The Toughest Competition Problem In The World And How You Can Solve It

The Toughest Competition Problem In The World And How You Can Solve It

1.दुनिया में सबसे कठिन प्रतियोगिता समस्या है - और आप इसे कैसे हल कर सकते हैं का परिचय (Introduction of The Toughest Competition Problem In The World  And How You Can Solve It)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित की अनसुलझी हुई समस्याओं को मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में प्रस्तुत किया जाता है और उनके समाधान, मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से करवाए जाते हैं। 
भारतीय संस्कृति में समस्याओं का हल करने के लिए शास्त्रार्थ, वार्ता, वाद-विवाद का आयोजन किया जाता था। यह संस्कृति की अद्भूत और विशिष्ट देन है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में समस्या समाधान विधि का प्रयोग करके समस्याओं का हल ज्ञात किया जाता है। 
हम चिंतन, मनन, तर्क-शक्ति का प्रयोग करके गणित की समस्याओं का समाधान ज्ञात कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में चिंतन, मनन, विवेक और अन्त:प्रज्ञा के बल पर समस्याओं का समाधान किया जाता है। भारतीय ऋषियों और सन्तों ने इनका प्रयोग करके बहुत ही आश्चर्यजनक सिद्धान्त प्रस्तुत किया है और अपने चरित्र में उन सिद्धान्तों का पालन करके इस तरह के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं कि ये सिद्धान्त कोरी कल्पना मात्र नहीं है बल्कि यथार्थ में इनका पालन किया जा सकता है। हमारा अन्त:करण जितना पवित्र होता जाता है हम गणितीय समस्याओं का सटीक और सही समाधान करने में सक्षम होते जाते हैं।
The Toughest Competition Problem In The World  And How You Can Solve It

The Toughest Competition Problem In The World  And How You Can Solve It

मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड की शुरुआत इसी भावना और उद्देश्य को लेकर की गई है जिसके अच्छे परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। हमें ऐसे प्लेटफार्म का उपयोग अच्छी भावना और उद्देश्य के साथ करना चाहिए जिससे गणित जनहित व लोककल्याण के लिए किया जा सके। मानव मात्र की भलाई के लिए ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित व बढ़ावा देना चाहिए। 
यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें ।यदि आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।

2.भारत में परम्परागतअधिगम (Learning)-

(1.)सीखना (अधिगम) Learning :- 

भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुसार बालक माता के गर्भ से ही सीखना प्रारंभ कर देता है और आजीवन यह सीखने की प्रक्रिया जारी रहती है. सीखने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है, न कोई समय तथा स्थान होता है. कोई भी मनुष्य कहीं भी, कभी भी और किसी से भी सीख सकता है. माता-पिता, भाई-बहन, मित्र-अमित्र, परिचित और अपरिचित आपस में सीख सकते हैं. अभिमन्यु ने अपनी माता सुभद्रा के गर्भ में ही चक्रव्यूह का भेदन सीख लिया था. 
The Toughest Competition Problem In The World  And How You Can Solve It,Abhimanyu Uttara

Abhimanyu Uttara

यहां तक कि हम मनुष्यों से ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों से भी सीख सकते हैं या कि सीखते हैं. शेर से आत्मनिर्भरता अर्थात् वह अपने बल पर ही शिकार करता है दूसरे के शिकार किये हुए का भक्षण नहीं करता है और शिकार करने के लिए पूरी शक्ति लगा देता है, बगुले से हम ध्यान सीख सकते हैं वह सरोवर के किनारे एकाग्रता से मछली की प्रतीक्षा करता है और शिकार कर लेता है इसी प्रकार हम बगुले से इन्द्रियों को वश में करके एकाग्रचित्त होकर अपने कार्य को सिद्ध कर सकते हैं ,चींटी से परिश्रम, मुर्गे से चार बाते यथासमय जागना, युद्ध के लिए तैयार रहना, बन्धुओं को उनका हिस्सा देना और आक्रमण करके भोजन करना सीख सकते हैं. छिपकर मैथुन करना, धृष्टता (ढीठपन), समय समय पर संग्रह करना, निरन्तर सावधान रहना और किसी पर विश्वास न करना इन पांच बातों को कोए से सीखना चाहिए. बहुत खाने की शक्ति रखना, न मिलने पर थोड़े में ही सन्तोष कर लेना, गाढ़ निद्रा में सोना, तनिक सी आहट से ही जाग जाना, स्वामी भक्ति और शूरवीरता ये छ: गुण कुत्ते से सीखना चाहिए. अत्यन्त थक जाने पर भी बोझ ढोते जाना, सर्दी-गर्मी की परवाह न करना और सदा सन्तोष से जीवन बिताना इन तीन गुणों को गधे से सीखना चाहिए. 

(2,)मनुष्य यहां तक कि पशु-पक्षियों तथा प्रकृति से सीखना(Human beings, even animals and birds, learn from nature)-

