Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes

Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes

1.पाँचवीं के छात्र ने 7 मिनट में दे दिया गणित के 1300 सवालों का जवाब(Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि 5वीं के विद्यार्थी रुद्राक्ष ने रिकॉर्ड 7 मिनट में गणित के 1300 सवालों के जवाब दे दिए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मनुष्य का मस्तिष्क कम्प्यूटर से भी तेज गति से काम कर सकता है। भारतीय दर्शनों में स्पष्ट कहा गया है कि मनुष्य पूर्व जन्मों के संस्कार लेकर आता है, जो कि सुप्त रहते हैं। उनको जाग्रत, एक्टिव करने के लिए हमें पुरुषार्थ करना होता है। यदि हम मन और इन्द्रियों के अधीन होकर कार्य करते हैं तो हमारी अधोगति होना शुरू हो जाती है तथा हमारे पूर्व जन्मों के बुरे संस्कार एक्टिव हो जाते हैं। यदि हम विवेक के द्वारा मन, बुद्धि और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखें और विवेक के अनुसार कार्य करें रुद्राक्ष की तरह हमारा मस्तिष्क सकारात्मक तथा अच्छे उद्देश्यों के लिए कार्य करता है तथा हमारे पूर्व जन्मों के वे संस्कार ही जाग्रत होते हैं जो अच्छे,हितकारी और शुभ हों।
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रुद्राक्ष के पूर्व जन्मों के संस्कार शुभ तथा अच्छे थे जिनको विवेक के द्वारा संचालित करने पर यह अद्भुत चमत्कार कर दिखाया। यदि हम बार-बार अभ्यास करें और विवेक के अनुसार कार्य करें तो हम भी रुद्राक्ष की तरह प्रखर, तेजस्वी बन सकते हैं। भारतीय युवाओं को रुद्राक्ष से सीख लेने की आवश्यकता है।
आज का अधिकांश युवावर्ग इंटनेट पर या तो मनोरंजक या इधर-उधर की बातों को सर्च करने में लगाता है। और फिर उनकी शिकायत रहती है कि उसे गणित विषय कठिन लगता है, गणित विषय समझ में नहीं आता। इस प्रकार ढेरों बहाने बनाता है। परन्तु सच कहा जाए तो अधिकांश युवाओं के पुरुषार्थ को काठमार गया है। तप, साधना और कठिन परिश्रम जैसे शब्द उसे बासी और पुराने लगते हैं। कठोर परिश्रम, तप, साधना और पुरुषार्थ में उनकी आस्था है ही नहीं तो गणित विषय उनको सरल कैसे लगेगा? उन्हें ऐशोआराम, मौजमस्ती, गपशप और इधर-उधर की बातें अच्छी लगती है और उन्हीं में अपना समय व्यतीत करता है। यदि युवावर्ग अपनी सामर्थ्य और क्षमता को पहचानकर सुदृढ़ संकल्प के साथ गणित को हल करना प्रारंभ कर दे तो कोई कारण नहीं है कि उनके लिए गणित विषय सरल नहीं होगा। मनुष्य में अपार क्षमताएं है इस बात को पहले भी तथा अब भी रुद्राक्ष जैसे विद्यार्थियों ने साबित कर दिखाया है। इसके बावजूद युवावर्ग सीख नहीं ले तथा अपनी कमजोरी को गणित विषय, शिक्षक, शिक्षा संस्थानों या अन्य पर डाले तो ऐसी बुद्धि पर तरस आता है। हालांकि यहां इसका तात्पर्य यह नहीं है कि शिक्षक तथा शिक्षा संस्थान दूध के धुले हुए हैं। इसलिए उचित यही है कि अपनी दशा व दिशा को ठीक कर ले और ऐसा करना आपके हाथ में ही है किसी ओर के हाथ में नहीं।
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2.पाँचवीं के छात्र ने 7 मिनट में दे दिया गणित के 1300 सवालों का जवाब(Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes)-

द्वाराहाट (अल्मोड़ा) Updated Wed, 19 Dec 2018
Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes
Fifth Student Answered 1300 Mathematics Questions in 7 Minutes
आपको यह पढ़कर हैरानी ही होगी कि पांचवी के छात्र का दिमाग इतना तेज भी हो सकता है।  यूनिवर्सल कांसेप्ट मेंटल अर्थमेटिक सिस्टम (यूसीएमएएस) की ओर से मलयेशिया के कजांग में आयोजित 23वीं अंतरराष्ट्रीय मेंटल अर्थमेटिक प्रतियोगिता में द्वाराहाट के नौ वर्षीय पांचवीं के छात्र रुद्राक्ष तिवारी ने चैंपियनशिप जीती है।
प्रतियोगिता में 40 से अधिक देशों के ढाई हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता में 200 अंक गणितीय प्रश्न और 1200 से 1500 अंकगणितीय परिचालन पूछे गए थे, जिन्हें आठ मिनट में हल करना था।
रुद्राक्ष ने सभी सवाल रिकॉर्ड सात मिनट 24 सेकेंड में हल कर दिए। यह प्रतियोगिता नौ और 10 दिसंबर को मलयेशिया की यूनिवर्सिटी तेनागा कजांग में हुई थी।
रुद्राक्ष ने अपने वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया है। यूसीएमएएस इंटनरेशनल के संस्थापक और अध्यक्ष प्रो. डिनो वोंग ने मास्टर रुद्राक्ष को चैंपियन ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और अन्य पुरस्कार दिए।


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How to Overcome Mathematics Phobia in Students

How to Overcome Mathematics Phobia in Students

1.विद्यार्थियों में गणित फोबिया को कैसे दूर करें(How to Overcome Mathematics Phobia in Students)- 

How to Overcome Mathematics Phobia in Students
How to Overcome Mathematics Phobia in Students
इस आर्टिकल में बताया गया है कि विद्यार्थियों का गणित के प्रति फोबिया है अर्थात् डर है उसको दूर करने के लिए वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। हम समय-समय पर गणित फोबिया को दूर करने के लिए कई आर्टिकल्स पोस्ट कर चुके हैं यदि आपने वे आर्टिकल्स नहीं पढ़ें है आपको उन आर्टिकल्स को भी पढ़ना चाहिए तथा प्रसंगवश अन्य आर्टिकल्स में भी गणित के डर को समाप्त करने के लिए कुछ न कुछ लिखते रहते हैं। यहाँ उनके अलावा ओर टिप्स बता रहे हैं।

