CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Mathematics option a hit and Tips for Exam in New Pattern

CBSE 12th Sample Paper 2020: 12वीं मैथ्स का सैंपल पेपर और नया एग्जाम पैटर्न, जानें अहम टिप्स-

इस आर्टिकल में गणित की तैयारी करने  की टिप्स बताई गई है नए  CBSE Pattern के लिए परन्तु यह सभी विषयों के लिए समान रूप से तथा सभी प्रकार की परीक्षाओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। इसके अतिरिक्त CBSE Board में Basic Mathematics भारी संख्या में लेने का सर्वेषण भी दर्शाया गया है तथा Mathematics के नए पैटर्न की जानकारी दी गई है 
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CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

1.गणित का पाठ्यक्रम पूरा करें (Complete Mathematics Syllabus)-

गणित का पाठ्यक्रम पूर्ण करें। यह सोच न रखें कि आगे की कक्षाओं में गणित विषय ऐच्छिक विषय के रूप में तो लेना नहीं है इसलिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को पूर्ण करने की क्या आवश्यकता है? सिलेक्टेड तैयारी न करके पूर्ण, व्यापक और गहराई से अध्ययन करें किसी भी टाॅपिक को न छोड़ें। याद रखें गणित का आगे आपके जाॅब में कहीं न कहीं उपयोग अवश्य होता है। दूसरा कारण यह है कि जब हम सरल-सरल टाॅपिक या विषय को हल करने की मानसिकता बना लेते हैं तो जीवन में आनेवाली कठिनाईयों का ठीक से सामना नहीं कर पाते हैं और कदम-कदम पर ठोकरें खानी पड़ती है और असफलता का सामना करना पड़ता है। हम अध्ययन काल में जैसी प्रवृत्तियों का निर्माण करेंगे, आगे भविष्य में वैसी ही हमारी कार्यप्रणाली होगी। जैसी नींव होगी भवन भी वैसा ही होगा। अगर नींव मजबूत होगी तो भवन भी टिकाऊ और मजबूत होगा।

2.कठिन विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित करें (Focus more on difficult topics -)--

जो-जो विषय कठिन हैं उन पर अधिक फोकस करें और उनके अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय दें। सामान्यतः गणित, विज्ञान, अंग्रेजी विषय विद्यार्थियों को कठिन लगते हैं। इसलिए इन विषयों को अतिरिक्त समय दें। सभी विषयों के साथ बराबर समय देने के अलावा अतिरिक्त समय कठिन विषय को अवश्य दें। इसलिए अपना टाईम टेबिल इस प्रकार बनाए कि कठिन विषयों के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सके। यदि आप कठिन विषय को अतिरिक्त समय नहीं देगें तो हो सकता है कि कुछ टाॅपिक याद करने व हल करने से छूट जाएँ। इसलिए इस प्रकार की स्थिति को भाँपकर सत्रारंभ से ही कठिन विषयों पर अधिक फोकस करें और अतिरिक्त समय दें। अतिरिक्त समय में कठिन विषयों के जो-जो टाॅपिक कठिन हैं उनको समझकर बार-बार अभ्यास करें। बार-बार अभ्यास करने से कठिन टाॅपिक पर आपकी पकड़ मजबू हो जाएगी।

3.हर विषय को समय दें (Give time to every topic or Subject)-

परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक विषय को समय दें। ऐसा न सोचें कि यह सरल विषय है इसलिए परीक्षा के समय देख लेगें। याद रखें परीक्षा के एक दो माह आपको पुनरावृति व माॅडल पेपर्स का अभ्यास करने के लिए ही रखना चाहिए। इसलिए शुरू से ही सभी विषयों को अहमियत दें। चाहे थोड़ा समय दें परन्तु नियमित रूप से कुछ समय सरल विषयों को अवश्य दें।

4.खेल-तमाशे व कामुक प्रवृत्तियों से दूर रहें (Stay away from sports and erotic(Sexual) trends)-

खेल तमाशे व कामुक प्रवृत्तियों से दूर रहें। खेल-तमाशे में अपना समय व्यतीत करेंगे तो पाठ्यक्रम को पूर्ण नहीं कर पाएंगें। आधुनिक शिक्षा पद्धति में पाठ्यक्रम का इतना विस्तार हो चुका है कि पूरे सत्र में पूर्ण करने, पुनरावृत्ति करने, माॅडल पेपर्स को हल करने के लिए समय की आवश्यकता होती है इसलिए समय को बिल्कुल भी नष्ट नहीं करना चाहिए समय की कीमत पहचाने। कामुक प्रवृत्तियों में लिप्त होंगे तो अध्ययन में मन नहीं लगेगा, हमारी एकाग्रता भंग हो जाएगी तथा कामुक प्रवृत्ति में रस लेने से धीरे-धीरे उसको क्रियात्मक रूप से करने का मन करेगा। इसलिए भूलकर भी कामुक प्रवृत्तियों में रस न लें। ब्रह्यचर्य का पूर्णरूप से पालन करें। कामुक प्रवृत्तियों में रस लेने से धीरे-धीरे हम दुराचरण की ओर अग्रसर होने लगते हैं और इससे हमारा भविष्य चौपट हो सकता है। विद्यार्थी काल विद्या अध्ययन करने तथा कौशल सीखने का समय होता है इसलिए बेकार की बातों में समय नष्ट न करें और न ही फालतू लोगों के साथ संगत करें, ऐसे लोगों से दूर रहें।

5.माॅडल पेपर्स का अभ्यास करें(Practice model papers )-

परीक्षा के लगभग दो माह पूर्व पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति व माॅडल पेपर्स का अभ्यास प्रारम्भ कर देना चाहिए। माॅडल पेपर्स का अभ्यास करने से आपको यह ज्ञात हो जाएगा कि किस प्रकार के प्रश्न परीक्षा के प्रश्न-पत्र में आते हैं और उनको हल करने में कितना समय लगता है? यदि प्रश्न को हल करने में निर्धारित समय से अधिक लगता है तो उन कारणों को ढूंढें जिनकी वजह से पेपर को हल करने में निर्धारित समय से अधिक लगता है। कारणों को ढूँढकर उनका समाधान करें। माॅडल पेपर्स को हल करने से आपमें आत्म-विश्वास की वृद्धि होगी और आप परीक्षा में प्रश्न-पत्र को आत्म-विश्वास के साथ हल कर पाएंगें, घबराहट नहीं रहेगी।

6.ध्यान व योग करें(Do meditation and yoga)-

अध्ययन के लिए सबसे अधिक आवश्यकता होती है एकाग्रता की, विशेषकर कठिन विषयों जैसे गणित व विज्ञान विषय को हल करने के लिए एकाग्रता की अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए मन को एकाग्र करने के लिए नियमित रूप से ध्यान व योग करें जिससे मन एकाग्र तो होगा ही साथ ही स्वस्थ भी रहेंगे। और कहा भी गया है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।

7.रटने के बजाए समझकर याद करें (Remember to memorize instead of rote )--

पुस्तकों, गाइड़ों तथा माॅडल पेपर्स को रटने व कंठस्थ करने के बजाए समझने का प्रयास करें। यदि कोई टाॅपिक आपके समझ में नहीं आ रहा है तो उसे अपने माता-पिता, अभिभावक व भाई-बहनों से समझने का प्रयास करें। यदि माता-पिता, अभिभावक पढ़े-लिखे नहीं है और आपके बड़े भाई-बहन भी पढ़े-लिखे नहीं है या गणित व विज्ञान विषय की जानकारी नहीं रखते हैं तो अपने मित्रों व शिक्षकों से समझने का प्रयास करें या कोचिंग ज्वाइन कर लें। किसी भी टाॅपिक व विषय को समझकर याद व कंठस्थ करें। समझकर याद किया हुआ अधिक स्थायी होता है।