व्यक्ति सीखना चाहे तो कदम कदम कदम पर किसी भी व्यक्ति से चाहे वह छोटा या बड़ा यहां तक कि पशु-पक्षियों तथा प्रकृति से बहुत कुछ सीख सकता है. सीखने के लिए सद्गुरु विवेक के रूप में हमारे अन्दर मौजूद है. ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति में अन्त:करण विद्यमान है. परन्तु शर्त यही है कि अन्त:करण यदि काम, क्रोध आदि विकारों से मुक्त हो अथवा जिसने तप, साधना द्वारा अपने अन्त:करण को विकारों से मुक्त कर लिया हो. ऐसा व्यक्ति प्रकृति को देखकर भी धर्म, अध्यात्म का तत्त्व ज्ञान सीख सकता है. वस्तुतः यह सम्पूर्ण चराचर जगत् उस परमात्मा की लीला ही है.
दत्तात्रेय जी को ज्ञान प्राप्ति के लिए तप साधना करने के पश्चात् भी अन्तर्बोध नहीं हुआ. वे कई साधु सन्तों, गुरुओं के पास गये पर कहीं भी सन्तोष नहीं हुआ क्योंकि क्योंकि उनको आत्मज्ञान नहीं हुआ. अन्त में वे ब्रह्मा जी के पास गये तथा अपनी जिज्ञासा ब्रह्मा जी को बताई. ब्रह्मा जी ने दत्तात्रेय को कहा कि प्रकृति में प्रत्येक जीव तथा प्रकृति को देखकर अन्तर्ज्ञान हो सकता है, आवश्यकता है अपने अन्त:करण को पवित्र एवं शुध्द करने की. इसके पश्चात प्रकृति की छोटी-छोटी घटनाओं का निरीक्षण करने के पश्चात अध्यात्म ज्ञान की सिद्धि कर ली. पश्चात् सामान्य व्यक्ति से लेकर राजा तक प्रत्येक व्यक्ति को अध्यात्म का संदेश पहुंचाया.
एक बार राजा यदु ने दत्तात्रेय जी से पूछा महात्मन्! संसार के अधिकांश लोग काम, क्रोध, लोभ इत्यादि के वशीभूत होकर दु:खी है तो आपने जीवन्मुक्त की अवस्था कैसे प्राप्त की? तब दत्तात्रेय जी ने कहा कि चेतना की अनुभूति के लिए किसी अकेले गुरु से काम नहीं चलता उसके लिए व्यक्ति को अन्दर जो गुरु आत्मा के रूप में विराजमान है उसकी शरण में जाना होता है. इस सद्गुरु के माध्यम से मुझे 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त हुई.. उनमें पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंग, भौंरा, हाथी, मधुमक्खी, हिरण, मछली, पिंगलावेश्या, कुरर पक्षी, बालक, कुमारी कन्या, बाग बनाने वाला, सर्प और भृंगी कीट है. महाराजा यदु ने कहा कि ये सब तो जड़ और निर्बुद्धि हैं, इनसे शिक्षा कैसे प्राप्त हुई. दत्तात्रेय जी ने बताया कि जड़ और निर्बुद्धि होते हुए भी प्रकृति उस परमात्मा की लीला ही तो है, आवश्यकता है अपने अन्त:करण को निर्मल करने की.
उन्होंने कहा कि पृथ्वी से मैंने धैर्य और क्षमा की शिक्षा ली.लोग पृथ्वी पर कितना उत्पात करते हैं और चोट पहुंचाते हैं पर वह न तो किसी से बदला लेती है और सहन करती है,, इसी प्रकार धीर पुरुष को को चाहिए कि दूसरों की मजबूरी को समझकर न तो क्रोध करें और न धैर्य खोए.
वायु से शिक्षा ली कि वह कहीं आसक्त नहीं होती और किसी का भी गुणदोष नहीं अपनाती. वैसे ही साधक को भी किसी का दोष ग्रहण न करे और न किसी से आसक्ति व द्वेष करें.
आकाश से मैंने यह जाना कि जितने भी चल-अचल पदार्थ है उनका आश्रय स्थान एक ही है आकाश. उसी प्रकार जितने भी चर-अचर जीव है उनमें आत्मा सर्वत्र व्याप्त है.
जल का स्वभाव स्वच्छ, मधुर और पवित्र है जिससे यह प्रेरणा प्राप्त की कि साधक को स्वभाव स्वच्छ, शुद्ध और पवित्र रखना चाहिए.
अग्नि तेजस्वी और ज्योतिर्मय है उसके तेज को कोई दबा नहीं सकता तथा उसके पास संग्रह के लिए कोई पात्र नहीं है, वह सब कुछ भस्म कर देती है. वह भले बुरे सभी पदार्थों को भस्म कर देने पर भी किसी दोष से लिप्त नहीं होती है. इसी प्रकार साधक को भी तेजस्वी व इंद्रियों को नियंत्रण में रखना चाहिए उनमें आसक्ति न रखें.
चन्द्रमा की गति काल के प्रभाव से घटती बढ़ती रहती है परन्तु वस्तुतः वह न तो घटता है, न बढ़ता है. वैसे ही जन्म से लेकर मृत्यु तक शरीर की अवस्थाएं बदलती है आत्मा का उससे कोई सम्बन्ध नहीं है.
सूर्य अपनी किरणों से पृथ्वी का जल सोखकर और समय पर बरसाता है. वैसे ही योगी पुरुष समय पर विषयों को ग्रहण और त्याग करते हैं किंतु सूर्य की भाँति आसक्त नहीं होते हैं.. अजगर से मैंने सीखा कि साधक को हर परिस्थिति में संतुष्ट रहना चाहिए. समुद्र, वर्षा ऋतु में नदियों की बाढ़ के कारण न तो बढ़ता है और न ही ग्रीष्म ऋतु में जब नदियां सूखने लगती है तो घटता ही है. उसी प्रकार साधक को सांसारिक पदार्थों के प्राप्त होने पर न तो खुश होना चाहिए और न ही उनके नष्ट हो जाने पर खिन्न होना चाहिए.
पतंगा दीपक के रूप पर मोहित होकर उस पर कूदता है और जल कर भस्म हो जाता है. वैसे ही जो व्यक्ति इंद्रियों को वश में नहीं रखता वह नाशवान पदार्थों में फँसा रहता है. वह अपनी विवेक बुद्धि खोकर पतंगें के समान ही नष्ट हो जाता है.
भौंरा पुष्पों से उनका सार ही ग्रहण करता है उसी प्रकार बुद्धिमान पुरुष सभी शास्त्रों से उनका सार मात्र ही ग्रहण करें.
हाथी काठ की हथिनी को देखकर ही शिकारियों द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरता है और मृत्यु को प्राप्त होता है. इसी प्रकार काष्ठ मूर्ति में भी साधक की आसक्ति उसके पतन का कारण बन जाती है.
लोभी मधुमक्खी प्रयत्नपूर्वक रस का संचय करती है जिसे अन्य लोग ही उपयोग में लेते है. उसी प्रकार लोभी व्यक्ति का संचित धन का दूसरे लोग ही उपभोग करते हैं.
हिरण सुरीली यंत्रों के कारण श्रवणेन्द्रिय के विषयों में आसक्त होकर अपने प्राण गँवाता है उसी प्रकार साधक को श्रवणेन्द्रिय की आसक्ति पतन की ओर ले जाती है.
मछली काँटें में फँसे हुए माँस के टुकड़े में अपने प्राण गँवा देती है वैसे ही स्वाद का लोभी मनुष्य भी अपनी जीभ के वश में होकर मारा जाता है.
प्राचीनकाल में विदेह नगरी में पिंगला नाम की वेश्या थी. वह हमेशा धन प्राप्ति की कामना रखती थीं और सोचा करती थी कि कोई धनिक पुरुष आकर उसे अपना धन दे जायेगा. एक दिन वह आधी रात इसी तरह प्रतीक्षा करती रही और उसका मुँह सूख गया. उसे निराश होना पड़ा जिसके कारण उसे वैराग्य हो गया. इससे मैंने सीखा कि दूसरों से आशा करना दु:ख का कारण है. दूसरों से आशा न करके खुद के प्रयत्नों पर निर्भर रहना सबसे बड़ा सुख है. उस रात जब पिंगला ने दूसरों से आशा करना छोड़ दिया तो वह सुख की नींद सो सकी.
एक बार किसी कुमारी कन्या के घर, वर और उसके घर वाले पहुँचे. संयोग कन्या के घर वाले कहीं गये हुए थे. इसलिए कन्या ने स्वयं ही उनका सम्मान किया और उनको भोजन कराने के लिए धान कूटने लगी. धान कूटते समय उसकी कलाई की चूड़ियाँ बज रही थी जिससे उसे लज्जा महसूस हुई. उसने एक-एक करके सारी चूड़ियाँ उतार दी केवल एक ही रखी. मैंने यह शिक्षा ग्रहण की कि साधक के चित्त में बहुत सी वृत्तियां हों तो उसका मन चलायमान रहता है वह ठीक से कोई कार्य नहीं कर पाता है. इसलिए साधक को चित्त में एक ही ध्येय रखना चाहिए.
एक बार एक व्यक्ति बाण बनाने के अपने काम में इतना एकाग्र था कि उसके पास से ही राजा की सवारी निकल गई पर उसे पता ही नहीं चला. साधक भी संसार के कोलाहल तथा उथल पुथल से विचलित न होकर अपने लक्ष्य में एकाग्रचित्त रहे.
कोई पक्षी अपनी चोंच में माँस का टुकड़ा लिए बैठा था. दूसरे पक्षियों ने छीनने के लिए उसे चोंचों से मारना प्रारंभ कर दिया. जब उस पक्षी ने माँस का टुकड़ा फेंक दिया तो कष्ट से मुक्त हो गया. इससे मैंने यह शिक्षा ली कि समस्या के कारण को छोड़ देना चाहिए क्योंकि वह दूसरों के मन में ईर्ष्या को जन्म देता है.
साँप से मैंने यह शिक्षा ली कि मठ या मण्डली बनाने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए.
मकड़ी बिना किसी सहायक के अपने ही मुँह के तारों द्वारा जाला बना लेती है, उसी में घूमती फिरती है और फिर उसे ही निगल जाती है. परमात्मा भी बिना किसी सहायक के अपनी माया से इस ब्रह्मांड की रचना करते हैं और उसमें जीवरूप से भ्रमण करते हैं और अपने आपको ही लीन करके अंत में अकेले शेष रह जाते हैं. भृंगी किसी कीट को पकड़कर अपने रहने के स्थान में बन्द कर देता है और कीड़ा भय से उसी का चिन्तन करते करते उसके रूप का हो जाता है उसी प्रकार साधक को भी केवल परमात्मा का ही चिन्तन करके परमात्मा रूप हो जाना चाहिए.
विवेक और वैराग्य की शिक्षा देने के कारण यह शरीर भी एक गुरु है यद्यपि यह शरीर नष्ट होनेवाला है लेकिन इससे मोक्ष(मुक्ति) को उपलब्ध हुआ जा सकता है. यदि व्यक्ति जिज्ञासु हो और तीव्र लगन हो तो ज्ञान की प्राप्ति प्रकृति व इसमें रहनेवाले जीव-जंतुओं से हो सकती है.