2.गणित को मनोरंजन के तरीके से पढ़ाएं(Teach Math in a Fun Way)-

छोटे बच्चों को संगीत व खेल-खेल के जरिए गणित का अभ्यास कराया जाए। बड़े बच्चों को पहेलियों (पजल) के जरिए गणित में रुचि जाग्रत करें। मनोरंजन, खेलकूद, संगीत, पजल व पहेलियों में सभी को आनन्द आता है इसलिए इनके जरिए पढ़ाने पर गणित में जिज्ञासा जाग्रत होने के साथ-साथ गणित विषय आनन्ददायक भी लगेगा।
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3.विद्यार्थियों की मानसिकता को परिवर्तित करें(Change Students' Mindset)-

विद्यार्थियों के मन में यह मानसिकता घर कर गई है कि गणित विषय बहुत कठिन है। ऐसी मानसिकता इसलिए हो जाती है कि हम सुनी सुनाई बातों पर विश्वास कर लेते हैं। गणित के प्रति एक रोमर चल चुका है और यह डर पैदा कर दिया गया है कि गणित विषय कठिन है। सभी विद्यार्थियों में इतनी परिपक्वता नहीं होती है और वे सुनी सुनाई बातों पर विश्वास कर लेते हैं। जब हमारी मानसिक स्थिति गणित के प्रति नकारात्मक हो जाती है तो गणित विषय को हल करने में हमारी हिम्मत टूट जाती है। कहावत भी है कि हिम्मते मरदा मद्दे खुदा यानि भगवान भी उसी की सहायता करता है जो हिम्मत रखता है। यदि हम मन से हार मान लेते हैं तो गणित को हल करने की हमारी शक्ति आधी ही रह जाती है।
इसलिए विद्यार्थियों को सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए बल्कि गणित में आनेवाली समस्याओं का सामना डटकर करना चाहिए। माता-पिता, अभिभावकों, शिक्षकों तथा प्रबुद्धजनों को विद्यार्थियों की इस मानसिकता को परिवर्तन करने का प्रयास करना चाहिए, उन्हें हौसला बंधाना चाहिए तथा यदि विद्यार्थियों की मदद कर सकते हैं तो हर सम्भव मदद करे।

4.अध्यापकों का कर्त्तव्य(Teacher Duties)-

गणित विषय को परम्परागत तरीके से न पढ़ाकर आधुनिक तरीके से तथा बालकों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए गणित का अध्यापन कराना चाहिए। ज्यादा अच्छा है कि उन्हें सरल से कठिन की पद्धति से पढ़ाएं। इसका अर्थ है कि बालक को पहले सरल टाॅपिक का ज्ञान देना चाहिए, फिर कठिन की ओर अग्रसर होना चाहिए। यहाँ सरल से तात्पर्य यह है कि बालक को, प्रथम वह सीखना चाहिए जो वह सरलता से सीख सके। फिर जैसे-जैसे उन्नति करे, उसे कठिन या जटिल की ओर ले जाना चाहिए। पुन:स्पष्ट है कि यहाँ सरल से तात्पर्य यह है कि जो बालक के दृष्टिकोण से सरल हो न कि शिक्षक या प्रबुद्ध व्यक्ति के दृष्टिकोण से सरल हो। प्रायः जो टाॅपिक शिक्षकों व प्रबुद्ध जनों को सरल लगता है वह बालकों के लिए कठिन होता है। इसलिए अध्यापकों को सरल व कठिन का निर्णय करने में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी टाॅपिक की मोटी-मोटी बातें शीघ्र समझ लेता है परन्तु यदि उसको विस्तार में पढ़ने पर बल दिया जाए तो बालक के लिए जटिल हो जाएगा। हमारे देश का सारा इतिहास छोटी-छोटी कहानियों के रूप में सरल लगेगा परन्तु यदि यही इतिहास राजाओं का शासन प्रबन्ध, युद्धों के वर्णन इत्यादि को विस्तृत रूप में पढ़ाया जाए तो अत्यन्त जटिल हो जाएगा।
सरल से जटिल के सिद्धान्त को ध्यान में रखकर जब शिक्षा दी जाती है तो बालकों की रुचि विषय में बढ़ जाती है। वे एक बात को सीखकर दूसरी को सीखने के लिए तैयार हो जाते हैं। अध्यापकों को चाहिए कि सारे पाठ्यक्रम को इस प्रकार से विभाजित करे कि बालक क्रमानुसार ज्ञान प्राप्त करता जाए। वह सरल से सीखना प्रारम्भ करे और जटिल की ओर बढ़ता जाए।
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5.विशेष कालांश की व्यवस्था(Special Period system)-

जो विद्यार्थी गणित विषय में कमजोर हैं या जिन विद्यार्थियों को गणित जल्दी से समझ में नहीं आता है उन्हें गणित विषय के लिए अतिरिक्त कालांश की व्यवस्था की जाए। क्योंकि सभी विद्यार्थियों के साथ पढ़ने में उन्हें कठिनाई आती है और अपनी कठिनाई को सबके सामने पूछने में झिझक भी होती है। परन्तु जब सभी बच्चे अतिरिक्त कालांश एक ही स्तर के होंगे तो उन्हें झिझक नहीं होगी। उन्हें कोई भी टाॅपिक धीरे-धीरे व आसान तरीके से पढ़ाया जा सकेगा। इन कुछ विद्यार्थियों पर अध्यापक का भी फोकस रहेगा।

6.माता-पिता व अभिभावकों की भूमिका(Role of Parents and Guardians)-

माता-पिता व अभिभावक को अपने बालकों के साथ बैठकर अध्ययन करना चाहिए और उनके सामने आनेवाली कठिनाइयों का निराकरण करना चाहिए। माता-पिता बच्चों के साथ घंटा-दो घंटा उनके साथ अध्ययन करेंगे तो उनको प्रेरणा मिलेगी। गणित में आनेवाली समस्याएं माता-पिता हल कर सकते हैं तो करें अन्यथा ट्यूटर, कोचिंग इत्यादि की व्यवस्था करनी चाहिए। इस प्रकार बच्चों की गणित सम्बन्धी कठिनाइयों का निराकरण होगा तो उनके मन से डर खत्म होने लगेगा।