8.परीक्षाकाल में पालन करने योग्य बातें (Things to follow during the exam) --

(1.)परीक्षा के समय बहुत से विद्यार्थी तनावग्रस्त हो जाते हैं। कुछ तो प्रश्न-पत्र का भय तथा कुछ अभिभावकों व माता-पिता के दबाव के कारण विद्यार्थी भयभीत हो जाते हैं। इसलिए परीक्षाकाल में कुछ बातों का ध्यान रखें व उनका पालन करें तो भय व तनाव से मुक्त हो सकते हैं।
(2.)शरीर को पूर्ण विश्राम दें तथा पर्याप्त नींद लें क्योंकि शरीर को पूर्ण विश्राम न देने तथा नींद पूरी न लेने से शरीर में थकान, आलस्य महसूस होता है तथा स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में परीक्षा की तैयारी ठीक तरह से नहीं हो पाती है। इसके लिए पूर्ण तनावरहित तथा पूरे वर्ष नियमित तैयारी की आवश्यकता होती है।
(3.)मन को शांत व एकाग्र रखें क्योंकि मन अशांत व एकाग्र नहीं होगा तो जो याद किया हुआ होगा उसको भी भूल जाएंगें और परीक्षा प्रश्न-पत्र को खराब कर बैठेंगे जिसका प्रभाव आगे आनेवाले प्रश्न-पत्रों पर भी पड़ेगा।
(4.)अध्ययन करते समय बीच-बीच में थोड़ा आंखें बंद करके अथवा इधर-उधर टहलकर मस्तिष्क को आराम दें। ऐसा करने से अध्ययन किया हुआ पाठ याद रहेगा।
(5.)थोड़ा समय मनोरंजन के लिए भी दिया जाना चाहिए इससे मन हल्का व तरोताजा हो जाता है और दिमाग पुन:अध्ययन करने के लिए तैयार हो जाता है।
(6.)परीक्षाकाल में अध्ययन पूर्ण पाठ्यक्रम का न करके selected तैयारी करनी चाहिए क्योंकि पूर्ण पाठ्यक्रम का अध्ययन करने के लिए प्रश्न-पत्रों के बीच ज्यादा दिनों का अन्तराल नहीं होने से थोड़े से समय में course पूरा नहीं हो पाता है।
(7.)परीक्षाकाल में स्वयं के द्वारा तैयार किए गए नोट्स का भलीभांति अध्ययन करना चाहिए।
(8.)देर रात तक जागकर पढ़ने के बजाए जल्दी सोकर तथा सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करना चाहिए।
(9.)हमेशा नकारात्मक विचार न रखकर सकारात्मक विचार रखना चाहिए। दिमाग में नकारात्मकता को स्थान नहीं देना चाहिए अर्थात् इस प्रकार नहीं सोचना चाहिए कि क्या पता प्रश्न-पत्र कितना कठिन आएगा। मेरे से प्रश्न-पत्र हल नहीं हो पाएगा। मेरा परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं आएगा। मुझसे पढ़ा हुआ याद नहीं होगा इत्यादि।
(10.)कोहाहल, शोर-शराबे की जगह अध्ययन न करके शांत वातावरण व स्थान पर अध्ययन करना चाहिए, अगर ऐसा सम्भव नहीं है तो रात को जल्दी सोकर तथा सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करना चाहिए। कितना भी शोरगुल वाला वातावरण हो तो भी सुबह का समय सब जगह शांत वातावरण  रहता है।
(11.)परीक्षा कक्ष में निर्धारित समय से आधा-घंटे पूर्व पहुँच जाना चाहिए। अपने प्रवेश-पत्र, पैन, पेन्सिल इत्यादि को घर से रवाना होने से पूर्व अच्छी तरह जाँच कर लेनी चाहिए।
(12.)माता-पिता को भी ध्यान रखना चाहिए कि बालकों पर परीक्षा का अनावश्यक दबाव न डाले बल्कि बालकों को सहज रूप से परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहन दे और आवश्यक सहयोग करें।
(13.)मित्रों तथा सहपाठियों से अनावश्यक वाद-विवाद करने से बचें। अपने समय का सदुपयोग करें क्योंकि परीक्षाकाल में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक-एक क्षण का महत्त्व होता है। समय को व्यर्थ गँवाने से पाठ का अध्ययन छूट सकता है और तनाव का कारण बन सकता है।
(14.)अन्त में परमात्मा पर पूर्ण श्रद्धा व आत्म-विश्वास रखें तथा कुछ समय परमात्मा का ध्यान करें, ऐसा करने से आत्मिक शांति मिलती है, आत्म-विश्वास बढ़ता है और हमारे कार्य में सिद्धि पैदा होती है।

10.New Examination Pattern Of Mathematics

नए एग्‍जाम पैटर्न के हिसाब से पेपर 3 घंटे का होगा। पेपर में 36 सवाल होंगे जो कि चार सेक्‍शन ए, बी, सी, डी में डिवाइड होंगे। सेक्‍शन ए 20 सवालों का होगा और सभी के 1-1 नंबर होंगे।
Updated: 03 Oct 2019
CBSE 12th Maths Sample Paper 2020: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 12वीं की मैथ्‍स के लिए नया एग्‍जाम पैटर्न पेश किया है। इसके मुताबिक, 20 नंबर प्रैक्टिकल या प्रॉजेक्‍ट वर्क होंगे जबकि रिटन एग्‍जाम 100 के बजाए 80 नंबर का होगा। नए एग्‍जाम पैटर्न के हिसाब से पेपर 3 घंटे का होगा। पेपर में 36 सवाल होंगे जो कि चार सेक्‍शन ए, बी, सी, डी में डिवाइड होंगे।
सेक्‍शन ए 20 सवालों का होगा और सभी के 1-1 नंबर होंगे। सेक्‍शन बी 6 सवालों का होगा और सभी के 2 नंबर होंगे। वहीं, सेक्‍शन सी भी 6 सवालों का होगा और सभी के 4 नंबर होंगे जबकि सेक्‍शन डी 4 सवालों का होगा और सभी 6 नंबर होंगे।
मैथ्‍स एग्‍जाम के लिए जरूरी टिप्‍स:
मैथ्‍स की बेसिक जानेंमैथ्‍स की बेसिक को समझना बेहद जरूरी है। अगर आपका बेसिक सही है तो आप किसी भी तरह के सवाल को हल कर लेंगे। ऐसे में इस बात का विशेष ध्‍यान रखें।
सिलेबस पूरा करें
कम से कम एग्‍जाम से दो महीने पहले पूरे सिलेबस को कम्‍प्‍लीट करने पर फोकस करें ताकि आपको रिवीजन और मॉक टेस्‍ट का पर्याप्‍त समय मिले। सिलेबस पूरा सबसे अहम फैक्‍टर है क्‍योंकि कई बार ऐसा होता है कि ऐसे सवाल एग्‍जाम में आ जाते हैं, जिनकी आप उम्‍मीद नहीं करते हैं।
हर दिन कम से कम आधे घंटे मैथ्‍स पर दें
हर दिन कम से कम आधे घंटे मैथ्‍स प्रैक्टिस करें। हर सब्‍जेक्‍ट को पूरा समय देने की जरूरत होती है, ऐसे में अगर आप हर सब्‍जेक्‍ट पर आधे घंटे देते हैं तो आप आराम से हर विषय के पूरे सिलेबस को कम्‍प्‍लीट कर सकेंगे।
जिन टॉपिक्‍स में हों कमजोर, उसमें करें ज्‍यादा प्रयास
उन टॉपिक्‍स या कॉन्‍सेप्‍ट्स पर फोकस करना बेहद जरूरी है जिसमें आप खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं। उन टॉपिक्‍स को पढ़ें जो आपके हिसाब से कम इंट्रेस्टिंग हैं और फिर उसे फॉलो करें जिसमें आपकी रुचि है।
मॉक टेस्‍ट सॉल्‍व करें
एग्‍जाम से पहले मैथ्‍स के ज्‍यादा से ज्‍यादा सैंपल पेपर्स को हल करने की कोशिश करें। इससे आपको बोर्ड एग्‍जाम के दौरान टाइम को मैनेज करने में मुश्‍किल नहीं होगी।
सवालों को ध्‍यानपूर्वक पढ़ें
एग्‍जाम के वक्‍त सवाल को समझना बहुत जरूरी है। कई बार सवालों के जवाब सवालों में ही छिपे होते हैं। यही नहीं, कोशिश करें कि आसान सवालों को पहले ही हल कर लें। इससे आपका मोराल बूस्‍ट होगा और आपको कठिन सवालों के लिए ज्‍यादा समय मिल जाएगा।
सीबीएसई 10 वीं बोर्ड परीक्षा 2020: बेसिक गणित एक हिट, स्कूलों में बड़े पैमाने पर नामांकन के रुझान को साझा करता है
शिक्षा
Updated Oct 08, 2019
CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

11.सीबीएसई 10 वीं बोर्ड परीक्षा 2020: बेसिक मैथ्स में बड़े नामांकन(CBSE 10th Board Exam 2020: Major Enrollment in Basic Maths)-

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2020 एलओसी दायर किए गए हैं। स्कूलों ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बेसिक मैथ्स के नए शुरू किए गए विकल्प के लिए बड़ी संख्या में छात्रों को चुनने की सूचना दी है। (रिपोर्ट good)।सीबीएसई 10 वीं बोर्ड परीक्षा 2020: बेसिक मैथ्स में बड़े नामांकन
CBSE 10 वीं बोर्ड परीक्षा 2020: बुनियादी गणित में बड़े नामांकन .
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, इस वर्ष से CBSE ने CBSE 10 वीं बोर्ड परीक्षा 2020 के लिए बुनियादी गणित का विकल्प पेश किया है। बोर्ड द्वारा वर्षों से प्राप्त फीडबैक को ध्यान में रखते हुए, बोर्ड ने इस वर्ष एक सरल पेपर चुनने का विकल्प प्रदान किया था उन सभी के लिए गणित जो उच्च माध्यमिक कक्षाओं में विषय जारी नहीं रखना चाहते हैं। स्कूलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, बेसिक गणित का विषय या विकल्प एक बड़े पैमाने पर हिट है।
हालांकि बेसिक गणित के विकल्प के लिए नामांकित छात्रों की सही संख्या ज्ञात नहीं है, कई स्कूलों ने बताया है कि 10 वीं कक्षा के 50% छात्रों ने विकल्प के साथ जाना चुना है। टाइम्स नाउ से बात करते हुए, दिल्ली एनसीआर के एक प्रतिष्ठित स्कूल के एक वरिष्ठ शिक्षक ने गणित से बाहर होने वाले छात्रों के बढ़ते रुझान को इंगित किया।
“बेसिक मैथ्स पसंदीदा विषय थे। यहां तक ​​कि जिन छात्रों को विषय में सच्ची चिंता नहीं थी, उन्होंने बुनियादी गणित के साथ जाना चुना क्योंकि वे निश्चित हैं कि वे 11 वीं और 12 वीं कक्षा में गणित जारी नहीं रखना चाहते हैं। बुनियादी गणित चुनने से यह सुनिश्चित होगा कि उनके पास बोर्ड परीक्षाओं में एक उच्च कुल होगा ! "
एक अन्य शिक्षक ने एक समान प्रवृत्ति का दावा किया। छात्रों और अभिभावकों दोनों ने विषय के मानक गणित संस्करण के बजाय बुनियादी गणित के साथ जाने का अनुरोध किया है। “यह एक दिलकश प्रवृत्ति नहीं है। कई माता-पिता ने बेसिक गणित के लिए कहा है क्योंकि वे मानक गणित की कोशिश करने में सक्षम होंगे जो बच्चा जुलाई कम्पार्टमेंट परीक्षा में चाहता है! ”
विशेषज्ञ परिणाम पर विभाजित हैं। शिक्षकों का एक वर्ग मानता है कि बुनियादी गणित विकल्प गलत मिसाल कायम कर रहा है, जबकि दूसरे का मानना ​​है कि यह देश में बेहतर परीक्षा मानकों की दिशा में एक कदम है। संबंधित: सीबीएसई कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2020: विशेषज्ञ बुनियादी और मानक गणित के लिए नमूना पत्रों का विश्लेषण करते हैं - अंतर साझा करते हैं
“मैं छात्रों को पसंद की शक्ति प्रदान करने के विचार के खिलाफ नहीं हूं। हालाँकि, मुझे इस विषय से बाहर निकलने वाले छात्रों की बढ़ी हुई संख्या की चिंता है। एक शिक्षक के रूप में, मैं देख रहा हूँ कि छात्र कोशिश नहीं कर रहे हैं ... यह चिंताजनक है! "एक वरिष्ठ शिक्षक ने कहा।
CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

