओर ले जाने की कल्पना करें, ताकि उसके टुकड़े के लिए प्रत्येक व्यक्ति का मूल्य उसी गति से बढ़े। जिस स्थान पर दोनों चाकू मिलते हैं, वह एक आदर्श विभाजन है: यह ईर्ष्या-रहित है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अपने टुकड़े को दूसरे टुकड़े से बेहतर पसंद करता है, और यह न्यायसंगत है, क्योंकि जेन और सैली के पास उनके टुकड़ों के लिए समान मूल्य है। और यह कुशल है, कम से कम अन्य एकल-कट डिवीजनों की तुलना में, यदि आप चाकू को एक अलग स्थिति में स्लाइड करते हैं, तो खिलाड़ियों में से एक खराब हो जाएगा।
यदि आप एक से अधिक कटौती की अनुमति देने वाले थे, तो यह सरल विभाजन सबसे अधिक कुशल नहीं हो सकता है - उदाहरण के लिए, यदि खिलाड़ियों में से एक को केक के किनारों पर दो धारियां पसंद हैं, तो एक विभाजन जो दो कटौती करता है, वह शायद बेहतर करेगा। काम। व्यापक सेटिंग में जहां एक से अधिक कटौती की अनुमति है, वहाँ अभी भी एक गारंटी ईर्ष्या मुक्त, न्यायसंगत और कुशल समाधान है, लेकिन यह साबित करना कठिन है। द मेथेमेटिकल इंटेलिजेंसर में आगामी पेपर में, स्टीवन ब्रैम, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में राजनीति के प्रोफेसर, और शेंक्टाडी में यूनियन कॉलेज के जूलियस बारबेल, एन। वाई। यह पता लगाने का एक तरीका बताते हैं कि कितने कटौती की आवश्यकता है, खिलाड़ियों की प्राथमिकताएं दी गई हैं।
एक सीधा दृष्टिकोण जो एयर्स और सोखा ने लिया हो सकता है "शॉटगन क्लॉज" कहा जाता है, "मैं कटौती करता हूं, आप चुनते हैं" जो व्यापार अनुबंधों में आम है। यह क्लॉज़ यह निर्धारित करता है कि यदि, उदाहरण के लिए, एक व्यवसाय के दो मालिक भाग लेना चाहते हैं, तो उनमें से एक खरीद मूल्य का प्रस्ताव करेगा, और दूसरा या तो उस मूल्य पर खरीदने या खरीदने का चयन करेगा। जैसे "मैं काटता हूं, आप चुनते हैं," यह विधि ईर्ष्या-मुक्त है, लेकिन समान नहीं है: प्रस्तावक की तुलना में चयनकर्ता बनना बेहतर है। नतीजतन, तर्क देना चाहिए कि किसे प्रस्ताव करना चाहिए और किसे कभी-कभी मुकदमेबाजी का नेतृत्व करना चाहिए, जेम्स रिंग, वकील और सीईओ ऑफ फेयर आउटकम कहते हैं, एक बोस्टन कंपनी जो डिवीजन एल्गोरिदम प्रदान करती है।
इसके बजाय, एयर्स और सोखा ने प्रतिबद्ध किया कि ब्रेक-अप की स्थिति में, वे फेयर बाय-सेल नामक एक अपेक्षाकृत नए एल्गोरिदम का उपयोग करेंगे, यह निर्धारित करने के लिए कि उनमें से कौन दूसरे के हिस्से को खरीदेगा, और किस कीमत पर। फेयर बाय-सेल को 2007 में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में राजनीति के प्रोफेसर रिंग और स्टीवन ब्रैम्स द्वारा तैयार किया गया था, और प्रत्येक साथी को एक साथ खरीद मूल्य का प्रस्ताव करने की आवश्यकता होती है। यदि जॉन $ 110,000 का प्रस्ताव देता है और जेन $ 100,000 का प्रस्ताव करता है, तो जॉन, उच्च बोली लगाने वाला, जेन को 105,000 डॉलर में खरीदेगा। शॉटगन क्लॉज के विपरीत, यह विधि न्यायसंगत है: प्रत्येक प्रतिभागी कुछ के साथ समाप्त होता है - या तो पैसा या व्यवसाय - एक कीमत पर जो उसके प्रस्ताव से बेहतर है। "दोनों प्रतिभागियों को हमेशा एक समाधान मिलता है जो उनके द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव से बेहतर होता है," रिंग कहते हैं। और व्यवसाय हमेशा उस भागीदार के पास जाता है जो इसे अधिक महत्व देता है।