7.सोशल मीडिया का प्रयोग(Use of Social Media)-

बालकों को इन्टरनेट पर फालतू समय व्यतीत न करके इन प्लेटफॉर्म का प्रयोग अपनी गणित सम्बन्धी कठिनाइयों को दूर करने में लगाना चाहिए। ऐसी बहुत सी वेबसाइट्स व यूट्यूब चैनल हैं जो गणित सम्बन्धी कठिनाइयों को दूर करने में बालकों की मदद करती है। बालकों को अपना समय इन वेबसाइट्स पर अपने विषयों से सम्बन्धित समस्याओं को हल करने में लगाना चाहिए। याद रखें अपने समय को फालतू के कार्यों में नष्ट न करें। यदि आप अपने समय को फालतू के कार्यों में नष्ट न करें। यदि आप अपने समय को फालतू के कार्य में नष्ट करेंगे तो समय आपको नष्ट कर देगा।

8.आपस में वार्ता के द्वारा समाधान(Solution by Negotiation)-

बालकों को अपने मित्रों के साथ गणित सम्बन्धी समस्याओं को हल करने के लिए वार्ता करनी चाहिए। हमारा काफी समय मित्रों के साथ व्यतीत होता है। अतः हमेशा ऐसे मित्र ही बनाएं जो आपकी समस्याओं के समाधान कर सकें तथा उसमें रुचि लें। अर्थात् अपने गुण-कर्म-स्वभाव के अनुसार ही मित्र बनाएं।ऐसे मित्रों से दूर रहें जो हमेशा आपके समय को फालतू के कार्य में, गपशप करने में लगाते हों।
इस प्रकार इन टिप्स का प्रयोग करके गणित का डर खत्म किया जा सकता है।

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9.बच्चों में मैथमैटिक्स का खौफ खत्म करेगा ये तरीका, आप भी अपना सकते हैं(This Method will Eliminate the Fear of Mathematics in Children, You Can also Adopt)-

भिवानी(हरियाणा) Updated Fri, 17 Mar 2017
How to Overcome Mathematics Phobia in Students
How to Overcome Mathematics Phobia in Students
बच्चों में मैथमैटिक्स का खौफ खत्म करने के लिए विशेष कवायद की गई है। इससे बच्चों में जहां गणित का डर खत्म होगा, वहीं अच्छे परिणाम भी देखने को मिलेंगे। हरियाणा की बीजेपी सरकार ने वैदिक मैथ पढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा लिये हैं। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से गठित कमेटी ने पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर सूबे के 120 खंडों के एक-एक स्कूलों में वैदिक मैथ पढ़ाए जाने की सिफारिश की है।
इस शैक्षणिक सत्र से केवल नौंवी कक्षा के बच्चों को वैदिक मैथ पढ़ाया जाएगा। दरअसल, प्रदेश के स्कूलों में वैदिक मैथ पढ़ाने जाने की मांग पिछले साल रिटायर्ड जज व वैदिक मैथ के पहले पीएचडी डा. एसके कपूर ने सीएम मनोहरलाल खट्टर को मेल भेजकर की थी। इसके बाद हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड हरकत में आया और शिक्षा भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रोहतक के गणित प्रवक्ता राकेश भाटिया को रिसोर्स पर्सन के तौर पर अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके बाद सभी जिलों के डीईओ से मशविरा और विशेषज्ञों के साथ मंथन के बाद वैदिक मैथ पढ़ाए जाने की रजामंदी हुई। इसके बाद पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई। सूत्र बताते हैं कि कमेटी ने इसी शैक्षणिक सत्र से पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर मैथ पढ़ाए जाने की संस्तुति दी है। कमेटी ने पहले चरण में प्रदेश के 120 खंडों के एक-एक स्कूल में नौंवी कक्षा के बच्चों को वैदिक मैथ पढ़ाए जाने के लिए राज्य सरकार को लिखा है।
बोर्ड की ओर से नियुक्त रिसोर्स पर्सन गणित प्रवक्ता राकेश भाटिया ने बताया कि वैदिक मैथ इसी सत्र से नौंवी कक्षा के बच्चों को पढ़ाए जाने की तैयारी पूरी हो गई है। केवल सरकार की हां का इंतजार है। कमेटी ने पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है। एससीईआरटी शिक्षकों को तीन दिन ट्रेनिंग देगी।

10.ये हैं कमेटी के एक्सपर्ट(These are the Experts of the Committee)-

वैदिक मैथ पढ़ाने जाने की रुपरेखा तैयार करने वाली कमेटी में वैदिक मैथ के पहले पीएचडी डा. एसके कपूर, विद्या भारती संस्था के प्रमुख देवेंद्र देशमुख, हरियाणा प्रमुख राकेश भाटिया, सह प्रमुख गुलशन छाबड़ा व एससीईआरटी से एचओडी सुनील बजाज शामिल हैं।

11.इसलिए वैदिक मैथ पढ़ाए जाने की सिफारिश(Hence the Recommendation to Teach Vedic Math)-

फिलहाल चल रहे मैथड में गुणा करने का केवल एक तरीका है। जबकि, वैदिक मैथ में गुणा करने के 15 आसान तरीके हैं। शिक्षा बोर्ड के रिसोर्स पर्सन राकेश भाटिया ने बताया कि जिस फार्मूले से मिनट लगती हैं, वैदिक मैथ में सेकेंड्स में काम होता है। कहा जा सकता है कि वैदिक मैथ पढने वाला बच्चा ज्यादा तेजी से सवालों के जवाब दे सकता है। गुणा, भाग, पहाड़े, स्क्वेयर, क्यूब रूट, गुणननखंड आदि को बच्चा मौखिक बता सकता है।
वैदिक मैथ पढ़ाए जाने के प्रस्ताव को शिक्षा बोर्ड ने अनुमोदित कर दिया है। सिलेबस भी तैयार करा लिया है। अब सरकार की अनुमति का इंतजार है।
डा. जगबीर सिंह
- चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड

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Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institution

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1.टॉप इंस्टिट्यूशन्‍स से 1200 से ज्‍यादा इंजिनियर्स को रिक्रूट करेगी सैमसंग इंडिया(Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institutions)-

Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institution
Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institution
यह खबर उन अभ्यर्थियों के लिए है जो गणित से अच्छी डिग्री अर्थात् आईआईटी, एनआईटी जैसी डिग्री हासिल कर चुके हैं और जाॅब की तलाश में हैं। हम बार-बार यही लिखते रहते हैं कि गणित के विद्यार्थियों के लिए जाॅब की कोई कमी नहीं है यदि वे अपने टैंलेट को पहचानकर उसे निखारे। जो विद्यार्थी अध्ययन काल में कड़ी मेहनत और संघर्ष करते हैं तथा जिनका ध्यान अध्ययन पर फोकस रहता है उन विद्यार्थियों के लिए कहीं भी जाॅब की कोई कमी नहीं है। परन्तु जो विद्यार्थी ऐशो आराम की जिंदगी जीते हैं तथा जोड़तोड़ करके डिग्री हासिल करते हैं वे विद्यार्थी अपनी पहुँच का प्रयोग करके डिग्री तथा जाॅब तो हासिल कर लेते हैं लेकिन जाॅब में आनेवाली परेशानियों से सामना होते ही उनके पसीने छूट जाते हैं। ज्यादातर विद्यार्थियों की यही हालत है कि उनकी कर्मठता को लकवा मार गया है इसलिए ऐसे विद्यार्थी मौज-मस्ती को ही अपनी जिन्दगी का ध्येय समझते हैं। ऐसी बात नहीं है कि यह स्थिति आधुनिक युग में ही हो रही हैं पुरातन काल में भी भौतिकता तथा ऐशो आराम के लोग विद्यमान रहे हैं। इसीलिए उस समय की कहावत है कि 'यावत् जीवेत सुखम् जीवेत् ऋण कृत्वा घृतम पीबेत' अर्थात् जब तक जीओ सुख से जीओ चाहे ऋण लेकर घई पीना पड़े अर्थात् ऐशोआराम की जिंदगी जीओ चाहे उसके लिए कर्जा करना पड़े। पश्चिम की भौतिकवाद की चपेट में हमारे देश के युवा भी आ गए हैं इसलिए वे पुरुषार्थ करने के बजाय जोड़तोड़, तिकड़म से डिग्री तथा जाॅब हासिल कर लेते हैं। ऐसे लोग नौकरी तो हासिल कर लेते हैं लेकिन ऐसे लोग न तो कार्य को ठीक तरह से अन्जाम दे पाते हैं और न ही सम्मान पा सकते हैं।
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जो विद्यार्थी कठिन पुरुषार्थ तथा मेहनत से गणित शिक्षा अर्जित करते हैं और टाॅप इंस्टीट्यूट से डिग्री हासिल कर चुके हैं उनके लिए यह सुनहरा मौका है। साथ ही जो विदेश में नौकरी नहीं करना चाहते हैं तथा भारत देश में ही नौकरी करना चाहते हैं तथा अच्छा वेतन भी पाना चाहते हैं उनको इसका फायदा उठाकर आवेदन करना चाहिए। सैमसंग कंपनी बहुराष्ट्रीय कंपनी है और उसका स्टेट्स भी बहुत अच्छा है इसलिए यदि आप इस जाॅब के लिए योग्य हैं तो एप्लाई करने में कोई नुकसान नहीं है। क्या पता यह नौकरी आपके भाग्योदय का कारण बन जाए?

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2.टॉप इंस्टिट्यूशन्‍स से 1200 से ज्‍यादा इंजिनियर्स को रिक्रूट करेगी सैमसंग इंडिया(Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institutions)-

Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institution
Samsung India to Recruit More than 1200 Engineers from Top Institution
सैमसंग अपने बेंगलुरु, नोएडा और दिल्‍ली स्थित रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट में आईआईटी, एनआईटी और बीआईटीएस पिलानी जैसे टॉप इंस्टिट्यूशन्‍स से इंजिनियरिंग ग्रैजुएट्स की भर्ती करेगी।
Updated: 28 Nov 2019
सैमसंग इंडिया करेगा भर्ती
जॉब की तलाश कर रहे लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। टेक कंपनी सैमसंग इंडिया 1200 इंजिनियर्स को रिक्रूट करने जा रही है और डोमेस्टिक व ग्‍लोबल मार्केट्स में इनोवेटिव 'मेक इन इंडिया' प्रॉडक्ट्स को जेनरेट करना चाहती है।
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सैमसंग अपने बेंगलुरु, नोएडा और दिल्‍ली स्थित रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट में आईआईटी, एनआईटी और बीआईटीएस पिलानी जैसे टॉप इंस्टिट्यूशन्‍स से इंजिनियरिंग ग्रैजुएट्स की भर्ती करेगी। ये इंजिनियर्स आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स, रिकग्निशन सिस्‍टम्‍स, डेटा अनैलेसिस, ऑन डिवाइस एआई, मोबाइल कम्‍युनिकेशन्‍स, नेटवर्क्‍स और यूजर इंटरफेस और यूजर एक्‍सपीरियंस के क्षेत्र में काम करेंगे।

3.इन कैंडिडेट्स को जॉब(Job for these Candidates)-

बता दें, कंपनी कंप्‍यूटर साइंस, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स ऐंड कम्‍युनिकेशन्‍स, इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग, मैथमेटिक्‍स ऐंड कंप्‍यूटिंग, इंस्‍ट्रुमेंटेशन ऐंड इन्‍फर्मेशन टेक्‍नॉलजी जैसे अलग-अलग सब्‍जेक्‍ट्स के कैंडिडेट्स को जॉब्‍स देगी।
सैमसंग इंडिया के हेड, ह्यूमन रिसॉर्स (एचआर) संदीप ने कहा, 'दिसंबर 2017 में हमने कहा था कि हम 2020 तक भारत में 2500 इंजिनियर्स को रिक्रूट करेंगे। 2018 में हमने 1000 इंजिनियर्स को हायर किया और इस साल हम 1200 से ज्‍यादा कैंडिडेट्स को हायर करने की प्‍लानिंग कर रहे हैं। 340 प्री-प्‍लेसमेंट ऑफर्स पहले ही आईआईटी और दूसरे शीर्ष संस्‍थानों को दिए जा चुके हैं।'