3.आधुनिक अधिगम (Learning)-

3(1.)समस्या समाधान विधि( Problem solving Method) :-

समस्या समाधान विधि के जनक हर्बर्ट, डीवी, टोलमेन, आंइनस्टीन जैसे महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक हैं ।
समस्या समाधान तब सम्भव होता है जब जीवन में हमारे सामने कोई बाधा उत्पन्न होती है या एक रचना रहित क्षेत्र हमारे सम्मुख आता है तो समस्या का जन्म होता है ।जब हमें उस समस्या को हल करने का बोध हो तो जाता है तो उसे समस्या समाधान कहा जाता है ।
समस्या समाधान के प्रथम चरण में समस्या को समझने की आवश्यकता होती है कि आखिर समस्या क्या है और उसका कारण क्या है? इसके पश्चात समस्या को परिभाषित किया जाता है ।इसके पश्चात समस्या को हल करने की सामग्री एकत्रित की जाती है और उसका समाधान किया जाता है ।
गणित विषय की यह एक सर्वमान्य स्वीकृत एवं प्रचलित विधि है ।गणित अध्यापन में अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों के समक्ष समस्याओं को प्रस्तुत करता है तथा विद्यार्थी सीखे हुए नियमों, सिद्धान्तों, संकल्पनाओं तथा प्रत्ययों की सहायता से समस्याओं के हल ज्ञात करते हैं.
यदि अध्यापक विद्यार्थियों के जीवन से सम्बंधित समस्याओं को कक्षा में हल करने के लिए प्रस्तुत करता है तो विद्यार्थियों में हल ज्ञात करने हेतु उत्साह एवं तत्परता उत्पन्न होती है तथा सीखने की गति में वृद्धि होती है। प्रत्येक समस्या में नवीनता होनी चाहिए इससे विद्यार्थियों को हल ज्ञात करने हेतु प्रेरणा मिलती है।
एक कुशल अध्यापक स्वयं वास्तविक तथ्यों को इकट्ठा कर विद्यार्थियों की क्षमता को ध्यान में रखकर समस्याओं का निर्माण करता है। विद्यार्थी समस्या में दी हुई परिस्थिति का अध्ययन कर तथ्यों का विश्लेषण करते हैं तथा सूत्रों, नियमों, सिद्धान्तों, प्रमेयों आदि की सहायता से समस्या का समाधान करते हैं।
यदि समस्या जीवंत हो तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं एवं रुचियों से संबंधित हो तो विद्यार्थियों में स्वत: समस्या का समाधान करने की जिज्ञासा होगी।
वस्तुतः गणित की पाठ्यपुस्तकों में परम्परागत, घिसीपिटी तथा काल्पनिक समस्याओं का समावेश होता है। ये समस्याएं विद्यार्थियों में समाधान करने हेतु कोई उत्साह पैदा नहीं करती हैं।

3(2.)समस्या प्रस्तुत करने के नियम -

(1.)समस्या में सम्मिलित सामाजिक परिस्थिति ऐसी हो जो विद्यार्थियों की रुचि एवं समझ के अनुसार हो।
(2.)समस्या विद्यार्थी के जीवन से सम्बंधित होनी चाहिए। समस्या के तथ्यों से विद्यार्थी को परिचित होना चाहिए।
(3.)समस्या की भाषा सरल, स्पष्ट, ग्रहण करने योग्य तथा अर्थपूर्ण हो। अनावश्यक रूप से लम्बी तथा अर्थहीन शब्दाडम्बर से परिपूर्ण समस्याएं गणित विषय को कठिन व अरुचिकर बना देती है।
(4.)समस्या में क्या ज्ञात करना है? यह बात स्पष्ट रुप से विद्यार्थियों को दृष्टिगत होनी चाहिए
बहुधा ऐसी समस्याएं भी पाठ्यपुस्तकों में उपलब्ध हैं कि समस्या को पढ़ने के बाद भी यह ज्ञात नहीं किया जा सकता है कि समस्या में क्या है? कितना? कैसे? क्यों? ज्ञात करना है।
(5.)समस्याएं विद्यार्थियों द्वारा सीखे हुए सूत्रों, प्रमेयों, संकल्पनाओं आदि पर आधारित हो।
(6.)समस्याओं को सरल, स्पष्ट, सारपूर्ण तथा लघु आकार की बनाने हेतु स्पष्ट चित्र, अर्थपूर्ण सारणी, संकेत देने चाहिए।
(7.)समस्या को समझने के पश्चात् उन्हें हल करने की विधि का पूर्व ज्ञान होना चाहिए।
(8.)यदि अध्यापक विद्यार्थियों के वातावरण, स्थानीय परिस्थितियों एवं रुचियों को आधार बनाकर स्वयं ही समस्याओं को निर्माण कर कक्षा में प्रस्तुत करें तो गणित विषय रुचिपूर्ण हो सकेगा
(9.)यदि समस्या लम्बी हो तो उसके दो या तीन भाग कर देने चाहिए जिससे विद्यार्थियों में कोई अप्रत्याशित उलझन न हो।
(10.)समस्याओं के अपेक्षित उत्तर तर्कसंगत होने चाहिए जिससे विद्यार्थी स्वयं उनका समाधान कर सके।
(11.)कक्षा में समस्या बोर्ड पर लिखकर प्रस्तुत की जाये तथा रंगीन चाॅक द्वारा आवश्यक संकेत देना लाभप्रद है। यदि आकृति, चित्र, नक्शा, सारणी, ग्राफ आदि समस्या के साथ सम्मिलित हों तो समस्या को समझने में सहायता मिलेगी।
(12.)कक्षा में कम्प्यूटर, फिल्मों, विश्व समाचारों में प्रकाशित तथ्यों, पत्रिकाओं में प्रकाशित चित्रों आदि के माध्यम से यदि समस्याएं प्रस्तुत की जायें तो अध्यापन को वास्तविक बनाने में सहायता मिलेगी।
(13.)कक्षा में विद्यार्थियों से उनकी समस्याएं ज्ञात कर उन्हें संख्यात्मक प्रारूप देना भी एक उत्तम विधि है।
(14.)जीवन की वास्तविक घटनाओं, तथ्यों, विवरणों, प्रसंगों को गणित अध्यापन में विषयवस्तु बनाकर अध्यापन करना आधुनिक अधिगम का भाग है।
(15.)समस्या समाधान तथा आकलन में धैर्य रखना अत्यंत आवश्यक है।
(16.)विद्यार्थियों को स्वयं को समस्या पहचानकर हल ढूंढने की प्रेरणा देना गणित अध्यापक का कर्तव्य है।
3 (3.)चिंतन एवं समस्या समाधान -
चिंतन एवं समस्या समाधान में विशेष अंतर नहीं है। चिंतन ही समस्या का हल है। मनुष्य की विशेषता उसकी तर्क शक्ति है। तर्क शक्ति को कक्षा में प्रोत्साहन मिलना चाहिए। यदि विद्यार्थी चिंतन शक्ति और तर्क शक्ति को आधार बनाकर समस्या समाधान का प्रयास करते हैं तो उनके विकास का क्रम गतिशील होगा। कार्य सम्बन्धी चेतना तथा समस्याओं से जूझने की क्षमता का विकास गणित अध्ययन का महत्त्वपूर्ण भाग है।