CBSE 10th Board Exam 2020: Basic Math option a hit and Tips for Exam

एक अन्य ने स्कूलों पर बेसिक गणित की ओर छात्रों को धकेलने का आरोप लगाया। “जबकि छात्रों या अभिभावकों के साथ बेसिक या स्टैण्डर्ड को चुनने का विकल्प कोई भी प्रयास नहीं है। बेसिक गणित बोर्ड परीक्षाओं में उनके समग्र परिणाम में सुधार करने के लिए उनके लिए एक भगवान की तरह लगता है! ”
इसके विपरीत, कई विशेषज्ञों ने परीक्षा मानकों में सुधार की दिशा में एक कदम के रूप में कदम उठाया है। “बुनियादी गणित का विकल्प देश के समग्र परीक्षा मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में एक निश्चित कदम है। इतने लंबे समय से भारत छात्रों की क्षमता को मापने के लिए एक ही यार्डस्टिक का उपयोग कर रहा है। यह पहली बार है जब बोर्ड ने इस तथ्य का संज्ञान लिया है कि सभी बच्चे समान नहीं हैं। बेसिक मैथ्स छात्रों को दूसरों से मेल खाने की कोशिश करने के असीम तनाव से मुक्ति दिलाता है! ”
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2020 फरवरी से शुरू होगी। इस वर्ष से, CBSE ने छात्रों के लिए एक बुनियादी गणित विकल्प लागू किया है। विषय का पाठ्यक्रम समान रहता है। हालाँकि, बेसिक गणित मानक गणित के प्रश्न पत्र से काफी सरल होगा.

12.सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने इस बार कक्षा दसवीं के लिए मैथ्स को इस सेशन से दो लेवल-बेसिक और स्टैंडर्ड में डिवाइड किया है। 

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने इस बार कक्षा दसवीं के लिए मैथ्स को इस सेशन से दो लेवल-बेसिक और स्टैंडर्ड में डिवाइड किया हैबोर्ड ने यह भी कहा है कि स्टैंडर्ड गणित पेपर नहीं देने पर विद्यार्थी कक्षा 11वीं में गणित का चयन नहीं कर सकेंगे। इसकी खासियत हाेगी कि जिन छात्रों को इंटर-मीडिएट में गणित की पढ़ाई करनी है, वह इस सत्र से 10वीं में बेसिक गणित पढ़ेंगे। इससे इंटरमीडिएट में फिजिक्स, केिमस्ट्री व गणित नहीं ले पाएंगे। इस सत्र से 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ लेने वाले छात्र ही इंटरमीडिएट में मैथ्स लेकर अागे पढ़ाई कर पाएंगे। एेसा इसलिए किया गया है, क्याेंकि गणित में छात्र अधिक संख्या में फेल हाे रहे थे।  30 सितंबर तक परीक्षा के फॉर्म भरे जाएंगे। इसके बाद ही स्थिति साफ हाे पाएगी। सीबीएसई ने साफ किया कि मैथमेटिक्स का सिलेबस चेंज नहीं हाेगा। सिलेबस एक ही हाेगा, लेकिन दाेनाें के पेपर का डिफिकल्टी लेवल चेंज हाेगा। बेसिक मैथ्स पेपर अासान हाेगा, स्टैंडर्ड मैथ्स पेपर का डिफिकल्टी लेवल हाई हाेगा अाैर कॉन्सेप्ट बेस्ड हाेगा। इसलिए बाेर्ड ने सलाह दी है कि मैथ्स में वीक स्टूडेंट्स बेसिक का ही चयन करें।

13.फोकस के लिए छात्रों की काउंसलिंग भी की गई

सीबीएसई के अनुसार विद्यार्थियाें की काउंसलिंग भी की गई है कि वह स्टैंडर्ड मैथ पर फाेकस रहें, क्याेंकि कंपीटिशन फाइट करने में मैथ्स अहम भूमिका निभाती है। बैंकिंग सेक्टर हाे या फिर एमबीए, इनमें जनरल मैथ्स के सवाल हाेते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार भविष्य के लिए विद्यार्थियाें काे स्टैंडर्ड मैथ पर फाेकस रहना चाहिए। वहीं, दूसरा पहलू यह भी है कि 1 से 8वीं क्लास तक छात्रों काे फेल नहीं किया जा रहा। इसलिए मैथ्स काे दाे हिस्सों में बांट दिया।
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Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

1.अधिकांश इजरायली छात्रों को आकर्षित करने वाली इंजीनियरिंग; कानून,व्यापार में गिरावट का परिचय ( Introduction to Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline)-

 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

इस आर्टिकल में इजराइल देश की उन्नति का कारण बताया गया है। इजराइल देश में अन्य विषयों की तुलना में इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर विज्ञान और गणित विषय लेने में लोकप्रियता में बढ़ोतरी देखी गई है तथा कानून व व्यापार जैसे विषयों में गिरावट देखी गई है। द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व इजराइल का विश्वपटल पर कोई अस्तित्व नहीं था। इजराइल में यहूदी रहते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व यहूदी जर्मनी में रहते थे परन्तु हिटलर(हिटलर स्वयं नाजी था)द्वारा यहूदियों का दमन और नरसंहार करने के कारण यहूदी विश्व में चारों ओर बिखर गए उनमें आटोहान वैज्ञानिक थे वे अमेरिका चले गए।को हिरोशिमा के बारे में पहली बार 6 अगस्त 1945 को फार्म हॉल में ब्रिटिश अधिकारी द्वारा सूचित किया गया था। खबर ने उन्हें पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि विखंडन की उनकी खोज ने परमाणु बम का निर्माण संभव कर दिया है, और इस तरह वे जापान में हजारों मौतों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार थे। बहुत पहले, उन्होंने आत्महत्या पर विचार किया था, जब उन्होंने पहली बार विखंडन के संभावित सैन्य उपयोग को मान्यता दी थी; अब, अपने अहसास के दोष को अपने कंधों पर तिरछे खींचते हुए, आत्महत्या फिर से अपने उजाड़ से बचने का एक तरीका लग रहा था। इस डर से, मैक्स वॉन ल्यु उनके साथ तब तक रहे, जब तक कि उन्होंने इस व्यक्तिगत संकट को पार नहीं कर लिया। इस तरह के प्रभाव से किसी वैज्ञानिक की सामाजिक जिम्मेदारी कभी प्रभावित नहीं हुई।
 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline,Scientist Otto Hahn

Scientist Otto Hahn, Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

उनके कैदियों के अनुसार, "काफी शराबी उत्तेजक की मदद से उन्हें शांत किया गया"।  उनके नाभिकीय विखंडन के आधार पर परमाणु बम का आविष्कार किया और वे परमाणु बम जापान के हिरोशिमा व नागासाकी पर गिराए गए और दोनों शहर पूरी से बर्बाद हो गए अर्थात् नष्ट हो गए तब जाकर द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। 
 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline,Henry S.Trumane

President Henry Truman Of U.S., Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