4.इन जगहोंं से भर्ती(Recruitment from these places.)-

सैमसंग इंडिया इस साल दिल्‍ली, कानपुर, मुंबई, चेन्‍नै, गुवाहाटी, खड़गपुर, बीएचयू, रूड़की, पल्‍लकड़, तिरुपति, इंदौर, गांधीनगर, पटना, भुवनेश्‍वर, मंडी, जोधपुर और भिलाई के आईआईटी से इंजिनियर्स की भर्ती करने जा रही है।
कंपनी के हेड, ह्यूमन रिसॉर्स (एचआर) के मुताबिक, हमारे पास फिलहाल कुल मिलाकर 70 हजार से ज्‍यादा लोग काम कर रहे हैं। अगर हम विशेष तौर पर रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट सेंटर्स के बारे में बात करें तो हमारे पास हमारे तीन केंद्रों में काम करने वाले 9 हजार लोग हैं।


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Simmons Became the World's Successful Investor on the Basis of Maths

Simmons Became the World's Most Successful Investor on the Basis of Mathematics

1.गणित के दम पर बन गए सिमन्स दुनिया के सबसे सफल निवेशक(Simmons Became the World's Most Successful Investor on the Basis of Mathematics)-

Simmons Became the World's Successful Investor on the Basis of Maths
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इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणितज्ञ जिम सिमन्स (अमेरिका) ने निवेश के क्षेत्र में सफलता अर्जित करके एक सफल निवेशक बने। गणित की प्रतिभा का इस्तेमाल उन्होंने निवेश के क्षेत्र में आजमाने का फैसला लिया। शुरुआत में निवेश के क्षेत्र में उनको घाटा हुआ। उनके साथी गणितज्ञों ने सोचा कि गणित के क्षेत्र को छोड़कर, निवेश के क्षेत्र को अपनाना सिमन्स के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। परन्तु सिमन्स ने हार नहीं मानी तथा अपनी कम्पनी रीनेसन्स टेक्नोलाॅजीस में अपनी गणितीय प्रतिभा का इस्तेमाल करके उसे शिखर तक पहुँचाया।असफलता से सीख लेकर उन्होंने कड़ा संघर्ष तथा मेहनत की। शुरुआत में मार्केट के ट्रेंड और करेंसी के उतार-चढ़ाव को देखकर निवेश किया इसलिए उनको घाटा उठाना पड़ा परन्तु धीरे-धीरे उन्होंने ठीक से समझा उसमें अपनी गणित की प्रतिभा का इस्तेमाल करने की ठानी। आप लोगों को सुनकर आश्चर्य होगा कि गणित की उनकी प्रतिभा से कम्पनी की दशा और दशा पलट। आज उनकी गणना सफल निवेशकों में की जाती है। वो भी कोई छोटे-मोटे निवेशकों के साथ नहीं बल्कि वाॅरेन बफे और जार्ज सोरास जैसे दिग्गज इंवेस्टर्स से तुलना की जाती है जो कि दुनिया के जाने-माने इंवेस्टर्स हैं। हम बार-बार ऐसे आर्टिकल लिखते रहते हैं कि गणित से मनुष्य में एक विशेष प्रकार प्रकार की बौद्धिक, तर्क, चिंतन और मनन करने की क्षमता का विकास होता है। इस क्षमता उपयोग हम अपने व्यावहारिक तथा सांसारिक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए कर सकते हैं।
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आज के युग में यदि आपको सफल अर्थशास्त्री, रसायनशास्त्र, वैज्ञानिक, डाॅक्टर, भौतिकशास्त्री इत्यादि बनना है अर्थात  कोई भी पेशा हो तो आपको गणित की जानकारी आवश्यक है। आज हम सर्वाधिक रूप से जिस सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं और सोशल मीडिया इन्टरनेट के जरिए चलता है। परन्तु इन्टरनेट के एल्गोरिथम को समझने के लिए भी गणित के ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसलिए बहुत से इंजीनियर इन्टरनेट का एल्गोरिथम तैयार करते हैं। बड़ी-बड़ी सोशल मीडिया साइट्स इस कार्य के लिए इंजीनियरर्स रखती है। खुद जिम सिमन्स ने यही कहा है कि मेरी सफलता का मुख्य राज यही है कि मैंने गणितीय प्रतिभा का प्रयोग करके सफलता हासिल की है। हम सभी विद्यार्थियों तथा अभिभावकों से अपील करते हैं कि गणित को हल्के में न ले और गणित का इतना ज्ञान तो प्राप्त कर ही ले जिससे आप अपने जाॅब में प्रयुक्त होने वाले गणित के एल्गोरिथम को समझ सके और उसका उपयोग कर सकें। आधुनिक युग में गणित का ज्ञान आवश्यकता बनता जा रहा है।

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2.गणित के दम पर बन गए सिमन्स दुनिया के सबसे सफल निवेशक(Simmons Became the World's Most Successful Investor on the Basis of Mathematics)-