Mathematics Shall Set You Free — From Envy

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यह एल्गोरिथ्म एडजेस्टेड विनर और बैलेंस्ड अल्टरनेशन जैसे नामों के साथ दूसरों की लंबी सूची में शामिल हो गया। उचित विभाजन के लिए नुस्खे के रूप में महत्वपूर्ण है, हालांकि, सही निष्पक्षता असंभव है जब समझ है, या सामाजिक कल्याण की लागत पर आता है (जो आइटम उन लोगों के लिए जा रहे हैं जो उन्हें सबसे अधिक महत्व देते हैं।)। द अमेरिकन मैथमेटिकल मंथली के जनवरी 2013 के अंक में, ब्राम्स - ग्राज़ विश्वविद्यालय के क्रिश्चियन क्लैमलर और मोंटक्लेयर स्टेट यूनिवर्सिटी के माइकल जोन्स के साथ - दिखाया कि जब तीन लोग एक केक को विभाजित कर रहे हैं, तो कभी-कभी ऐसा विभाजन मिलना असंभव है जो है एक साथ ईर्ष्या मुक्त, न्यायसंगत और कुशल। इसी तरह, जब तीन लोगों को अविभाज्य वस्तुओं के संग्रह को विभाजित करना होता है, तो कभी-कभी ईर्ष्या-मुक्त समाधान और एक कुशल समाधान (एक सरल उदाहरण के लिए जिसमें यह होता है, साइडबार देखें: ईर्ष्या बनाम दक्षता) के बीच चयन करना आवश्यक है।
"गणित क्या हासिल करने की सीमा तय करता है," ब्रैम कहते हैं। "फिर सवाल यह है कि अगर आपको सबकुछ नहीं मिल सकता है, तो आप क्या गुण छोड़ना चाहते हैं?"
शायद मैं कहूंगा कि मैं आपको $ 100,000 में खरीदूंगा, लेकिन अगर आप मुझे खरीदना चाहते हैं, तो आपको मुझे $ 200,000 का भुगतान करना होगा। यह मानव का स्वभाव है।
यहां भी, सेवाएं मदद के लिए पॉप अप कर रही हैं। स्प्लिडिट नामक एक नई, मुफ्त ऑनलाइन सेवा उपयोगकर्ताओं को यह तय करने की अनुमति देगी कि वे निष्पक्षता की धारणा को कितना आराम करना चाहते हैं। इसके डिवीजन एल्गोरिदम प्रतिभागियों को एक विशेष निष्पक्षता मानदंड चुनने के लिए कहते हैं - या तो ईर्ष्या-निर्दयता या दो कमजोर मानदंडों में से एक। एल्गोरिथ्म तब चुने गए निष्पक्षता स्तर पर विभाजन की तलाश करता है जो उच्चतम सामाजिक कल्याण पैदा करता है, जो इस मामले में उनकी जीत के लिए सभी प्रतिभागियों के मूल्यों के योग द्वारा मापा जाता है।प्रतिभागियों द्वारा निर्धारित निष्पक्षता जितनी अधिक होती है, सामाजिक कल्याण उतना ही कम होता है, और इसके विपरीत।
स्प्लिडिट एल्गोरिदम के आंतरिक कामकाज उतने पारदर्शी नहीं हैं जितने कि फेयर बाय-सेल एल्गोरिदम। लेकिन एरियल प्रोकैसिया, पिट्सबर्ग में कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के एक कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, जिनकी शोध टीम ने स्प्लिटिड बनाया, फिर भी मानते हैं कि गणित-फ़ोबिक व्यक्ति भी साइट का उपयोग करने में सक्षम होंगे: एल्गोरिथम उत्पन्न करने वाले विभाजनों को खुद के लिए बोलना चाहिए, वे कहते हैं।
"लोगों को एक प्रस्ताव को देखने में सक्षम होना चाहिए और देखना चाहिए कि यह समझ में आता है - कि वे अपने हिस्से को पसंद करते हैं और किसी के साथ स्विच नहीं करना चाहते हैं," वे कहते हैं।