तब अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने आॅटोहान से ईनाम देने की इच्छा से उनसे प्रश्न किया कि वे क्या चाहते हैं अर्थात् उनको क्या ईनाम दिया जाए? आॅटोहान ने कहा कि विश्व पटल पर यहूदियों के लिए कोई देश नहीं है इसलिए उनके रहने के लिए कोई जगह उपलब्ध करा दी जाए। तब यूरोप जहाँ इजराइल बसा हुआ है यहाँ बिल्कुल रेगिस्तान था, यह जगह यहूदियों को दी गई। यहूदियों ने यहाँ आकर अपनी मेहनत, कठोर परिश्रम, बौद्धिक कौशल से रेगिस्तान को समृद्ध और विकसित किया। आज इजराइल का नाम विकसित देशों में शामिल किया जाता है।
इजराइल में इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर विज्ञान और गणित विषय में लोकप्रियता बढ़ने का सीधा सम्बन्ध आधुनिकता व विकास से है। आज किसी भी देश को विकसित और उन्नत करना है तो इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर विज्ञान और गणित में अव्वल रहना ही होगा। इंजीनियरिंग का सम्बन्ध भी सीधे-सीधे गणित विषय से जुड़ा हुआ है। इंजीनियरिंग का कोर्स वही विद्यार्थी कर सकता है जिसने गणित विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में लिया है या गणित विषय में उत्कृष्ट योग्यता रखता है। कम्प्यूटर विज्ञान के लिए भी मध्यम स्तर का गणितीय ज्ञान आवश्यक है। इस प्रकार देखा जाए तो आधुनिक विश्व में आगे बढ़ने के लिए गणित कितना आवश्यक है यह भली प्रकार समझा जा सकता है? यदि किसी देश में गणित, कम्प्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग, विज्ञान, तकनीकी जैसे विषयों में रुझान बढ़ रहा है तो निश्चित रूप से उसे आधुनिक, विकसित, उन्नत व समृद्ध होने से कोई नहीं रोक सकता है। वरना जो देश इन विषयों में पिछड़ा हुआ है तो समझा जाना चाहिए कि वह देश दूसरे देशों पर निर्भर है अर्थात् आत्मनिर्भर नहीं है। यूरोप में कुछ इस्लामिक देश ऐसे हैं जहाँ तेल के कुएँ है जिनके कारण उनके पास अकूत दौलत, धन प्राप्त होता है परन्तु आर्थिक रूप से सम्पन्न होने का यह तात्पर्य नहीं है कि वह विश्व पटल पर कोई बहुत बड़ा योगदान कर सकता है अथवा उसे विकसित या उन्नत कहा जा सकता है। जब तक गणित, इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर व तकनीक के लिए कोई भी देश दूसरे देशों पर आश्रित है तब तक न तो वह देश विकसित कहा जा सकता है और न ही अपनी प्रतिभा की छाप अन्य देशों पर छोड़ सकता है।
हमारे देश में भी विज्ञान, तकनीकी, गणित व विज्ञान जैसे विषयों में बढ़ोतरी अर्थात् रुझान में वृद्धि 90 के दशक के बाद उदारीकरण से वृद्धि हुई है जिसके शुभ व अच्छे परिणाम हमें उपलब्ध हो रहे हैं। लेकिन अभी देश विकासशील की श्रेणी में ही आता है इसलिए विकसित देशों की श्रेणी में आने के लिए हमें इन विषयों व क्षेत्रों में ओर अधिक ध्यान देने तथा निवेश करने की आवश्यकता है। हमारे देश की प्रतिभा का पलायन हो रहा है उसको रोकना होगा और उनका उपयोग हमारे देश के विकास में करना होगा। इसके लिए सरकारों तथा सार्वजानिक स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे बढ़कर आर्थिक तथा अन्य सहयोग प्रदान करना होगा। प्रतिभा पलायन सामान्यतः आर्थिक कारणों से होता है दूसरा कारण है उनकी प्रतिभा का उपयोग करने के लिए संसाधन देश में उपलब्ध हैं। इसलिए इन संस्थाओं को इन दोनों कारणों का समाधान करना होगा। तभी सच्चे अर्थों में हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा और उन्नत व समृद्ध हो सकेगा।
यदि यह आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों और लोगों के पास पहुंचे और इससे  लाभ ले। यदि आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.अधिकांश इजरायली छात्रों को आकर्षित करने वाली इंजीनियरिंग; कानून,व्यापार  में गिरावट ( Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline)-

 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

 Engineering attracting most Israeli students; law, business in decline

इंजीनियरिंग लगातार दूसरे वर्ष इजरायल के छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय स्नातक पाठ्यक्रम बना हुआ है, काउंसिल फॉर हायर एजुकेशन (CHE) द्वारा प्रकाशित नए आंकड़ों से 2019/20 शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत से पहले पता चला है।
2018/19 शैक्षणिक वर्ष के दौरान कुल 35,041 इजरायली स्नातक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लगातार दूसरे वर्ष में सामाजिक अध्ययन (34,324) से अधिक छात्रों को आकर्षित किया। सामाजिक अध्ययन पाठ्यक्रम हाल के दशकों में अध्ययन का सबसे लोकप्रिय क्षेत्र रहा है।
पिछले एक दशक के दौरान, CHE ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कंप्यूटर विज्ञान सीखने वाले छात्रों में 80% की वृद्धि देखी है। पिछले साल, 16,780 इजरायलियों ने कंप्यूटर विज्ञान का अध्ययन किया - गणित और आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए कई ऑप्टींग द्वारा बढ़ाया गया - 2009/10 शैक्षणिक वर्ष के दौरान सिर्फ 9,122 की तुलना में।
कुल मिलाकर, लगभग 190,000 इजरायली छात्रों में से एक-में से चार ने 2018/19 शैक्षणिक वर्ष के दौरान इंजीनियरिंग या कंप्यूटर विज्ञान और गणित का अध्ययन किया।
"नए डेटा से पता चलता है कि हम अपने लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं, संस्थानों के लिए प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए धन्यवाद, हम इजरायल में शैक्षणिक कार्यक्रमों में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम हैं - कई छात्र हाई-टेक अध्ययन की चुनौती का चयन कर रहे हैं," प्रो। । यफ्फा ज़िल्बरशट्स, चेम की योजना और बजट समिति के अध्यक्ष।
“शैक्षणिक प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जो इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रभाव डालता है। संस्थानों के सहयोग से, हम इस प्रवृत्ति को जारी रखने, इज़राइल में उद्यमशीलता और नवाचार को बढ़ावा देने और उद्योग के साथ शिक्षा को एकीकृत करने के लिए दृढ़ हैं। "
जबकि इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान लोकप्रियता में बढ़ गए हैं, कानून और व्यवसाय प्रबंधन सहित स्नातक पाठ्यक्रमों में पिछले एक दशक में छात्र संख्या में 20-25% की गिरावट देखी गई है।
मानविकी का अध्ययन करने वाले छात्रों में इसी तरह की कमी - 2012/13 में 14,248 छात्रों से घटकर 2018/19 में 10,698 हो गई - ने अध्ययन के अन्य क्षेत्रों के साथ मानव-संबंधित पाठ्यक्रमों के एकीकरण को प्रोत्साहित करने वाले अग्रिम कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है।
"पिछले एक दशक में कानून और व्यवसाय प्रबंधन में गिरावट के साथ इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है," चेप के उपाध्यक्ष प्रो। उन्होंने कहा, 'ये चीजें बाजार की ताकतों के कारण, राष्ट्रीय कार्यक्रम को बढ़ावा देने के साथ-साथ हाई-टेक प्रोफेशनल्स को मजबूत करने के लिए हैं। हम जल्द ही मानविकी उन्नति कार्यक्रम पूरा करेंगे और मानविकी को अध्ययन के अन्य क्षेत्रों में एकीकृत करने और उन्हें कई छात्रों के लिए सुलभ बनाने के लिए भी काम करेंगे। ”
पिछले महीने सफल उद्यमियों के उत्पादन के लिए 50 विश्व-अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में चार इजरायली विश्वविद्यालयों का नाम लिया गया था। संस्थानों को उन उद्यमियों के अनुसार रैंक दिया गया जो बाद में अपने स्टार्ट-अप्स के लिए वेंचर फंडिंग को सुरक्षित करते हैं।
तेल अवीव विश्वविद्यालय में स्नातक कार्यक्रमों को वार्षिक अध्ययन द्वारा सफल उद्यमियों के निर्माण के लिए दुनिया भर में आठवें स्थान पर रखा गया, जो सभी गैर-अमेरिकी विश्वविद्यालयों में सबसे अधिक है।
हाइफा की तकनीक-इज़राइल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (14 वीं), हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलेम (34 वीं) और बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव (49 वीं) सभी को स्नातक कार्यक्रमों के लिए शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया था।
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Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

1.ग्लोबल साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स टॉयज मार्केट 2019-2023का परिचय (Introduction to Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023)- | 