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जिम सिमन्स एमआईटी से ग्रेजुएट,रिटर्न के मामले में इन्होंने वॉरेन बफे को भी पीछे छोड़ दिया.खुद की कंपनी में भी फाइनेंस की जगह गणित वालों को नौकरी देने में तरजीह द इकोनॉमिस्ट के विशेष इनपुट से.
Dec 01, 2019
द इकोनॉमिस्ट के विशेष इनपुट सहित. वर्ष 1978। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जैसी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी से पढ़े गणितज्ञ ने अपना गणित का शानदार कॅरिअर छोड़ दिया। उन्हें अब निवेशक बनना था। 1980 के दशक के शुरुआती समय तक उन्होंने बॉण्ड, करंसी और दूसरे निवेश माध्यमों में क्रूड कंप्यूटर ट्रेडिंग मॉडल और अपनी समझ के हिसाब से निवेश किया। लेकिन बड़ा घाटा हुआ। ग्राहकों ने शिकायत करनी शुरू कर दी। साथी गणितज्ञों को समझ नहीं आ रहा था कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। लेकिन आज ये शख्स दुनिया का सबसे सफल इंवेस्टर है। सफल इतना कि अब इनका नाम वॉरेन बफे और जॉर्ज सोरास जैसे इंवेस्टर के बराबर लिया जाता है। यहां बात हो रही है अमेरिकी निवेशक जिम सिमन्स की। इन्हें अब वॉल स्ट्रीट का सबसे महान निवेशक कहा जा रहा है।
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सिमन्स ने 1982 में 44 वर्ष की उम्र में ‘रीनेसन्स टेक्नोलॉजीस’ नाम की कंपनी की शुरुआत की थी। इसके एक उत्पाद मेडालियन फंड ने 1988 से 2018 तक 100 अरब डॉलर का ट्रेडिंग मुनाफा कमाया है। फीस से पहले इसका औसत सालाना रिटर्न 39 फीसदी (66 फीसदी फीस से पहले) है। जबकि इसी दौरान वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे का रिटर्न 16 फीसदी ही रहा। यानी 1988 में अगर किसी ने सिमन्स के फंड में एक डॉलर लगाया था तो उसे अभी करीब 27 हजार डॉलर मिलते जबकि जबकि बर्कशायर हैथवे में उसे रिटर्न में 107 डॉलर मिलते।
यही कारण हैं कि सिमन्स को आधुनिक जगत का सबसे महान इंवेस्टर माना जाता है। आज सिमन्स की संपत्ति 21 अरब डॉलर है। हाल ही में आई किताब ‘द मैन हू सॉल्व्ड द मार्केट’ में बताया गया है कि कैसे सिमन्स ने निवेश की दुनिया में सफल कॅरिअर बनाया है। इसे किताब के लेखक वॉल स्ट्रीट जर्नल के ग्रिगोरी जकरमैन हैं। जकरमैन ने 1978 में करंसी में निवेश से धंधा शुरू किया था।
शुरू में वे मार्केट के ट्रेंड और करंसी की वैल्यू घटने-बढ़ने के आधार पर अनुमान लगाकर निवेश करते थे। इसमें वे सफल नहीं हुए। बाद में सिमन्स ने अपने दोस्तों की सलाह पर इस बिजनेस में गणित का इस्तेमाल करने की ठानी। उन्होंेने तय किया कि अब वे इमोशन को छोड़कर शुद्ध डेटा पर विश्वास करेंगे। उन्होंने एक कंप्यूटर मॉडल तैयार किया जो बाजार के पैटर्न के हिसाब से निवेश की सलाह देता था। यह एल्गोरिथम के लिए 1700 से डेटा जुटाए गए थे। इससे वे बाजार में छोटे से छोटे उतार-चढ़ाव पर नजर रख पा रहे थे। उनकी कंपनियों में फाइनेंस के बैकग्राउंड के लोगों की बजाय उन लोगों की नियुक्तियां अधिक होती रहीं जो गणित और भौतिकी में पीएचडी हैं। सिमन्स निवेश के बारे में एक मंत्र देते हैं जो कहता है कि- ‘निवेश के मामले में सभी इमोशन हटा दीजिए।’ सिमन्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से गणित में पीएचडी की है। वियतनाम युद्ध के दौरान उन्होंने अमेरिका के लिए कोड ब्रेकर के तौर पर भी काम किया है। सिमन्स कहते हैं कि संसार में बच्चों के लिए गणित पढ़ना सबसे ज्यादा जरूरी है। वे कहते हैं- “आज हर चीज गणित पर आधारित है। हम सर्वाधिक इस्तेमाल मोबाइल फोन का करते हैं। इसका एल्गोरिथम भी गणित की मदद से ही बना हुआ है। अर्थव्यवस्था के लिए भी गणित जरूरी है। आज की तारीख में अच्छा डॉक्टर बनने के लिए भी आपको गणित की जरूरत है, क्योंकि अब चीजों ज्यादा मात्रा आधारित हो गई हैं।’


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Karmaveer Chakra Award for Contribution to IIT Gold Medalist

Karmaveer Chakra Award for Special Contribution to IIT Gold Medalist in Education Sector

1.IIT गोल्‍ड मेडलिस्‍ट को एजुकेशन सेक्‍टर में विशेष योगदान के लिए कर्मवीर चक्र अवॉर्ड का परिचय (Introduction to Karmaveer Chakra Award for Special Contribution to IIT Gold Medalist in Education Sector) - 