4.साइडबार: ईर्ष्या बनाम दक्षता(Sidebar: Envy vs. efficiency)-

कभी-कभी सामानों के संग्रह के सबसे सामाजिक और उपयोगी सामाजिक विभाजन के बीच चयन करना आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि जॉन, जेन और सैली अपनी दादी के फर्नीचर और प्रभावों को विभाजित कर रहे हैं, और वे वरीयता के क्रम में प्रत्येक आइटम को सूचीबद्ध करते हैं:
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इन वस्तुओं को विभाजित करने का केवल एक ही तरीका है जो किसी भी ईर्ष्या का उत्पादन करने की गारंटी है:
जॉन: सोफा एंड टीवी जेन: लवसैट एंड फोटो एल्बम सैली: एंटीक बुककेस एंड पियानो
इस विभाजन के साथ, प्रत्येक व्यक्ति किसी और की तुलना में बेहतर अपने हिस्से को पसंद करता है।
लेकिन यह विभाजन कुशल नहीं है। जॉन और जेन दोनों खुश होंगे अगर वे टीवी और लवसेट का व्यापार करते हैं, विभाजन का निर्माण करते हैं:
जॉन: सोफा एंड लविएट जेन: टीवी एंड फोटो एल्बम सैली: एंटीक बुककेस एंड पियानो
यह नया प्रभाग कुशल है - कम से कम एक व्यक्ति को खराब किए बिना आगे सुधार करने का कोई तरीका नहीं है। जॉन और जेन का व्यापार काफी हानिरहित लगता है, क्योंकि यह सैली के हिस्से को किसी भी बदतर नहीं बनाता है। लेकिन इससे सैली को ईर्ष्या हो सकती है: सोफा और लवसेट उसकी वरीयता सूची में उच्च हैं, और अगर उसे लगता है कि वे एक महान जोड़ी बनाते हैं, तो वह जॉन की अपनी किताबों और पियानो पर साझा कर सकती है।
ऐसा कोई विभाजन नहीं है जो एक साथ ईर्ष्या-मुक्त और कुशल हो। जॉन, जेन के लिए कौन सा विभाजन सबसे ज्यादा मायने रखता है, और सैली उनके विशेष संबंधों और मूल्यों पर निर्भर करता है।
जबकि निष्पक्ष विभाजन एल्गोरिदम एक लंबा रास्ता तय कर चुके हैं, उनका वास्तविक-विश्व उपयोग जटिल हो सकता है। एक बात के लिए, इंसान समान रूप से सम्मोहक लेकिन निष्पक्षता की विशेष रूप से अनन्य धारणाओं का मनोरंजन कर सकता है। जब भाई-बहन अपने माता-पिता की संपत्ति का बंटवारा कर रहे हों, उदाहरण के लिए, क्या प्रत्येक भाई-बहन को एक समान हिस्सा मिलना चाहिए, या भाई-बहन को अपनी आखिरी बीमारी के जरिए अपने पिता का पालन पोषण करना चाहिए? एक उचित विभाजन एल्गोरिथ्म एक परिवार के लिए यह निर्धारण नहीं कर सकता है।
इरविन के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक पीटर डिट्टो कहते हैं, "यह इस बात पर निर्भर करता है कि एल्गोरिदम कैसे चलता है, यह नैतिक संवेदनाओं के समुच्चय को रोक सकता है"। "यह निष्पक्षता और न्याय के बारे में हमारे सभी अंतर्ज्ञानों को संतुष्ट करने के लिए कठिन है, क्योंकि वे परस्पर संघर्ष करते हैं।" हमारी संतुष्टि आगे जटिल है, डिट्टो कहते हैं, क्योंकि विकास ने हमें अन्याय डिटेक्टरों के रूप में सम्मानित किया है, ताकि "हमें अक्सर लगता है कि हम पर संदेह किया जा रहा है।" यहां तक ​​कि जब हम नहीं होते हैं। ”एक निपटान के लिए भावनात्मक प्रतिक्रियाओं की गहनता में फेंक दें, और यह स्पष्ट हो जाता है कि विभाजन एल्गोरिदम के साथ हमारा संबंध हमेशा एक सरल नहीं होगा।