अगले पांच वर्षों में 5% सीएजीआर प्रोजेक्शन |


Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

आज का युग वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक युग है। इसलिए आज जो चीज आपको नई लग रही है, कल को वह पुरानी लगने लग जाएगी इतनी तेज गति से अनुसंधान व खोजें हो रही है। अब धर्म से ज्यादा धन  को महत्त्व दिया जाने लगा है जबकि धन का महत्त्व धर्म से ही हो सकता है है और होता आया है। धर्मपूर्वक अर्जित किया हुआ धन फलदायी और हितकारी होता है। अधर्मपूर्वक कमाया हुआ धन अशुभ व अहितकर होता है। आज भले ही हमें वह सुखदायक लगता हो परन्तु अन्त बहुत बुरा होता है, परमात्मा के घर देर हैं अन्धेर नहीं।
वर्तमान युग में STEM अर्थात् S-SCIENCE, T-TECHNOLOGY, E-ENGINEERING, M-MATHEMATICS का चारों ओर विकास व नए-नए अनुसंधान हो रहे हैं। अब गणित शिक्षा को परम्परागत तरीके से न पढ़ाकर नए व आधुनिक तरीके पढ़ाने के तरीके प्रयोग किए जा रहे हैं तथा खोजे जा रहे हैं जिससे विद्यार्थियों को गणित विषय रुचिकर लगे और उसमें पढ़ने में जिज्ञासा बढ़े। इसलिए शिक्षण संस्थानों ने गणित को खेल-खिलोनों के जरिए प्रारम्भिक कक्षाओं से पढ़ाना प्रारम्भ कर दिया है। ये खिलौने शिक्षकों व विद्यार्थियों को महत्त्वपूर्ण अवधारणाओं जैसे सोच, रचनात्मकता, और तर्क को खेल के आधार पर सीखने और व्यावहारिक उदाहरणों से जोड़ने में सक्षम बनाते हैं। वैसे भी विद्यार्थियों में बाल्यावस्था में खेल व खिलौनों से स्वाभाविक रूप से बहुत प्यार होता है। विद्यार्थीयों की इस रुचि को दृष्टिगत रखते हुए खिलौनों के माध्यम से गणित को सीखना मनोरंजक व नई सोच का परिणाम है। खेल व खिलौनों को गणित शिक्षा से जोड़कर गणित को अधिक रुचिकर और सरल बनाया जा सकता है। जो विद्यार्थी गणित से भय खाकर दूर भागते हैं तथा गणित को पढ़ने में रुचि नहीं लेते हैं उनके लिए यह प्रयोग आनन्ददायक व रुचिकर होगा।
इस आर्टिकल में इसके बारे में बताया गया है कि विद्यार्थियों को खिलौनों के माध्यम से गणित व STEM में भागीदारी बढ़ी है जो कि गणित जैसे विषय के लिए शुभ संकेत है। आज के युग में गणित का हर विषय और क्षेत्र में महत्त्व समझ में आ रहा है। इसलिए बालकों द्वारा गणित विषय में अरुचि दिखाना तथा न पढ़ना उनके भविष्य के लिए हानिकारक और अहितकर साबित होता है। जीवन क्षेत्र में जब युवावर्ग उतरते हैं और उन्हें गणित ज्ञान की आवश्यकता महसूस होती है तब वे सोचते हैं कि काश वे गणित का प्रारम्भिक ज्ञान अर्जित कर लेते तो जीवन की समस्याओं से अधिक कुशलतापूर्वक सामना कर लेते लेकिन समय निकल जाने के पश्चात पछताने से क्या लाभ? गणित शिक्षा के इसी महत्त्व को समझते हुए शिक्षाविदों ने खेल-खिलौनों का माध्यम चुना है जिसके सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। शिक्षकों तथा अभिभावकों को इस विधा का प्रयोग करके विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि व लगाव पैदा करने का प्रयास करना चाहिए ताकि जो विद्यार्थी ग्यारहवीं कक्षा में गणित विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में न भी लेना चाहे तो कम से कम गणित का इतना व्यावहारिक ज्ञान तो हासिल कर ही ले जिससे जीवन में गणित सम्बन्धी कठिनाईयों को आसानी से हल कर ले और उनकी प्रगति व उन्नति में गणित शिक्षा के कारण कोई बाधा उपस्थित न हो सके। हमें इस तरह के प्रगतिशील और नवीन अनुसंधानों को खुले दिल से स्वागत करना चाहिए और विद्यार्थियों को गणित में पारंगत और रोचक बनाने में उपयोग करना चाहिए।
नीचे खिलौनों के द्वारा STEM में बढ़ती हुई भागीदारी का सर्वेक्षण दिखाया गया है जो कि उत्साहजनक तथा खिलौनों के द्वारा अध्ययन को रोचक बनाने में प्रगति व वृद्धि को दर्शाता है, आप इसका अवलोकन करें।
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2.ग्लोबल साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स टॉयज मार्केट 2019-2023(Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023)-

Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

Global Science, Technology, Engineering and Mathematics Toys Market 2019-2023

Technavio ने अपनी नवीनतम बाजार अनुसंधान रिपोर्ट की घोषणा की जिसका शीर्षक वैश्विक STEM खिलौने बाजार 2019-2023 है। (ग्राफिक: बिजनेस वायर)
Technavio ने अपनी नवीनतम बाजार अनुसंधान रिपोर्ट की घोषणा की जिसका शीर्षक वैश्विक STEM खिलौने बाजार 2019-2023 है। (ग्राफिक: बिजनेस वायर)
Technavio ने अपनी नवीनतम बाजार अनुसंधान रिपोर्ट की घोषणा की जिसका शीर्षक वैश्विक STEM खिलौने बाजार 2019-2023 है। (ग्राफिक: बिजनेस वायर)
लंदन - (बिजनेस तार) - टेक्नावियो की नवीनतम बाजार अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के खिलौने बाजार में 2019-2023 की अवधि के दौरान 5% के करीब सीएजीआर पोस्ट करने की उम्मीद है। नि: शुल्क नमूना रिपोर्ट का अनुरोध करें
नवीनतम #marketresearch रिपोर्ट @Technavio के अनुसार, वैश्विक # मॉर्टमॉयस मार्केट को 2019-2023 के दौरान 5% के करीब सीएजीआर पोस्ट करने की उम्मीद है
पारंपरिक परीक्षा-आधारित शिक्षा से संदर्भ-उन्मुख दृष्टिकोण तक शिक्षण संस्थानों में सीखने की दृष्टिकोण एसटीईएम खिलौने बाजार के विकास में योगदान दे रहा है। ये खिलौने शिक्षकों और छात्रों को महत्वपूर्ण अवधारणाओं जैसे कि महत्वपूर्ण सोच, सांख्यिकी, रचनात्मकता और तर्क को खेल-आधारित सीखने और व्यावहारिक उदाहरणों से जोड़ने में सक्षम बनाते हैं। कक्षाओं में एसटीईएम खिलौने को अपनाने से छात्रों को उद्योग-विशिष्ट और नौकरी-उन्मुख सीखने के साथ अपनी शिक्षा और सीखने की गतिविधियों को सिंक्रनाइज़ करने में मदद मिलती है, जो एसटीईएम विषयों में छात्र की भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
बाजार अनुसंधान के भविष्य को प्रभावित करने वाले वैश्विक रुझानों के बारे में अधिक जानने के लिए, नि: शुल्क नमूने डाउनलोड करें: https://www.technavio.com/talk-to-us?report=IRTNTR31545
Technavio के अनुसार, STEM खिलौनों में AI के बढ़ते उपयोग से बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और पूर्वानुमान अवधि में इसकी वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान होगा। इस शोध रिपोर्ट में अन्य महत्वपूर्ण रुझानों और बाजार ड्राइवरों का भी विश्लेषण किया गया है जो 2019-2023 से अधिक बाजार विकास को प्रभावित करेगा।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के खिलौने बाजार: STEM खिलौने में AI के बढ़ते अनुप्रयोग
अल-संचालित एसटीईएम खिलौने विशेष रूप से कामकाजी माता-पिता के बीच लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं, क्योंकि ये खिलौने बच्चों के लिए सीखने के साथी के रूप में काम करते हैं और कोर एसटीईएम विषयों और कोडिंग में कई पाठों के लिए अनुकूलित किए जा सकते हैं। वेंडर स्मार्ट एसटीईएम खिलौने डिजाइन कर रहे हैं जो क्लाउड-आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के आगमन के कारण बच्चों के साथ बुद्धिमान बातचीत कर सकते हैं।
शिक्षण सहायक के रूप में एसटीईएम खिलौनों की बढ़ती गोद लेने, ऑनलाइन बिक्री में मजबूत वृद्धि, और कोडिंग रोबोट खिलौने की बढ़ती लोकप्रियता कुछ अन्य प्रमुख कारक हैं जो पूर्वानुमान अवधि के दौरान बढ़ते एसटीईएम खिलौने बाजार के आकार में योगदान करने की उम्मीद है," Technavio में वरिष्ठ विश्लेषक।
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विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, और गणित खिलौने बाजार: विभाजन विश्लेषण
यह बाजार अनुसंधान रिपोर्ट वितरण चैनल (ऑफ़लाइन चैनल और ऑनलाइन चैनल और भौगोलिक क्षेत्र (APAC, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, MEA और दक्षिण अमेरिका) द्वारा वैश्विक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के खिलौने बाजार को विभाजित करता है।
एपीएसी क्षेत्र ने 2018 में बाजार का नेतृत्व किया, इसके बाद क्रमशः उत्तरी अमेरिका, यूरोप, विदेश मंत्रालय और दक्षिण अमेरिका। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन, सिंगापुर, और हांगकांग सहित उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सरकारें प्रारंभिक स्तर से एसटीईएम शिक्षा पर जोर दे रही हैं ताकि एक अच्छी तरह से गोल शिक्षा प्रणाली सुनिश्चित की जा सके।
Technavio की नमूना रिपोर्ट नि: शुल्क हैं और इसमें रिपोर्ट के कई खंड शामिल हैं, जैसे कि बाज़ार का आकार और पूर्वानुमान, ड्राइवर, चुनौतियाँ, रुझान और बहुत कुछ।
Technavio एक अग्रणी वैश्विक प्रौद्योगिकी अनुसंधान और सलाहकार कंपनी है। उनका शोध और विश्लेषण उभरते बाजार के रुझान पर केंद्रित है और व्यवसायों को बाजार के अवसरों की पहचान करने और उनके बाजार की स्थिति को अनुकूलित करने के लिए प्रभावी रणनीति विकसित करने में मदद करने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
500 से अधिक विशेष विश्लेषकों के साथ, Technavio की रिपोर्ट लाइब्रेरी में 10,000 से अधिक रिपोर्ट और गिनती शामिल है, जिसमें 800 तकनीकों को शामिल किया गया है, जिसमें 50 देश शामिल हैं। उनके ग्राहक आधार में 100 से अधिक फॉर्च्यून 500 कंपनियों सहित सभी आकारों के उद्यम शामिल हैं।
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Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

1.स्टेम' की 81 फीसदी महिलाओं की राय, प्रदर्शन आकलन में होता है भेदभाव(81% of STEM women oppose performance discrimination)-

Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

STEM में कार्यरत महिलाओं पर सर्वेक्षण किया गया जिसमें यह तथ्य सामने आया कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है।
दरअसल महिलाएँ अपने पारिवारिक दायित्व तथा नौकरी में संतुलन कायम नहीं कर पाती हैं। इसलिए बहुत सी महिलाएं नौकरी को छोड़कर घर गृहस्थी को सम्हालती है यदि घर गृहस्थी को नहीं सम्हालती है तो गृहक्लेश होता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं के प्रति अविश्वास की धारणा बन जाती है। कम्पनी के प्रबंधक इस बात को भलीभांति जानते हैं कि बच्चों तथा परिवार की ज्योंही जिम्मेदारी महिलाओं पर आती हैं तो महिलाएं नौकरी छोड़कर परिवार के दायित्वों को सम्हालती है।
कंपनी के मालिक इसी वजह से महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। वे पुरुषों के बजाए महिलाओं को कम वेतन देते हैं (समान पद के लिए). इसके अतिरिक्त पदोन्नति में भी भेदभाव किया जाता है। नियुक्ति में भेदभाव किया जाता है। कंपनी में नियुक्ति के समय महिलाओं के बजाए पुरुषों को वरियता दी जाती है।
इस समस्या का समाधान तो हमारी नजर में यही आता है कि महिलाएं नौकरी करने से पूर्व भलीभांति विचार कर ले और आगापीछा,भला-बुरा पर विचार करके ही नौकरी करने का विचार करें। नौकरी से पूर्व यह तय करले कि पारिवारिक दायित्वों तथा नौकरी में संतुलन किस प्रकार कायम कर सकती हैं। क्या घर के अन्य सदस्य पारिवारिक दायित्वों को सम्हालने में उसकी मदद कर सकते हैं? परिवार के बड़े बुजुर्गों और पति से आपसी परामर्श व रजामंद होने पर ही नौकरी करें। केवल अपनी महत्वाकांक्षा को पूरी करने के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए। यदि परिवार के सदस्य नौकरी कराने के लिए तैयार न हो तो आजकल आनलाईन ऐसे ढेरों विकल् है जिनको घर पर रहकर कर सकती है। इस प्रकार पारिवारिक दायित्वों के साथ अपनी प्रतिभा का उपयोग कर सकती हैं।
2.स्टेम' की 81 फीसदी महिलाओं की राय, प्रदर्शन आकलन में होता है भेदभाव(81% of STEM women oppose performance discrimination)-
Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

Eighty One Percentage of STEM Women Oppose Performance Discrimination

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में नौकरी कर रही महिलाओं में 81 प्रतिशत का मानना है कि प्रदर्शन आकलन में पुरुषों की तुलना में उनके साथ भेदभाव किया जाता है। एक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। इसमें कहा गया है कि इन महिलाओं के करियर के मध्य में ही नौकरी छोड़ने की संभावना है।
स्टेम में कार्यरत महिलाओं पर केली ग्लोबल वर्कफोर्स इनसाइट सर्वेक्षण में कहा गया है कि महिलाएं अपने जीवन के महत्वपूर्ण चरण में बच्चों के पालन-पोषण के वर्षों और बाद में मध्यम प्रबंधन स्तर पर नौकरी छोड़ देती हैं। इसमें कहा गया है कि महिलाओं को दोहरा बोझ झेलना पड़ता है। वे कामकाज और परिवार के बीच संतुलन बैठाने के लिए संघर्ष करती हैं। ऐसी संस्कृति में पुरुष और महिलाओं दोनों का मानना है कि परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं की होती है।
स्टेम में नामांकित पूर्व स्नातक छात्र-छात्राओं का प्रतिशत 46 है, लेकिन आगे चलकर बड़ी संख्या में महिलाएं इसे करियर नहीं बनातीं।
केली सर्विसेज एवं केली ओसीजी इंडिया के प्रबंध निदेशक कमल कारत ने कहा, 'प्रौद्योगिकी कंपनियों की 41 प्रतिशत महिलाएं 10 साल के अनुभव के बाद नौकरी छोड़ देती हैं। वहीं पुरुषों के लिए यह 17 प्रतिशत है।' सर्वेक्षण में कहा गया है कि इसकी वजह से शीर्ष पद भरने के लिए महिलाओं की संख्या काफी कम रह जाती है।
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Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

1.लड़कियों को कम आंकने से गणित में लैंगिक अंतर बढ़ता है का परिचय (Introduction to Gender differences in mathematics increase by underestimating girls)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित सीखने के लिए शिक्षकों द्वारा लड़को को प्राथमिकता देने व लड़कियों को कमतर आंकने से लड़कियां पिछड़ जाती हैं। इसलिए सबके साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए। बौद्धिक रूप से यह विचार सुलझा हुआ तथा अच्छा लगता है परन्तु व्यावहारिक रूप से इस पर विचार करें तो यह कार्य बहुत कठिन है। क्या समानता लाने के लिए मोटे व्यक्ति को समान करने के लिए उसको छीला जा सकता है? व्यावहारिक रूप में यह कार्य कठिन है। संसार में हर चीज के दो पहलू होते जैसे शुभ-अशुभ, न्याय-अन्याय, हानि-लाभ, ऊँच-नीच, जय-पराजय इत्यादि। अर्थात् एक के बिना दूसरा असंभव है।जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं चित्त और पट। उसी प्रकार संसार में जो चीजे हैं उसके दो पहलू होते हैं। यहाँ कहने का यह तात्पर्य नहीं है कि समानता लाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। वस्तुतः जब तक हम किसी भी बात के पक्ष-विपक्ष की पूरी जाँच-पड़ताल नहीं कर लेते हैं तब तक उस पर चलना या कदम बढ़ाना हमारे लिए समस्या पैदा कर सकता है। समानता का अधिकार भी उसी तरह है। समानता लाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए परन्तु इसमें शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करना नामुमकिन है। 
Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

2.लड़कियों को कम आंकने से गणित में लैंगिक अंतर बढ़ता है(Gender differences in mathematics increase by underestimating girls)-

महिलाओं के हर क्षेत्र में पिछड़ने का मूल कारण है स्त्री शिक्षा का अभाव। जो नारी शिक्षा ग्रहण करने में रूचि नहीं लेती हैं या जिनके अभिभावक नारी शिक्षा पर ध्यान नहीं देते है वे नारियाँ पिछड़ी हुई रह जाती हैं। इस प्रकार की नारियाँ या मनुष्य जैसे -तैसे अपने जीवन को बोझ की तरह ढोकर जैसे आए थे वैसे ही मृत्यु के मुख में चली जाती हैं।
प्राचीन भारत में नारी व पुरुष को समान रूप से शिक्षा दी जाती थी इसलिए पुरुषों के समान कई महिलाएं विख्यात हुई और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उस काल में गार्गी, मैत्रेयी, घोषा, लोपामुद्रा, विश्वारा, अपाला आदि विदुषी नारियों ने नारी जाति का गौरव बढ़ाया है. महाकवि कालिदास की पत्नी विद्योत्तमा विदुषी महिला थी उसने अनेक विद्वानों को शास्त्रार्थ में हराया था. शिवाजी, महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों को आगे बढ़ाने के पीछे नारी का ही योगदान था. धीरे-धीरे समाज पुरुष प्रधान होता गया और नारी को दोयम दर्जा देकर उनको घर में कैद कर दिया गया। 
इस आर्टिकल में बताया गया है कि शिक्षकों के द्वारा बालकों को अधिक प्राथमिकता देने के कारण लड़कियां गणित शिक्षा में पिछड़ती गई। वस्तुतः लड़कियों के साथ यह भेदभाव शिक्षकों के द्वारा ही नहीं किया जाता है बल्कि हम सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं। माता-पिता भी लड़कियों के साथ भेदभाव करते हैं उनकी मानसिकता  यह है कि लड़कियों की शादी करनी है इसलिए उनको सामान्य शिक्षा प्रदान करवा दी जाए जिससे उनके लिए अच्छा रिश्ता मिल जाए और घर को ठीक से सम्हाल सके यानि वे शिक्षा को मात्र शादी का सर्टिफिकेट मानते हैं इसलिए उनको शिक्षा या उच्च शिक्षा के बजाए कला शिक्षा को चुनने हेतु कहा जाता है। 
समाज में भी लड़कियों के साथ भेदभाव किया जाता है जो लड़के गणित में अव्वल आते हैं उनको सम्मानित किया जाता है और पदक दिए जाते हैं। 
इस प्रकार के वातावरण में जब लड़कियां अपने साथ भेदभाव होता देखती है तो इसे नियति समझकर समझौता कर लेती है, इस प्रकार लड़कियाँ स्वयं भी इसके लिए जिम्मेदार है। गणित शिक्षा में लड़कियों को बढ़ावा न देने के कारण वे पिछड़ती जाती है और उनकी सुप्त प्रतिभा को पल्लवित और जाग्रत होने से पहले ही कुचल दिया जाता है। 
हालांकि ज्यों-ज्यों शिक्षा का ग्राफ समाज में बढ़ता जा रहा है तो लोगों की मानसिकता में परिवर्तन होता जा रहा है। आज हर क्षेत्र में भी नारी अपना दबदबा कायम कर रही है और पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रही है। इसलिए ध्यान रखा जाना चाहिए कि लड़कियों की प्रतिभा को कुचलने से उनमें हीन भावना घर कर जाती है और वे सोचती है कि गणित शिक्षा प्राप्त करना उनके वश में नहीं है और वे गणित शिक्षा प्राप्त करने की हकदार नहीं है। इसलिए गणित में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए उनको खुद को संघर्ष करना पड़ेगा तभी सच्चे अर्थों में वे आगे बढ़ सकेंगी। एक बार संघर्ष का रास्ता चुन लिया तो लोग खुद-ब-खुद  जुड़ने लगेगें और उनको प्रोत्साहित करने लगेंगे। माता-पिता अभिभावक शिक्षकों व समाज को भी नारी शिक्षा के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। इसलिए उनकी प्रतिभा को पहचानकर जिस क्षेत्र में उनकी रुचि व जिज्ञासा जिस क्षेत्र में हो तथा उस क्षेत्र के लायक उनमें प्रतिभा हो तो उस क्षेत्र में शिक्षा दिलवाने में प्रोत्साहन व प्रेरणा देने की आवश्यकता है। 
नारी को शिक्षा का अवसर दिया जाए तो ज्ञान व बुद्धि में वह भी आगे बढ़ सकती है। वर्तमान युग में नारी व पुरुष को समानता का अधिकार देने के कारण नारी शिक्षा में वृद्धि हुई है। इसलिए धीरे -धीरे हर क्षेत्र में नारी आगे बढ़ रही। 'नोबेल ऑफ मैथ ' जिसे गणित का नोबल पुरस्कार कहा जाता है ,एक महिला को मिलना शुभ संकेत है.यह  करेन उहलेनबेक को मिला है। 
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Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