श्री राहुल अधिकारी को कर्मवीर चक्र अवाॅर्ड मिला है। यह अवाॅर्ड अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का अवाॅर्ड है जो डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित है। यह अवाॅर्ड उन लोगों को दिया जाता है जो समाज में विशिष्ट परिवर्तन का कार्य करते हैं। श्री अधिकारी बच्चों के चेंज मेकर्स के रूप में जाने जाते हैं। श्री राहुल अधिकारी ने बच्चों में विशिष्ट परिवर्तन करके यह सिद्ध कर दिया है कि मनुष्य में असीम क्षमता है यदि वह इसे पहचान कर उसका उपयोग करे। उन्होंने बच्चों में विशिष्ट परिवर्तन के लिए अतुलनीय योगदान किया है।
यह अवाॅर्ड सिद्ध करता है कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। शर्त यही है कि प्रतिभाओं को पहचानकर उनकी प्रतिभा को निखारने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से श्री अधिकारी ने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कड़ा संघर्ष और मेहनत की है। यह और खुशी की बात है वे IIT कर चुके हैं। अर्थात् एक बार फिर गणित का सिक्का जमा दिया है।
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बच्चों और युवाओं में गणित के प्रति जो डर व घबराहट है, वह श्री अधिकारी को देखकर कम होगी तथा वे श्री अधिकारी को देखकर प्रेरित होंगे अर्थात् श्री अधिकारी उनके लिए प्रेरणा के स्रोत होंगे।
सक्षम स्वयंसेवी संगठनों तथा सरकार को चाहिए कि इस तरह की प्रतिभाओं को शहर से ही नहीं बल्कि गाँवो में भी पहचानकर उनकी प्रतिभा को निखारने में अपना योगदान दें। अगर ऐसा कर सकें तो अन्य प्रतिभाएं जो खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं, वे प्रतिभाएं हमारे समाज और देश का नाम रोशन करेंगी। सक्षम स्वयंसेवी संगठनों तथा सरकार द्वारा गाँवों और शहरो में टेलेंट सर्च या इसी प्रकार की कोई परीक्षा आयोजित करनी चाहिए और प्रतिभाओं की खोज करके उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए। हमारे देश में ऐसी अनेक गणितीय प्रतिभाएं हैं जो अवसर न मिलने के कारण गुमनामी के अँधेरे में भटक रही हैं। यदि उनकी पहचान कर ली जाए तो हमारे देश की दशा व दिशा दोनों पलट सकती हैं। भारत एक नए युग में प्रवेश कर सकता है। लेकिन इसके लिए सच्चे मन व हृदय की आवश्यकता है। श्री वशिष्ठ नारायण सिंह महान गणितज्ञ के साथ जो कुछ हुआ है वैसा ओर किसी के साथ न हो ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए। हमें हार्दिक संतोष है कि श्री राहुल अधिकारी के कर्मवीर चक्र अवाॅर्ड जीतने से गणित के प्रति जो घबराहट व डर है वह बच्चों को दूर करने में मदद करेगा।

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2.IIT गोल्‍ड मेडलिस्‍ट को एजुकेशन सेक्‍टर में विशेष योगदान के लिए कर्मवीर चक्र अवॉर्ड (Karmaveer Chakra Award for Special Contribution to IIT Gold Medalist in Education Sector) - 

Karmaveer Chakra Award for Contribution to IIT Gold Medalist
Karmaveer Chakra Award for Contribution to IIT Gold Medalist 
राहुल को यह सम्‍मान एजुकेशन सेक्‍टर में दिए गए योगदान के लिए उन्‍हें मिला है। इससे पहले यह अवॉर्ड डॉ. वर्गीज कुरियन (फादर ऑफ वाइट रेवलूशन), ऐक्‍टर अनुपम खेर को सोशल वर्क और एजुकेशन चेंज चैंपियन के लिए मार्क पार्किंसन को दिया जा चुका है।
Updated: 28 Nov 2019
इंटरनैशनल चेंजमेकर ओलंपियाड के फाउडंर और आईआईटी गोल्‍ड मेडलिस्‍ट राहुल अधिकारी को प्रतिष्‍ठित कर्मवीर चक्र अवॉर्ड और REX कर्मवीर ग्‍लोबल फेलोशिप से सम्‍मानित किया गया। यह सम्‍मान उत्‍तर प्रदेश के नोएडा में हुए REX कॉन्‍क्‍लेव में 27 नवंबर को हुआ।
इन लोगों को मिल चुका है यह अवॉर्डराहुल को यह सम्‍मान एजुकेशन सेक्‍टर में दिए गए योगदान के लिए उन्‍हें मिला है। इससे पहले यह अवॉर्ड डॉ. वर्गीज कुरियन (फादर ऑफ वाइट रेवलूशन), ऐक्‍टर अनुपम खेर को सोशल वर्क और एजुकेशन चेंज चैंपियन के लिए मार्क पार्किंसन को दिया जा चुका है।
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3.अवॉर्ड के बारे में(About Award)-

कर्मवीर चक्र अवॉर्ड एक नैशनल पीपल्‍स अवॉर्ड है जिसे इंटरनैशनल कन्‍फेडरेशन ऑफ एनजीओ (iCONGO) ने यूनाइटेड नेशन्‍स के साथ मिलकर स्‍थापित किया है। यह दुनियाभर के उन लोगों को दिया जाता है जो समाज में परिवर्तन की लहर शुरू करने का अथक साहस दिखाते हैं। यह अवॉर्ड डॉ एपीजे अब्‍दुल कलाम को समर्पित है जो भारत के 11वें राष्‍ट्रपति थे।
पुरस्‍कार हासिल करना सम्‍मान की बात
बता दें, राहुल को यह पुरस्कार एजुकेशन सेक्‍टर में उनके इनोवेटिव कामों के लिए मिला है जो स्कूलों में बच्चों को चेंजमेकर्स के रूप में विकसित करने में मदद करते हैं। अवॉर्ड मिलने के बाद राहुल ने कहा, 'इस पुरस्‍कार को हासिल करना सम्‍मान की बात है। यह जानकर खुशी होती है कि दूसरे लोग हमारे काम को और स्‍कूलों में जिस तरह का प्रभाव हमने बच्‍चों के लिए बनाया है, उसे पहचान रहे हैं। अभी भी लंबा सफर तय करना है।'


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What are the current problems and what are their solutions through education|what are social problem

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via https://youtu.be/hBCIDb4yga0
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How to Get Good Marks in Mathematics

How to Get Good Marks in Mathematics

1.गणित में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें(How to Get Good Marks in Mathematics) -

How to Get Good Marks in Mathematics
How to Get Good Marks in Mathematics 
विद्यार्थियों को गणित में अच्छे अंक लाने के लिए कुछ टिप्स हैं यदि उन टिप्स पर अमल किया जाए तो गणित में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। गणित विषय ऐसा विषय है जिसमें पूरे में से पूरे अंक भी प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि अच्छे अंक आते हैं तो विद्यार्थी अपने प्राप्तांक के प्रतिशत को बढ़ा सकते हैं। यहाँ विद्यार्थियों के लिए कुछ टिप्स का उल्लेख किया गया है।

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2.पिछली कक्षाओं के सिलेबस की पुनरावृत्ति(Recap of Syllabus of Previous Classes) -