3(4.)समस्या हल करने के पद -

(1.)समस्या में दिए गए तथ्यों तथा उनके सम्बन्धों को समझना -
समस्या को प्रस्तुत करने के बाद अध्यापक के लिए यह आवश्यक है कि कक्षा को इतना समय दे जिससे कि प्रत्येक विद्यार्थी समस्या का भलीभांति अध्ययन कर सके। इससे प्रत्येक विद्यार्थी को यह जानकारी प्राप्त हो सकेगी कि समस्या में क्या दिया हुआ है तथा क्या ज्ञात करना है।
(2.)समस्या का विश्लेषण -
कक्षा में समस्या को प्रस्तुत करने के बाद समस्या का प्रश्नोत्तर विधि द्वारा विश्लेषण करना चाहिए तथा विद्यार्थियों की सहायता से यह स्पष्ट करना चाहिए कि समस्या में दिए गए तथ्यों में परस्पर क्या सम्बन्ध है तथा सम्पूर्ण परिस्थिति में उनका क्या महत्त्व है? इस पद में विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि कौनसे तथ्य अनावश्यक है तथा कौनसे आवश्यक है। इस प्रकार विद्यार्थी में समस्या का विश्लेषण करने की आदत पड़ जाएगी जो समस्या को सफलतापूर्वक हल करने के लिए अनिवार्य है। जिन विद्यार्थियों में समस्या का विश्लेषण करने की क्षमता का विकास नहीं होता है, वे समस्या को अधिकांशतः आत्मविश्वास के साथ हल नहीं कर सकते हैं।
(3.)सम्भावित हल खोजना - 
विश्लेषण के पश्चात विद्यार्थी यह भली प्रकार समझ सकेगा कि जो हल ज्ञात करना है उसे प्राप्त करने के लिए गणित के कौनसे नियम, सूत्र, सिद्धान्त आदि का प्रयोग आवश्यक है। यहां विद्यार्थी यह निर्णय कर सकेगा कि समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिए किस विशेष विधि को काम में लेना चाहिए तथा यदि कोई वैकल्पिक विधि हो तो उस पर वह विचार करेगा।
(4.)हल को प्राप्त करने के लिए सही गणना करना - 
कई बार विद्यार्थी हल करने की विधि को जानते हुए भी समस्या का सही उत्तर प्राप्त नहीं कर पाते हैं। वे गणना करने में बहुत साधारण सी त्रुटियां करते हैं। विद्यार्थियों में सही तथा शीघ्र करने की क्षमता का होना आवश्यक है। अध्यापक अलग से गणना करने का अभ्यास करा सकता है जिसमें गणना करने में विद्यार्थियों को कोई कठिनाई न हो। यह देखा गया है कि अधिकांश विद्यार्थी के गुणा तथा भाग करते समय त्रुटियां करते हैं।
(5.)समस्या का हल ज्ञात करना एवं पुन: जाँच करना :-
समस्या का हल ज्ञात करने के पश्चात प्रत्येक विद्यार्थी को उत्तर की पुन: जाँच करना चाहिए जिससे हल में गणना या विधि सम्बन्धी त्रुटियों को ठीक किया जा सके। विद्यार्थियों में उत्तर की पुन:जाँच करने की आदत होना आवश्यक है क्योंकि त्रुटियों को ढूँढ निकालना इसके बिना सम्भव नहीं है।।
3(5.)समस्या समाधान विधि के गुण -
(1.)समस्या के द्वारा हम विद्यार्थियों को जीवन से सम्बंधित परिस्थितियों की सही जानकारी दे सकते हैं। इस तरह गणित विषय के सामाजिक महत्त्व को हम कक्षा में प्रस्तुत कर सकते हैं
(2.)विद्यार्थी में समस्या का विश्ले विश्लेषण करने की क्षमता का विकास होता है तथा आवश्यक एवं अनावश्यक तथ्यों में विभेद कर सकता है। कभी-कभी समस्या में अपूर्ण तथ्य दिए होते हैं तथा इसका हल ज्ञात करना सम्भव नहीं। इसकी जानकारी समस्या के सही विश्लेषण पर निर्भर करती है।
(3.)बालकों में आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता का विकास होता है।
(4.)समस्या निवारण विधि के प्रयोग से विद्यार्थियों में समस्या से जूझने की आदत पड़ जाती है जो जीवन में सफलता की प्राप्ति के लिए आवश्यक है।
(5.)इस विधि से विद्यार्थियों में सही चिंतन तथा तर्क का समुचित प्रयोग करने की आदत पड़ जाती है।
(6.)उच्च गणित के अध्ययन में आवश्यक है।

4.दुनिया में सबसे कठिन प्रतियोगिता समस्या है - और आप इसे कैसे हल कर सकते हैं(The Toughest Competition Problem In The World  And How You Can Solve It)-

The Toughest Competition Problem In The World - And How You Can Solve It

The Toughest Competition Problem In The World - And How You Can Solve It

IMO समस्या 6 हल करने वाले छात्रों में से एक ने फील्ड्स मैथ्स में सबसे प्रतिष्ठित पदक- फील्ड्स जीता! गणित में कुछ कठिन समस्याएं सदियों से अनसुलझी हैं। इस लेख में समस्या को दूर-दूर तक ज्ञात ओलंपियाड समस्याओं में से एक के रूप में जाना जाता है। इसके बावजूद, यह केवल साढ़े चार घंटे तक अनसुलझा रहा। वह भी, इसे 11 हाई स्कूलर्स द्वारा हल किया गया था।
अंतर्राष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड (IMO) दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित गणित ओलंपियाड में से एक है। 100 से अधिक देशों ने प्रतियोगिता में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए 1-6 पूर्व-विश्वविद्यालय के छात्रों को भेजा, जिसमें दो दिनों के अंतराल में 6 समस्याओं का प्रयास किया जाता है। प्रतियोगिता में समस्याएं हाई स्कूल गणित पर आधारित हैं, और इस प्रकार "गणित की बुनियादी समझ के साथ किसी के लिए भी सुलभ है" - अगर आपको लगता है कि एएमसी कठिन था, तो ये प्रश्न आपके दिमाग को उड़ा देंगे।
IMO 1988 प्रश्न 6 एक प्रसिद्ध संख्या सिद्धांत समस्या है:
समस्या पहली बार में प्राथमिक लगती है, लेकिन अभिव्यक्ति के समाधानों की विशाल संख्या को देखने के बाद, आप महसूस करेंगे कि समस्या असहनीय है।
आज, उम्मीद है कि हम समस्या को हल करने में सक्षम होंगे और गणितज्ञों के छोटे समूह में शामिल होकर प्रश्न 6 को हरा सकते हैं!
समस्या के दृष्टिकोण के लिए, हमें समाधान की समरूपता पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि समाधान जोड़ी (ए, बी) समाधान जोड़ी (बी, ए) के समान ही मूल्यांकन करती है। इसका मतलब यह है कि हम मान सकते हैं कि एक assume बी।
अब, हमें दी गई जानकारी से एक समीकरण बनाने की जरूरत है:
निम्नलिखित संबंध भी उल्लेखनीय है:
इससे, हमारे पास एक दिलचस्प बीजगणितीय अभ्यास  है। वो दिखाओ:
इसके साथ, हम एक असमानता बना सकते हैं जो हमें एक सामान्य प्रकार के फ़ंक्शन को खोजने की अनुमति देगा जो समस्या का समाधान उत्पन्न करता है। हम अनुमान लगा सकते हैं कि kb - b <kb, और kb - b <a: के बाद से
हमें इस असमानता को साबित करने की जरूरत है। हमने पहले ही बाईं ओर दिखाया है, अब हमें दाईं ओर साबित करने की आवश्यकता है। (संकेत: विरोधाभास और उपरोक्त समीकरणों द्वारा एक प्रमाण का उपयोग करें)
इसके साथ, हम एक समीकरण बना सकते हैं जो kb के साथ समीकरण बनाता है, एक प्राकृतिक संख्या शेष r को घटाता है:
इस से, बीजीय हेरफेर का एक और मुकाबला देता है:
इस प्रकार:
हमने जो किया है वह किसी दिए गए k के लिए एक और समाधान युग्म (r, b) है। यह देखते हुए कि समाधान सममित-युग्म हैं (a, b) एक ही चीज़ का मूल्यांकन करते हैं जैसे समाधान युग्म (b, a) - हम (a, b) के मानों को बदल सकते हैं और फिर से r = kb - जब तक r = 0 , चूंकि 0≤r <b≤a।
जब हम अंततः r = 0 पर पहुंच जाते हैं, तो हम इसे उपरोक्त अभिव्यक्ति में स्थानापन्न कर सकते हैं:
हमने दिखाया है कि k = b², इस प्रकार k एक वर्ग संख्या है!
हालांकि यह प्रमाण विधि "सही" प्रमाण नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से आपको 1988 में उस प्रश्न पर वापस अंक देगा। आशा है कि आपको गणित के साथ अनुसरण करने में मज़ा आया!
Read more