Gender differences in mathematics increase by underestimating girls

3.लड़कियों को कम आंकने से गणित में लैंगिक अंतर बढ़ता है (Gender differences in mathematics increase by underestimating girls)-

कामयाबी और व्यवहार में लड़कों के बराबर होने के बावजूद शिक्षकों की ओर से लड़कियों को कमतर आंकने की वजह से गणित विषय में लैंगिक फासला बढ़ता है. एक नए शोध में यह बात सामने आई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिक विद्यालय के स्तर से लड़के गणित में लड़कियों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं और यही स्थिति आगे भी बनी रही. यह हालात 1990 के दशक के आखिर में था.
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर जोसेफ रॉबिन्सन किम्पियन ने कहा, शैक्षणिक क्षेत्र में बदलावों के बावजूद, हमारे शोध में यह बात सामने आई है कि साल 2010 में प्राथमिक विद्यालयी स्तर के बच्चों में लैंगिक स्तर पर अंतर वही था जो 1998 में इसी स्तर पर बच्चों के बीच था. अध्ययन में अमेरिका के लड़के और लड़कियों के विकासात्मक और शैक्षणिक परिणामों पर नजर रखा गया.
शोधकर्ताओं ने 1998-1999 में प्राथमिक विद्यालय में कदम रखने वाले उन लड़के और लड़कियों पर अध्ययन आरंभ किया जिनकी गणित विषय में दक्षता समान थीं, लेकिन तीसरी कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते लड़कियां पीछे छूट गईं. लड़के और लड़कियों के बीच का यह अंतर गणित विषय के संदर्भ में अधिक था.
अध्ययन में यह पाया गया कि इस लैंगिक अंतर के लिए छात्रों के प्रति शिक्षकों की धारणा भी जिम्मेदार है. गणित में विषय में प्रदर्शन को लेकर शिक्षक लड़कियों को लड़कों से कम आंकते हैं.
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What is freedom and discipline in hindi || what is liberty and discipline by satyam education


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via https://youtu.be/7-ziGEyPXJI
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Indian National Mathematics Olympiad( INMO)

Indian National Mathematics Olympiad( INMO)

1.इंडियन नेशनल मैथमैटिक्स ओलंपियाड(Indian National Mathematics Olympiad( INMO)-

प्राचीनकाल में प्रतिभाओं को विकसित करने का सुव्यवस्थित तथा संस्थागत आधार नहीं था। शासक-प्रशासक अथवा जनता द्वारा शास्त्रार्थ का आयोजन किया जाता था जिसके आधार पर प्रतिभाओं के विजेता होने पर उन्हें पुरस्कृत तथा सम्मानित किया जाता था। धीरे-धीरे विद्यार्थियों तथा मनुष्यों की छुपी हुई प्रतिभा जन सामान्य के सामने लाने और उनकी प्रतिभा का उपयोग करने व प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए संस्थागत आवश्यकता महसूस हुई। वर्तमान काल में गणित की प्रतिभाओं को विकसित करने एवं उनकी प्रतिभाओं का सदुपयोग करने व छुपी हुई प्रतिभा को पल्लवित करने के लिए यों तो कई फुटकर रूप से संस्थागत रूप से प्रयास होते रहे हैं। परन्तु वृहत रूप में गणित के लिए इंडियन नेशनल मैथेमेटिकल ओलम्पियाड तथा विश्व स्तर पर इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड का आयोजन होता है। भारत में इंडियन नेशनल मैथेमेटिकल ओलम्पियाड का आयोजन HBCSE(Homi Bhabha Centre for Science Education )भाभा अटाॅमिक सेन्टर आॅफ ऐजुकेशन द्वारा किया जाता है। सेन्टर द्वारा यह आयोजन छ: चरणों में किया जाता है। इसके द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं का डिफीकल्टी लेवल यों कहने को तो 8वीं से 12वीं के स्तर तक होता है परन्तु वास्तविक रूप में डिफीकल्टी लेवल बहुत उच्च स्तर का होता है जिससे बहुत मेधावी विद्यार्थी तथा उच्च प्रतिभाशाली विद्यार्थी ही पार कर पाते हैं। इस परीक्षा के छ:चरणों को पार करने के लिए कठिन परिश्रम और अभ्यास की आवश्यकता होती है। प्रारम्भ में ही ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करके उनको तैयारी शुरू से ही तैयारी करवाई जाती है। इंडियन नेशनल मैथेमेटिकल ओलम्पियाड तथा इंटरनेशनल मैथेमेटिकल ओलम्पियाड द्वारा आयोजित इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद उत्तीर्ण प्रतिभागियों के सामने बहुत सारे अवसर खुल जाते हैं। यदि वे आगे अध्ययन करना चाहते हैं तो उनको स्काॅलरशिप प्राप्त होती है जिसके आधार पर वे अपना अध्ययन जारी रख सकते हैं। इसके अतिरिक्त भी की अवसर होते हैं। 
इस आर्टिकल में उपर्युक्त परीक्षा की चयन प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है। इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करके इसमें भाग ले सकते हैं और अपनी प्रतिभा का विकास करने का एक सुनहरा मौका मिलने पर उनका भाग्योदय हो सकता है और अपनी छुपी हुई प्रतिभा को जाग्रत और विस्तृत करके जनहित में लगा सकता है। ऐसा अवसर कुछ विशिष्ट विद्यार्थियों को ही मिलता है। जिनको यह अवसर मिलता है उन्हें इस अवसर का लाभ सम्पूर्ण मानव जाति व गणित को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में करना चाहिए। तात्पर्य यही है कि इस संस्था द्वारा जो अवसर प्रदान किया जाता है उसका लाभ उठाना विद्यार्थियों और हमारे हाथ में है। यदि हम चाहे तो लाभ उठाए और न चाहे तो नहीं उठाए। जैसे प्यासे को कुए के पास जाना ही होगा, कुआं आकर आपसे नहीं कहेगा कि आपको प्यास लग रही है पानी पी लो। इसी प्रकार इन जनहितकारी संस्थाओं का लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें पुरुषार्थ करना ही होगा और उसकी क्रियाविधि व नियमों का अनुकरण करना होगा। हम भी इसी उद्देश्य और भावना के साथ इस आर्टिकल को पोस्ट कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी इसमें भाग लें और लाभ उठाएं। 
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2.जानिए इंडियन नेशनल मैथमैटिक्स ओलंपियाड (Indian National Mathematics Olympiad या INMO) की परीक्षाओं के बारे में पूरी जानकारी.

(1.)INMO एमओ सेल द्वारा संचालित किया जाता है जो जनवरी के तीसरे रविवार को देश भर के 30 केंद्रों पर आयोजित किया जाता है। 
(2.)संभावित उम्मीदवारों को पहले अपने संबंधित राज्य या क्षेत्र के क्षेत्रीय गणितीय ओलंपियाड (आरएमओ के रूप में जाना जाता है) लिखने की आवश्यकता होती है, जो आमतौर पर पिछले वर्ष के अक्टूबर के पहले रविवार को आयोजित की जाती है। 
(3.)INMO लिखने के लिए प्रत्येक क्षेत्र से लगभग तीस छात्रों का चयन किया जाता है। RMO (लगभग 900) के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र दूसरे चरण के INMO के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं।
(4)वरिष्ठ वर्ष के छात्रों पर प्रतिबंध.
भारत में बारहवीं कक्षा के छात्रों को नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार आरएमओ लेने की अनुमति है।
(5.)परीक्षा की संरचना 
INMO परीक्षा के पेपर में चार घंटे के समय में हल करने के लिए छह समस्याएं शामिल हैं। ये समस्याएं बीजगणित, ज्यामिति, संख्या सिद्धांत और दहन विज्ञान के क्षेत्रों में हैं। किसी भी कलन की आवश्यकता नहीं है, हालांकि समस्याओं को हल करने के लिए कलन आधारित दृष्टिकोण की अनुमति है।
(6.)आगे के चरण 
अंतर्राष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड प्रशिक्षण शिविर (IMOTC).
योग्य छात्रों को मुंबई में होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन द्वारा आयोजित एक महीने के गणित शिविर, अंतर्राष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड प्रशिक्षण शिविर (IMOTC) में आमंत्रित किया जाता है। पहली बार प्रतिभागियों के लिए, यह आमतौर पर अप्रैल के अंत से मई के अंत तक फैलता है, जबकि यह वरिष्ठ प्रतिभागियों के लिए लगभग 10-14 दिन बाद शुरू होता है। इस शिविर में छात्रों को ओलंपियाड गणित और कुछ अन्य सामान्य गणित पढ़ाए जाते हैं। इस अवधि के दौरान चार चयन परीक्षण और दो अभ्यास परीक्षण आयोजित किए जाते हैं और चयन परीक्षणों में शीर्ष छह छात्र अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं।
(7.)IMO के लिए पूर्व-प्रस्थान प्रशिक्षण शिविर .
6 छात्रों की चयनित टीम आईएमओ के लिए प्रस्थान करने से पहले लगभग 10 दिनों के लिए प्रशिक्षण और अभिविन्यास के दूसरे दौर से गुजरती है।
(8.)अंतर्राष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड 
IMOTC के अंत में चयनित छह सदस्य दल एक नेता, एक उप-नेता और एक पर्यवेक्षक के साथ IMO में देश का प्रतिनिधित्व करता है, प्रत्येक वर्ष जुलाई में IMO के एक अलग सदस्य देश में आयोजित किया जाता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) टीम, नेता और उप-नेता की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा का वित्त-पोषण करता है, जबकि NBHM (DAE) अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी और पूरे देश के कार्यक्रम से जुड़े अन्य खर्चों का वित्तपोषण करता है।
बाद के सत्रों के लिए योग्य उम्मीदवारों का पोस्ट-आईएमओटीसी प्रशिक्षण .
जो छात्र INMO को एक बार अर्हता प्राप्त करते हैं और IMO प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए आते हैं, उन्हें जुलाई - दिसंबर की अवधि के दौरान डाक संबंधी समस्याएं भेजी जाती हैं, जिन्हें उन्हें हल करना होगा और वापस भेजना होगा (यदि वे अभी भी स्कूल में हैं)। उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर, कुछ छात्रों को सीधे अगले वर्ष आईएमओ प्रशिक्षण शिविर में आमंत्रित किया जाता है। दूसरों को फिर से INMO को फिर से लिखना होगा (उन्हें क्षेत्रीय गणित ओलंपियाड लिखना नहीं होगा)।
(9.)योग्यता पर भत्ते 
INMO योग्यता प्राप्त करने वाले छात्र स्वचालित रूप से B.Sc. में प्रवेश के लिए पात्र हैं। (ऑनर्स) चेन्नई गणित संस्थान में गणित पाठ्यक्रम।
2008 के बाद से, भारतीय सांख्यिकी संस्थान के बी। स्टेट या बी। मैथ कोर्स के लिए आवेदन करने वाले INMO को लिखित परीक्षा दिए बिना सीधे साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है।
INMO पुरस्कार प्राप्तकर्ता एक NBHM छात्रवृत्ति के लिए पात्र हैं जो वर्तमान में लगभग रु. में है। 2500 प्रति माह, अगर वे गणित में अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। उन्हें एक चुने हुए संकाय के साथ पत्राचार और आवधिक संपर्क के माध्यम से गणित में प्रशिक्षण के 4 साल के कार्यक्रम की पेशकश की जाती है। यह कार्यक्रम INMO पुरस्कार विजेताओं के लिए भी उपलब्ध है, जो गणित में स्नातक की डिग्री हासिल नहीं करते हैं, लेकिन विषय में विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें रु। का वार्षिक नकद पुरस्कार दिया जाता है। कार्यक्रम में संतोषजनक प्रदर्शन के लिए 9,000 विषय।
जो छात्र इसे IMO के लिए बनाते हैं, वे किशोर विज्ञान प्रोत्साहन योजना (KVPY) फैलोशिप के लिए पात्र हैं, बशर्ते वे भारत में विज्ञान विषयों में अपनी पढ़ाई करें। फैलोशिप राशि रु.5000 प्रति माह।
IMO में स्वर्ण, रजत या कांस्य प्राप्त करने वाले भारतीय दल के सदस्यों को रु। के NBHM द्वारा नकद पुरस्कार दिया जाता है। 5,000, रु. 4,000 और रु. क्रमशः 3,000।