प्रतिवर्ष विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा के बाद ग्रीष्मकालीन छुट्टियाँ आती है। इन छुट्टियों में विद्यार्थी अपनी पिछली कक्षाओं की गणित की पाठ्यपुस्तक को हल कर सकते हैं। जो चेप्टर आपको कठिन लगते हैं, उनको तो आप ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में हल कर सकते हैं। पिछली कक्षाओं की गणित के सूत्रों के लिए एक छोटी नोटबुक तैयार कर लें और उसे यदा-कदा दोहराते रहे। पिछली कक्षाओं के चेप्टर को हल करने करने से आपको कई फायदे हैं। पहला फायदा तो यह है कि गणित विषय जिसे आप कठिन समझते हैं, देखते-देखते ही सरल होता जाएगा। दूसरा फायदा यह है कि आपके समय का सदुपयोग होगा। तीसरा फायदा यह है कि आप बुरी प्रवृत्तियों से बचे रहेंगे क्योंकि कहा गया है कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। चौथा फायदा यह है कि गणित विषय पर आपकी अच्छी पकड़ होने से आप आत्म-निर्भर होते जाएंगे, दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। आपको कई बार ऐसा लगता है कि क्या करें कोई गणित में सहयोग करने वाला है ही नहीं इसलिए गणित कठिन टाॅपिक हल करने में किसकी मदद लें। परन्तु यदि आप पिछली कक्षाओं की exercise हल कर लेंगे तो देखते ही देखते आपके पास महत्त्वपूर्ण टाॅपिक की नोटबुक तैयार हो जाएगी। आप आगे की कक्षाओं में गणित को पढ़ेगें तो आपका बैकग्राउंड कमजोर नहीं रहेगा। बहुत से सवालों में पिछली कक्षा के सूत्र, समीकरण, प्रमेय, सिद्धान्तों का प्रयोग होता है और यदि वे याद होते हैं तो आप सवाल को आसानी से हल कर सकते हैं।
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3.नियमित रूप से गणित का अभ्यास करें(Practice Mathematics Regularly) -

How to Get Good Marks in Mathematics
How to Get Good Marks in Mathematics 
आपको गणित तथा कठिन विषय पर पकड़ बनानी है तथा अच्छे अंक लाने हैं तो नियमित रूप से अभ्यास करें।
अच्छा तो यह होगा कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ नियमित रूप से बैठें और स्वयं भी पढ़ें व बच्चों को भी पढ़ाएं। इससे बच्चों में अध्ययन करने के प्रति रुचि जाग्रत होगी। यदि माता-पिता गणित और कठिन विषय में किसी समस्या को हल करने में मदद करते हैं तो सबसे बढ़िया काम है। इसके कई फायदे हैं पहला फायदा तो यह है कि आपको ट्यूटर नहीं लगाना पड़ेगा।दूसरा फायदा यह है कि आपके पैसे की बचत होगी। तीसरा फायदा यह है कि आप मन से उनकी समस्या का समाधान करेंगे तो क्योंकि ट्यूटर प्रोफेशनल होते हैं वे सीमित शिक्षा ही प्रदान करेंगे परन्तु माता-पिता उनकी हर समस्या का समाधान करने में योगदान देंगे।

4.पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन करें(Study by Syllabus) -

अधिकांश विद्यार्थी गणित विषय से घबराते हैं इसे आसान करने के लिए हम गणित विषय से सम्बन्धित टिप्स बताते रहते हैं। यदि गणित विषय में अच्छे अंक प्राप्त करने हैं तो हम जो टिप्स आपको बता रहे हैं, इन टिप्स का पालन करेंगे तो तो गणित में आप अच्छे अंक अर्जित कर सकते हैं। किसी भी परीक्षा के लिए यह सबसे जरूरी बात है कि यदि आपको सिलेबस नहीं पता तो आप अन्धेरे में तीर मार हैं। सबसे पहली और सबसे जरुरी बात यही है कि गणित के पाठ्यक्रम को देखकर ही तैयारी करें। पाठ्यक्रम से सम्बन्धित टाॅपिक नहीं है उनको तैयार करने में अपना समय बरबाद न करें। जो भी टाॅपिक सिलेबस में है उसकी व्यापक और गहराई से तैयारी करें।

5.गणित को समझकर याद करें(Understand and Remember mathematics) -

गणित रटने का विषय नहीं है बल्कि इसे समझकर बार-बार अभ्यास करें। सूत्रों, सिद्धान्तों, प्रमेयों को समझकर ही याद करें। सूत्रों के लिए अलग से नोटबुक तैयार करें और समय-समय पर उनकी पुनरावृत्ति करते रहें। जो टाॅपिक ज्यादा कठिन है उसे समझकर बार-बार अभ्यास करें।
गणित विषय को बोझ न समझें
गणित विषय को जो विद्यार्थी बोझ समझने लगते हैं वे इसे जैसे तैसे उत्तीर्ण करके पीछा छुड़ाना चाहते हैं परन्तु यदि हम गणित को आनन्द की अनुभूति करते हुए एक खेल की तरह हल करें तो गणित विषय हमारे लिए आसान हो जाता है। हमारी मानसिकता का इसमें बहुत प्रभाव पड़ता है, यदि हम मन से हार मान लेते हैं तो वह विषय हमारे लिए बहुत कठिन हो जाता है कहावत भी है कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। अर्थात् यदि हम गणित को एन्‍जॉय करते हुए तथा प्रफुल्लित मन से हल करें तो मुश्किल लगनेवाले टाॅपिक भी सरल लगने लगेंगे। हमेशा सकारात्मक सोचे और हार न माने। जो मन से हार मान लेता है वह गणित में 50% तो गणित को हल करने से पहले ही असफल हो जाता है।ज्यों-ज्यों हम गणित को हल करते जाते हैं और कठिन सवालों को हल नहीं कर पाते हैं तो हमारी हिम्मत टूटती है। इस प्रकार बाकी 50%में से 25%हिम्मत हल करने पर टूट जाती है। विद्यार्थियों के सम्मुख आनेवाली समस्याओं का हल जब उन्हें दिखाई नहीं देता है और वे समस्याएं अनसुलझी रह जाती है तो हमारी रही सही हिम्मत भी टूट जाती है। विद्यार्थी बिल्कुल निराश हो जाते हैं और गणित विषय को जैसे तैसे हल करके उत्तीर्ण करना चाहते हैं। 
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