Rosetta Stone of Mathematics

Rosetta Stone of Mathematics

1.गणित का रोसेटा स्टोन का परिचय (Introduction of Rosetta Stone of Mathematics)-

रोसेटा एक प्रकार का पत्थर है जो एक प्रकार का ग्रैनोयोराइट है जो सर्वप्रथम मिश्र में पाया गया था। इस पत्थर पर पुरालेख, चित्रलिपि अंकित की जाती थी। इस पर लिखना सुरक्षित तथा स्थायी रहता था। पुरोहितों के पक्ष को सुरक्षित रखने के लिए भी राजा इनका उपयोग किया करते थे। प्राचीन मंदिर के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। शिलालेख के रूप में भी इसका उपयोग जाता था। तकनीकी विशेषज्ञों ने भी पत्थर पर ग्रंथों की प्रतियां बनाने के तरीके अपनाए। फ्रांसीसी से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य की दास्तान रोसेटा स्टोन पर पाई जाती है। 
विभिन्न प्राचीन द्विभाषी या यहां तक कि त्रिभाषी दस्तावेजों को रोसेटा पत्थरों पर वर्णित किया गया है। उदाहरणार्थ ग्रीको-बैक्ट्रियन राजा अगाथोकल्स के द्विभाषी ग्रीक-ब्राह्मण सिक्कों को "छोटे रोसेटा पत्थरों" के रूप में वर्णित किया गया है, जिससे ईसाई गैसेन द्वारा ब्राह्मीलिपि के पतन की दिशा में पहले कदम को सुरक्षित करने की अनुमति मिली। 
बेस्तुईन शिलालेख की तुलना रोसेटा पत्थर से की गई है क्योंकि यह तीन प्राचीन मध्यपूर्वी भाषाओं के अनुवाद से जोड़ता है :पुरानी फारसी, एलामाइट और बेबीलोनियन। 
रोसेटा पत्थर शब्द का उपयोग मुहावरेदार तरीके से कूटबद्ध जानकारी के वर्णन की प्रक्रिया में एक महत्तवपूर्ण कुंजी का प्रतिनिधित्व करने के लिए होने लगा, खासकर जब एक छोटा लेकिन प्रतिनिधि नमूना, एक बड़े पूरे को समझने के लिए सुराग के रूप में पहचाना जाता है। इस प्रकार इसका आलंकारिक उपयोग होने लगा तब से इस शब्द का अन्य संदर्भों में व्यापक उपयोग किया जाता है। जैसे हैन्शेक ने लिखा है कि "हाइड्रोजन परमाणुओं का स्पैक्ट्रम आधुनिक भौतिकी का रोसेटा स्टोन साबित हुआ है। इसी तरह मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन के जीन के प्रमुख सेट को" रोसेटा स्टोन आॅफ इम्यूनोलाॅजी "के रूप में किया गया। रोसेटा स्टोन, रोसेटा स्टोन इंक द्वारा प्रकाशित भाषा शिक्षण साॅफ्टवेयर का एक ब्रांड है, जिसका मुख्यालय अमेरिका के अर्लिंग्टन काउंटी में है। "रोसेटा" एक "लाइटवेट डायनेमिक ट्रांसलेटर" का नाम है, जो पावर पी सी के लिए संकलित अनुप्रयोगों को x86 प्रोसेसर का उपयोग करके Apple सिस्टम पर चलाने में सक्षम बनाता है। "रोजेटा" एक "लाइटवेट आॅनलाईन भाषा अनुवाद उपकरण है, जो लाॅन्चपैड प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में कैनोनिकल द्वारा विकसित और रखरखाव किए गए साॅफ्टवेयर के स्थायीकरण में मदद करता है। 

3.रोसेटा स्टोन आॅफ मैथमेटिक्स (Rosetta Stone Mathematics) - 

लैंगलैडस एक कार्यक्रम है जो गणित के विभिन्न विषय क्षेत्रों के बीच संबंध स्थापित करने की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है। इस कार्यक्रम का जन्म प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेकिट्स राबर्ट लैंगलैडस द्वारा हुआ। यह कार्यक्रम परस्पर जुड़े तथ्यों, सुझावों और रिश्तों का अलग संग्रह है जो कहीं ओर अधिक अपरिभाषित है।। पश्चात दुनियाभर के गणितज्ञों के सहयोगात्मक प्रयास से यह बनाया गया है। गणित के विभिन्न उप-विषयों के बीच संबंध को पूरी तरह से असंबंधित माना जाता है। लैंगलैडस कार्यक्रम इनको संबंधित करने का काम करता है इसलिए लैंगलैडस कार्यक्रम की तुलना रोसेटा स्टोन से की जाती है। यह कार्यक्रम एक भाषाओं की समस्याओं को दूसरे की अवधारणाओं में अनुवाद करने में सक्षम बनाता है। यदि आप चाहते हैं कि एक दुनिया के दृष्टिकोण को दूसरी दुनिया के दृष्टिकोण से संबंधित करने तथा कठिन प्रश्नों को हल करने में लगा सकते हैं। 
यदि यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो इसे अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें ।यदि आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।
Rosetta Stone of Mathematics