IMO प्रशिक्षण शिविर के लिए सभी यात्रा व्यय और IMO के लिए सभी व्यय भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वहन किए जाते हैं।

Homi Bhabha Centre for Science Education


3.इंडियन नेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड (Indian National Mathematical Olympiad या INMO) की परीक्षाएं होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र (Homi Bhabha Centre for Science Education या HBCSE) द्वारा करवायी जाती हैं.

नेशनल बोर्ड ऑफ हायर मैथमेटिक्स मैथमेटिक्स या एनबीएचएम (National Board of Higher Mathematics), डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) की तरफ से होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र (HBCSE) ये काम करता है.
राष्ट्रीय स्तर पर गणित ओलिंपियाड एनबीएचएम की एक प्रमुख गतिविधि और प्रयास है. इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य स्कूल के बच्चों में गणित की प्रतिभाओं की पहचान करना है.
National और International Mathematical Olympiad तक पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को कई चरणों को पार करना होता है, जिसके बारे में शुरू से लेकर अंत तक पूरी जानकारी हमने इस आर्टिकल में करवाई है.
इसके अतिरिक्त, तीन समूह - केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) और केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) में हर एक के पास रीजनल कोऑर्डिनेटर है.
पूरे गणितीय ओलंपियाड कार्यक्रम में छह चरण (6 Stages) होते हैं:
पहला चरण (Stage 1): प्री-रीजनल मैथमेटिकल ओलंपियाड
पहला चरण प्री-रीजनल (Pre-regional) लेवल का होता है. इस चरण की परीक्षा में क्वालीफाई विद्यार्थी अगले चरण में जाते हैं (जो रीजनल लेवल पर होता है). इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें नीचे दी गई है.
योग्यता
2017 में आयोजित पहले चरण की इस परीक्षा के लिए कक्षा 8वीं, 9वीं, 10वीं, और 11वीं के सिर्फ वही विद्यार्थी भाग ले सकते थे जिनका जन्म 1 अगस्त, 1998 के दिन या उसके बाद हुआ हो.
रजिस्ट्रेशन फीस
इसमें अप्लाई करने के लिए केंद्रीय विद्यालयों (KV) के विद्यार्थियों को 100 रुपये फीस देनी होती है वहीं केंद्रीय विद्यालयों के आलावा अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को 200 रुपये फीस देनी होती है.
एग्जाम की अवधि
ढाई घंटे
किस तरह के प्रश्न पूछें जाते हैं
ऐसे प्रश्न जिनके उत्तर 1 या 2 डिजिट के होते हैं और इनके उत्तर OMR शीट में भरने होते हैं
प्रश्नों की संख्या
इस एग्जाम में एक पेपर होता है जिसमे 30 प्रश्न पूछे जाते हैं.
सिलेबस:
इस आर्टिकल के अंत में दिया गया है.
परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था:
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स (IAPT). [वेबसाइट - http://www.iapt.org.in]
दूसरा चरण (Stage 2): रीजनल मैथमेटिकल ओलंपियाड
दूसरे चरण के रीजनल मैथमेटिकल ओलंपियाड में 3 घंटे का एग्जाम होता है जिसमे 6 सवाल पूछे जाते हैं. ये पेन और पेपर बेस्ड एग्जाम होता है. इस चरण की परीक्षा क्वालीफाई करने वाले कैंडिडेट्स अगले चरण में पहुंचते हैं.
एग्जाम मध्यम
इंग्लिश एंड हिंदी
एग्जाम की अवधि
3 घंटे
प्रश्नों की संख्या
इस एग्जाम में एक पेपर होता है जिसमे 6 प्रश्न पूछे जाते हैं.
किस तरह के प्रश्न पूछें जाते हैं
वर्णनात्मक (Descriptive)
तीसरा चरण (Stage 3):  इंडियन नेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड (नेशनल लेवल)
रीजनल लेवल (या रीजनल मैथमेटिकल ओलंपियाड) को क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थी (करीब 900) नेशनल लेवल मैथमैटिक्स ओलंपियाड तक पहुंचते हैं.  यह परीक्षा सामन्यतः जनवरी महीने के तीसरे रविवार को आयोजित होती है.
इस परीक्षा का आयोजन देश भर के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में होता है. इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गयी है.
एग्जाम की अवधि
4 घंटे
किस तरह के प्रश्न पूछें जाते हैं
वर्णनात्मक (Descriptive)
प्रश्नों की संख्या
इस एग्जाम में एक पेपर होता है जिसमे लगभग 6 प्रश्न पूछे जाते हैं.
चौथा चरण (Stage 4):  इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड ट्रेनिंग कैंप
लगभग 900 विद्यार्थियों में से मात्र 35 (लगभग) विद्यार्थी इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड ट्रेनिंग कैंप तक पहुंचते हैं.
ये ट्रेनिंग कैंप अप्रैल और मई के महीने में HBCSE  द्वारा लगाया जाता है. ट्रेनिंग में विद्यार्थियों को इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड (International Mathematical Olympiad) से जुड़ी सभी ख़ास जानकारी दी जाती है विद्यार्थियों की प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को बढ़ाया जाता है.
इस ट्रेनिंग के दौरान कई सिलेक्शन टेस्ट होते है और मात्र 6 विद्यार्थी अगले चरण तक पहुंच पाते हैं.
पांचवां चरण (Stage 5): पूर्व प्रस्थान शिविर (या Pre-Departure Camp)
इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड में हिस्सा लेने के लिए 6 विद्यार्थियों की चुनी हुई टीम इस चरण में 8 से 10 दिनों तक की बेहद कठिन ट्रेनिंग से गुजरती है और विद्यार्थियों को हर तरह के प्रश्नों को हल करने के लिए तैयार किया जाता है.
छठा चरण (Stage 6): इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड (मुख्य प्रतियोगिता)
आखिरी चरण में सभी चुने हुए विद्यार्थी इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड में हिस्सा लेते हैं. इन विद्यार्थियों के साथ 4 शिक्षक (या मेंटर्स) रहते हैं.
सिलेबस (regional, national और international) के ज़्यदातर टॉपिक्स 11वीं और 12वीं कक्षा के है. हालांकि प्रश्नों का स्तर काफी ऊंचा रहता है (सामन्यतः - IMO > INMO > RMO). सिलेबस के टॉपिक्स नीचे दिएगए हैं -

• Number Systems,
• Arithmetic of Integers,
• Geometry,
• Quadratic Equations and Expressions,
• Trigonometry,
• Co-ordinate Geometry,
• Systems of Linear Equations,
• Permutations and Combinations,
• Factorisation of Polynomials,
• Inequalities,
• Elementary Combinatorics,
• Probability Theory,
• Number Theory,
• Infinite Series,
• Complex Numbers and Elementary Graph Theory
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