एक ही समय में, गणितीय एल्गोरिदम की निष्पक्ष प्रकृति लोगों को अपने स्वयं के अवचेतन प्रेरणाओं को छेड़ने में मदद कर सकती है और उनके हाइपरसेंसिटिव अनुचितता रडार को वश में कर सकती है। ऐसा तब हुआ जब फेयर बाय-सेल का इस्तेमाल एक बदसूरत झगड़े को हल करने के लिए किया गया था, जो कि उन भाई-बहनों के बीच सालों से खींचे गए थे, जिन्हें पारिवारिक व्यवसाय साम्राज्य विरासत में मिला था और वह इस बारे में सहमत नहीं होंगे कि कौन किसे खरीदेगा।
"प्रत्येक पक्ष ने दावा किया कि दूसरा पक्ष बहुत कम पेशकश कर रहा था," रिंग कहते हैं। "अगर लोग एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते हैं, तो वे संघर्ष में कैसा व्यवहार करते हैं - शायद मैं कहूंगा कि मैं आपको $ 100,000 में खरीदूंगा, लेकिन अगर आप मुझे खरीदना चाहते हैं, तो आपको मुझे $ 200,000 का भुगतान करना होगा। यह मानव स्वभाव है। ”
जब एक भाई-बहन के वकील ने उसे फेयर बाय-सेल एल्गोरिथ्म का उपयोग करने के लिए चुनौती दी, तो सिस्टम में प्लग करने के लिए एक मूल्य चुनने की प्रक्रिया ने भाई को एक एपिफेनी की ओर अग्रसर किया: वह वास्तव में व्यवसाय नहीं चाहता था। उन्होंने महसूस किया कि उनकी पिछली घुसपैठ, उनके भाई-बहनों के खर्च पर गलत लाभ कमाने की कोशिश थी। फेयर डिवीजन एल्गोरिदम "एक बहुत शक्तिशाली और सकारात्मक चीज" की पेशकश करता है, रिंग कहते हैं। "मैं जो चाहता हूं उसे पाने के लिए, मुझे आपसे झूठ नहीं बोलना चाहिए और आपको बर्बरतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए और दिखावा करना चाहिए कि मैं वर्षों से चीजों की परवाह करता हूं।"
फेयर आउटकम और स्प्लिडिट जैसी डिवीजन सेवाएं एक गणितीय लेंस प्रदान करती हैं, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता अपनी प्रेरणाओं को देख सकते हैं। क्या वे ईर्ष्या-निर्दयता या सामाजिक कल्याण पर जोर देने का विकल्प चुनेंगे? यदि कोई ईर्ष्या-रहित विभाग भी उन्हें अस्वीकार्य लगता है, तो क्या वे प्रतिज्ञा से प्रेरित हैं? मार्क किलगौर के रूप में, वाटरलू, ओंटारियो में विल्फ्रिड लॉयर विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर और अध्यक्ष इसे कहते हैं, निष्पक्ष विभाजन के लिए गणितीय दृष्टिकोण "लंबे समय से लगभग सभी प्रकार के व्यवहार पर प्रकाश डालता है।"
एयर्स और सोखा के रूप में, उन्होंने फेयर बाय-सेल एल्गोरिथ्म को लागू करने का कभी अंत नहीं किया। इसके बजाय, मेगन आयर्स Maegan Socha बन गए, और विवाहित जोड़े ने अंततः अपना कॉन्डो बेच दिया और रोड आइलैंड चले गए, जहां वे जुलाई में अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं। पीछे मुड़कर देखें, तो मेगन अपनी कॉन्डो खरीद और फेयरनेस कॉन्ट्रैक्ट को युवा जोड़े के वयस्कता में छलांग के रूप में देखता है। "उस समय मैंने सोचा था कि वयस्क होने का हिस्सा उन प्रकार के निर्णय लेने के लिए पर्याप्त पुराना था, और मुझे खुशी है कि हमने इसे कैसे संभाला," वह याद करती हैं। “यह जानने के लिए एक-दूसरे में विश्वास और विश्वास का प्रतीक था कि अगर चीजें काम नहीं करती हैं, तो हम एक-दूसरे के साथ अनुचित या आहत नहीं होंगे। हम कुछ भी संरक्षित नहीं करते हैं, भले ही रिश्ता काम नहीं करता हो।]
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