Rosetta Stone of Mathematics

कई लोग, विशेष रूप से कॉलेज के छात्रों को, जो इसे प्रस्तुत करने के कारण गणित की सराहना करने के लिए चुनौती दे सकते हैं: टूलकिट में सुंदरता को देखना मुश्किल है। लेकिन गणित केवल साधनों का एक सेट नहीं है, यह अपने आप में एक संस्था भी है, जो बहुत ही गहनता के साथ समृद्ध है। एक भाषा की तरह, यह अपने सभी हिस्सों के बीच एक रंगीन और जटिल परस्पर क्रिया है - और हमने इसका अनुवाद करने में सक्षम होने में एक बड़ी छलांग ली है।
यह छलांग लैंगलैंड्स कार्यक्रम द्वारा बनाई गई थी, जो गणित के विषम क्षेत्रों के बीच आश्चर्यजनक संबंध बनाने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। कार्यक्रम का जन्म पचास साल पहले प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर एमेरिटस रॉबर्ट लैंगलैंड्स द्वारा हस्तलिखित पत्र के रूप में हुआ था। तब से, यह उनमें से एक जटिल नेटवर्क में एक एकल अनुमान से विकसित किया गया है - और हाल ही में नोबेल के गणित के बराबर लैंगलैंड्स एबेल पुरस्कार जीता है। एक गणितीय भौतिक विज्ञानी और लैंगलैंड के एक सहकर्मी रॉबर्ट डीजकग्राफ बताते हैं, "इस तरह का गणितीय’ कार्यक्रम 'परस्पर जुड़े तथ्यों, सुझावों और रिश्तों का एक अलग संग्रह है, जो कि कहीं अधिक और अपरिभाषित है। " "कुछ हिस्से सिद्ध होते हैं, अन्य केवल अनुमान होते हैं, और किसी को भी नहीं पता कि दृष्टि कितनी दूर तक फैली हुई है।"
एक भाषा की तरह, यह अपने सभी हिस्सों के बीच एक रंगीन और जटिल परस्पर क्रिया है - और हमने इसका अनुवाद करने में सक्षम होने में एक बड़ी छलांग ली है।
लैंगलैंड्स ने पहले 1967 में प्रख्यात गणितज्ञ आंद्रे वेइल को लिखे एक पत्र में अपने विचार का प्रस्ताव रखा, फिर बाद में इसे 1970 के अपने प्रकाशन समस्याएँ थ्योरी ऑफ़ ऑटोमोर्फिक फॉर्म्स में ठोस कर दिया। यहां तक ​​कि वह अपने विचारों को दूरगामी प्रभाव का अनुमान नहीं लगा सकता था: "बाद में मैंने इसे लिखा," उन्होंने बाद में अपने 1967 पत्र के बारे में कहा, "मुझे एहसास हुआ कि इसमें शायद ही कोई बयान था, जिसके बारे में मैं निश्चित था।" फिर, यह दुनिया भर के गणितज्ञों के सहयोगात्मक प्रयासों द्वारा बनाया गया है, गणित के विषयों के बीच अभूतपूर्व संबंध को पूरी तरह से असंबंधित माना जाता है। इन कनेक्शनों की अवधि इतनी विशाल है - इसे कमाई करने वाला "गणित का भव्य एकीकृत सिद्धांत" - कि यहां तक ​​कि जो लोग इसके साथ मिलकर काम करते हैं, वह इसके व्यापक पैमाने और गहनता को समझने के लिए संघर्ष करते हैं। "यह लगभग आप पुरातत्वविद् हैं और आप रेगिस्तान में एक पत्थर खोदते हैं - और यह पिरामिड के शीर्ष पर निकलता है," डिजजराफ ने वैज्ञानिक अमेरिकी को बताया।

3.लैंगलैंड्स कार्यक्रम की तुलना एक आधुनिक गणितीय रोसेटा स्टोन (Langlands program comparing a Modern Mathematical Rosetta Stone)-

Rosetta Stone of Mathematics

Rosetta Stone,Rosetta Stone of Mathematics

कार्यक्रम की तुलना एक आधुनिक गणितीय रोसेटा स्टोन से की गई है: जहां मूल कलाकृतियों में तीन भाषाओं में एक ही लिखित मार्ग शामिल था, लैंगलैंड्स कार्यक्रम में कुछ गणितीय घटनाएं शामिल हैं जिन्हें बेतहाशा अलग-अलग गणितीय उपक्षेत्रों से दृष्टिकोण का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है। लैंगलैंड की होम इंस्टीट्यूट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी के लिए एक लेख में डीजकग्राफ लिखा है, "इस तरह के शब्दकोश की खोज बेहद मूल्यवान है," क्योंकि यह एक भाषा की समस्याओं को दूसरे की अवधारणाओं में अनुवाद करने में सक्षम बनाता है। यदि आप भाग्यशाली हैं, तो एक दुनिया के दृष्टिकोण और उपकरणों का उपयोग दूसरी दुनिया के एक कठिन प्रश्न को हल करने के लिए किया जा सकता है। ”वास्तव में, इस कारण यह परियोजना इतनी भयावह है: यह गणितज्ञों को नए अविष्कारों के साथ प्रतीत होता है, गणितीय खोज को रोके हुए है। आगे।
कई गणितज्ञों को लैंगलैंड्स कार्यक्रम के साथ अपने काम से संभव हुई खोजों के लिए पहचाना गया है, जो गणित के अन्य क्षेत्रों से उधार ली गई पुरानी समस्याओं के लिए नए दृष्टिकोणों का खुलासा करते हैं। सबसे प्रसिद्ध रूप से, कार्यक्रम में शामिल होने से ब्रिटिश संख्या सिद्धांतकार एंड्रयू विल्स ने फ़र्मेट के अंतिम प्रमेय को हल करने की अनुमति दी, 2016 में विल्स द एबेल पुरस्कार अर्जित किया।
ऐसा लगता है कि संख्या सिद्धांत की संभावना नहीं है, जहां संख्याएं अक्सर बिना सुव्यवस्थित क्रम के होती हैं, उन्हें हार्मोनिक विश्लेषण से निकटता से जोड़ा जा सकता है, जो निरंतर घटता और सुरुचिपूर्ण समरूपता की विशेषता है।
लैंगलैंड्स कार्यक्रम द्वारा स्थापित सबसे महत्वपूर्ण कनेक्शन हार्मोनिक विश्लेषण और संख्या सिद्धांत के बीच किए गए थे। हार्मोनिक विश्लेषण बहुत व्यापक रूप से आवधिक तरंगों का अध्ययन है, जिनमें से साइन लहरें एक परिचित उदाहरण हैं। ऑटोमोर्फिक रूप आवधिक तरंगों की गणितीय अवधारणा का एक सामान्यीकरण है, लेकिन अधिक ज्यामितीय रूप से जटिल हैं। संख्या सिद्धांत के क्षेत्र में काम पर जाना, संख्याओं की विशेषताओं का अध्ययन, संख्याओं के बीच संबंधों में कई समरूपता का पता चलता है: उदाहरण के लिए, बहुपद समीकरणों के समाधान एक निश्चित समरूपता दिखाते हैं, कभी-कभी प्रत्येक संभव समाधान दूसरे से ही मिलते हैं। एक संकेत परिवर्तन द्वारा। इन सममित संबंधों की तालिका को एक गॉलोज समूह कहा जाता है, जिसका नाम उन्नीसवीं सदी के फ्रांसीसी गणितज्ञ इवारिसिस्ट गाल्वा के नाम पर रखा गया है।लैंगलैंड्स कार्यक्रम में इन दो असमान घटनाओं के एक आकर्षक अभिसरण का पता चलता है, और उस पर एक अप्रत्याशित: यह संभावना नहीं लगती कि संख्या सिद्धांत, जहां संख्याएं अक्सर बिना सुव्यवस्थित क्रम के होती हैं, उन्हें हार्मोनिक विश्लेषण से इतनी निकटता से जोड़ा जा सकता है, जो निरंतर घटता की विशेषता है। और सुरुचिपूर्ण समरूपता।
इस संबंध का एक विशिष्ट उदाहरण बहुपद समीकरण का एक प्रकार है जिसे अण्डाकार वक्र कहा जाता है। मॉड्यूलरिटी प्रमेय के अनुसार, एक दीर्घवृत्त वक्र पर बिंदुओं की संख्या को गिनकर, जहां आप उस बिंदु को एक प्रमुख संख्या से माप सकते हैं, आप संख्याओं का एक क्रम बनाते हैं। इस अनुक्रम को एक पूरी तरह से अलग प्रकार की गणितीय वस्तु द्वारा दोहराया जा सकता है - मॉड्यूलर वक्र - जो एक आवधिक लहर द्वारा अनुमानित (बहुत मोटे तौर पर) हो सकता है, इसे हार्मोनिक विश्लेषण के दायरे में दृढ़ता से और अप्रत्याशित रूप से रख सकता है।
डेजकग्राफ लैंगलैंड के काम की तुलना अंधे आदमियों और हाथी के दृष्टांत से करता है: एक आदमी एक पैर को महसूस करता है और इसे एक पेड़ कहता है; एक और आदमी ट्रंक महसूस करता है और इसे एक साँप कहता है; एक कान पंखा हो जाता है, एक फंदा दीवार बन जाता है। लेकिन लैंगलैंड्स ने एक हाथी के साथ मिलकर पाइक किया, और अन्य गणितज्ञ हर दृष्टि से उसकी दृष्टि का उपयोग और विस्तार करते रहे हैं। गणित में अनसुलझी समस्याओं की एक भीड़ है जो जिज्ञासु दिमागों से अपने सच्चे झुकाव को ढालना जारी रखती है। जैसे-जैसे लैंगलैंड्स का कार्यक्रम बढ़ता जा रहा है, कौन जानता है कि नई अंतर्दृष्टि क्या मिल सकती है, गणितीय रहस्यों को सुलझाने में एक समय में एक अप्रभावित कनेक्शन में नए अंतर्द्वंद पैदा करते हैं।

  • और, उनके ग्राउंडब्रेकिंग प्रोजेक्ट के अकादमिक प्रभाव की तुलना में मामूली महत्व के लिए, लैंगलैंड अब $ 775,000 से अधिक अमीर है।
Read more

Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

1.ड्राइंग मैथ इन द स्काई: मानसिक गणित विज़ुअलाइज़ेशन का परिचय (Introduction of Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि कल्पना के द्वारा तथा मानसिक गणित से हम हमारी क्षमताओं, योग्यताओं तथा प्रतिभा को विकसित व उन्नत कर सकते हैं आवश्यकता है सही दिशा व मार्गदर्शन की।
हमारे मस्तिष्क में कई प्रकार की कल्पना उठती है लेकिन सार्थ व उचित कल्पना सही दिशा और मार्गदर्शन से पल्लवित होती है। मानसिक गणित एक ऐसा विषय है जिसमें विद्यार्थियों को गणित के तथ्यों, सिद्धान्तों, सूत्रों एवं निष्कर्षों के सम्बन्ध में चिन्तन करना पड़ता है तथा समस्या के हल के विभिन्न पदों के द्वारा निश्चय करना पड़ता है।
गणित का सम्पूर्ण क्षेत्र चिन्तन, मनन, कल्पना व अध्ययन करने की अपेक्षा रखता है। मानसिक गणित से तात्पर्य उन गणनाओं से है जो किसी समस्या को हल करते समय विद्यार्थी बिना लिखे अपने मस्तिष्क में करता है और मस्तिष्क में ही उसका हल ज्ञात कर लेता है। हम हमारे दैनिक जीवन में बहुत से ऐसी गणनाएं करते हैं जिनका मानसिक स्तर पर हल ज्ञात कर लेते हैं तथा उन्हें लिखकर ज्ञात करने की आवश्यकता नहीं होती है। अभ्यास एवं दक्षता से विद्यार्थियों में मानसिक गणित करने की क्षमता का विकास होता है। मौखिक और मानसिक गणित में यह अन्तर होता है कि मौखिक गणनाओं में गणना करने का स्तर सामान्य होता है जबकि मानसिक गणित में गणनाओं का बौद्धिक स्तर उच्च होता है। जैसे सामान्य जोड़, गुणा, भाग, बाकी की क्रियाएं करना सामान्य गणना है तथा किसी प्रश्न का हल करना या कुछ पदों को मानसिक स्तर पर ही हल कर लेना उच्च बौद्धिक स्तर होता है। प्रखर बुद्धि वाले विद्यार्थी समस्याओं को हल करते समय अनेक पदों को बिना लिखे मानसिक स्तर पर हल कर लेते हैं तथा समस्याओं का हल शीघ्रता से ज्ञात कर लेते हैं।
मानसिक गणित का तात्पर्य यह नहीं है कि यन्त्रवत हल कर लेना जैसे पहाड़े याद कर लेते हैं और उनको यन्त्रवत बोल देते हैं तो यह मानसिक गणित की श्रेणी में नहीं आता है। मानसिक गणना करने में पूर्व ज्ञान तो सहायक होता है परन्तु जब गणना या हल करने में बुद्धि, चिन्तन, मनन, तर्क-शक्ति तथा एकाग्रता का सहारा लिया जाता है तो सच्चे अर्थों में वही मानसिक गणित होती है।
बीजगणित का आधार अंकगणित है। बीजगणित में अमूर्त संकेतों को समझकर, मानसिक गणना करने की आवश्यकता होती है क्योंकि अनेक अंकगणितीय चरणों को मानसिक स्तर पर गणना बीजगणितीय सिद्धान्तों के सन्दर्भ में करना पड़ता है।
मानसिक गणित की सहायता से विद्यार्थियों को गणित सीखने में सहायता मिलती है। उच्च गणित में अनेक गणनाओं को लिखकर समझने के लिए समय उपलब्ध नहीं होता है तथा अध्यापक के लिए भी कक्षा में प्रत्येक पद को लिखकर समझाना सम्भव नहीं होता है।

2.मानसिक गणित करने के लाभ (Advantage to Do Mental Mathematics) -

(1.)मानसिक गणित से गणित का Test लेने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो जाता है जिससे विद्यार्थियों की उचित परख हो जाती है।
(2)मानसिक गणित से पर्याप्त समय मिल जाता है अतः गणित की पुनरावृत्ति हो जाती है।
(3.)मानसिक गणित के द्वारा ही हम गणित का दैनिक जीवन में उपयोग कर पाते हैं।
(4.)मानसिक गणित के द्वारा ही विद्यार्थी की बुद्धि प्रखर, तेज तथा शीघ्र कार्य करनेवाली हो जाती है।
(5.)लिखित कार्य के पूरक के रूप में इसका उपयोग अधिक फलप्रद होता है।
(6.)लिखित कार्य में निपुणता लाने के लिए मानसिक गणित की आवश्यकता है।
(7.)मानसिक गणित का अभ्यास कराने से विद्यार्थी में आत्मविश्वास की वृद्धि होती है जिससे लिखित कार्य को करने में आसानी रहती है।

3.सावधानियाँ (Precautions) -

(1.)प्रारम्भ में मानसिक कार्य का आधार विद्यार्थी का पूर्वज्ञान होना चाहिए।
(2.)मानसिक कार्य स्पष्ट, निश्चित तथा क्रमानुसार होने चाहिए।
(3.)मानसिक कार्य इस प्रकार देना चाहिए जिससे पदानुक्रम से विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमता, विवेक, चिन्तन, मनन व तर्क-शक्ति को बढ़ाने में प्रोत्साहन मिले।
(4.)विद्यार्थियों को केवल मानसिक कार्य ही नहीं देना चाहिए बल्कि उसके साथ लिखित कार्य भी देना चाहिए क्योंकि मानसिक कार्य लिखित कार्य का पूरक है।

4.ड्राइंग मैथ इन द स्काई: मानसिक गणित विज़ुअलाइज़ेशन(Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization)-

Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

दिन के मेरे पसंदीदा हिस्सों में से एक मेरी 5 साल की बेटी के साथ सोते समय नीचे हवा है।
हम उसके बिस्तर में लेट गए, कुछ किताबें पढ़ने के बाद, रोशनी बंद कर दी, और हम अभी बात करते हैं। कभी-कभी हम मूर्खतापूर्ण चीजों के बारे में बात करते हैं, उस दिन हमने जो चीजें की थीं, और जो हम आगे देख रहे थे। कभी-कभी बहुत सारी बातें नहीं होती हैं। बस एक-दूसरे की कंपनी में मेरी बेटी के रूप में झूठ बोलना, जन्म के बाद से उसे प्यार करती है, हाथ पकड़े हुए, और बेडरूम के माध्यम से उसके ह्यूमिडीफ़ायर के सफेद शोर को सुनकर प्यार करता है।
एक रात जब हमने इस रस्म को निभाया, तो उसकी बाँह उठी, तर्जनी उठाई, और उसने खींचना शुरू किया। वह सांस रोक रही थी, और मुझे एहसास हुआ कि वह शब्दों की वर्तनी थी।
"क्या आप भी ऐसा करते हैं, माँ?" उसने मुझसे पूछा। “मैं ऐसा करने में मदद करता हूं ताकि मैं सो जाऊं। मैं आकाश में शब्द लिखता हूं। घड़ी। जब मैं उन्हें लिखता हूं, तो आप एक निशान देख सकते हैं। ”
मंद शाम की रोशनी में जो उसकी खिड़की से रिस रही थी, उसने अपना नाम लिखना शुरू कर दिया। मैंने देखा और उसकी केंद्रित साँसें सुनीं, उसकी बाँह आकाश को चीरती हुई - और मैं उसकी नकल करने लगा।
मैंने अपना नाम लिखना शुरू कर दिया, और अजीब तरह से - हाँ। मैं एक राह देख सकता था; लगभग जहाँ मैंने अपने हवाई लेखन में हवा को दूर धकेल दिया था - जहाँ एक 'निशान' देखा जा सकता था।
"मैं इसे आकाश लेखन, मॉम कहता हूं।"
मेरी बेटी ‘आकाश लेखन’।
मैं उसकी लिखी हुई तस्वीरों को उसकी लिखी तस्वीरों के लिए देखता था। कभी उसने वाक्य लिखे, तो कभी उसने सिर्फ शब्द लिखे। दोस्तों के नाम, जानवर - और जो कुछ वह लिख रहा था उसके छोटे-छोटे रेखाचित्र। हर बार मैंने खुद को पूरी तरह से देखा कि वह क्या बना रही थी। मैं उसकी लिखावट को उसके शब्दों में देख सकता था, उसके द्वारा खींची गई तस्वीरों का विवरण - कुछ सेकंड के लिए हवा में लटका रहा।
मेरी बेटी किसी चीज़ पर थी।
मेरा दिमाग दौड़ने लगा। क्या मैं आकाश में गणित आकर्षित कर सकता हूं? क्या यह एक ऐसा उपकरण हो सकता है जिसे छात्र अपने दिमाग में संख्याओं को रखने के दौरान इस्तेमाल कर सकते हैं? अपने विचारों को ट्रेस करना और रखना - इसलिए वे उनके चारों ओर तैरते हैं? अचानक कोई सपाट सतह नहीं थी; मैं प्रिज्म ट्रेस कर सकता था। मैं अपने विचारों को अपने आसपास लपेट सकता था। मैं तिरछे, लंबवत लिख सकता था; मेरे दिमाग में छवि मेरे आकाश ड्राइंग से मेल खाती है।
"क्या आप अलग-अलग तरीकों से 7 सर्कल बना सकते हैं?" उसकी प्रतिक्रिया नहीं जानती।
"ज़रूर!"
वह छोटे घेरे खींचने लगी; प्रत्येक रंग में। उसने अपने स्थान के बाईं ओर 7 के एक समूह को समूहित किया, फिर दाईं ओर दूसरे समूह को।
"देखें?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
मैंने उसकी अच्छी रात को चूमा, हमारे आकाश के ड्राइंग के बाद कमरे को छोड़ दिया, और सोचना जारी रखा।यहां मेरी 5 साल की उम्र थी - उसकी कल्पना करने में मदद करने के लिए एक उपकरण की पहचान करना और उसे ढूंढना। वह अपने पत्रों को प्रदर्शित करने के लिए, और, जब मैंने उनसे, संख्याओं के बारे में पूछा तो वह अपने लिए एक रणनीति ढूंढ रही थी।
मैंने खुद उस रात बिस्तर में लेट गया। मैंने सरल बेस टेन ब्लॉक्स को आकर्षित किया - और पाया कि बस उन्हें हवा में खींचना, उनके बारे में सोचना, लगभग मेरी मानसिक गणित को एक दृश्य एंकर तक निर्देशित करने में मदद की।
Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

Drawing Mathematics in the Sky: Mental Mathematics Visualization

मेरे सामने एक सवाल आया: क्या "स्काई ड्राइंग" आपके दिमाग में अधिक जानकारी रखने में सक्षम हो सकता है? मैं मानसिक गणित के संदर्भ में सोच रहा था - मुझे लगता है कि कई लोग मानसिक गणित के साथ संघर्ष करते हैं क्योंकि किसी को अलग-अलग कार्यों और संख्याओं को पकड़ना पड़ता है, और आप उन संख्याओं के लिए क्या प्रक्रिया कर रहे हैं, एक निश्चित समय के लिए - और सहज महसूस करते हैं तुम क्या पकड़े हो बच्चों को पढ़ाना आकाश ड्राइंग एक पहला मसौदा हो सकता है; एक जगह सुरक्षित रूप से आने के बिना कल्पना करने के लिए? क्या यह उन छात्रों की मदद करेगा जो अपनी गणित सोच को साझा करने, बात करने और पुष्टि करने के लिए संघर्ष करते हैं? क्या यह मजबूत गणित की बात को आगे बढ़ा सकता है और इसलिए, मजबूत गणित समस्या को हल कर सकता है?
मैं अपने छात्रों के लिए इसे लाने पर बहस कर रहा हूं - क्या आपको किसी साथी या मित्र से बात करने से पहले अपने दिमाग में गणित पर विचार करने के लिए एक रणनीति, समय की आवश्यकता है? इससे पहले कि आप भी अधिक स्थायी सतह पर विचारों के साथ खेलना शुरू कर दें?
क्या math स्काई ड्राइंग ’मजबूत गणित की पहचान के लिए एक छलांग हो सकती है?
10 अप्रैल अपडेट:
मुझे बस जोड़ना था! आज रात मेरी बेटी और मैं फिर से आकाश आरेखण कर रहे थे, और इस बार उसने आकृतियाँ बनाना शुरू किया। मैंने देखा कि उसने एक छोटी आयत शुरू की है, और आयत को बड़ा और बड़ा करना है।
"देखो! मैं आयत को सर्पिल कर रहा हूँ! "
मैंने तब उसकी आयत के केंद्र को 'धकेल दिया', और हम दोनों ने एक मूर्खतापूर्ण विस्फोट किया, और हमने आयत के नीचे जाने की कल्पना की।
मैं सुनिश्चित करने के लिए और अधिक शोध करूंगा - देखते रहिए।
Read more

what are the duties of parents for children in hindi || what are the duties of guardian for children


what are the duties of parents for children in hindi || what are the duties of guardian for children



via https://youtu.be/_P0icL8guvU
Read more

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

1.सम्मिश्र डोमेन में प्राइम नंबर वास्तव में काफी सरल हैं का परिचय (Introduction of Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple)-
इस आर्टिकल में अभाज्य संख्याओं के और सम्मिश्र संख्याओं के बारे में बताया गया है।

(1.)अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) -

वे पूर्ण संख्याएँ जिनके स्वयं और 1 के अतिरिक्त कोई गुणनखण्ड नहीं होते हैं अर्थात् जो संख्याएं केवल 1 से व स्वयं से विभाजित होती हो तथा अन्य किसी भी संख्या से विभाजित न होती हो अभाज्य संख्याएँ कहलाती है। संख्या 1 न तो भाज्य संख्या है और न अभाज्य संख्या है। ऐसी संख्या जो अभाज्य संख्या हो सम संख्या हो वह केवल 2 है। वे दो अभाज्य संख्याएँ जिनके बीच केवल एक सम संख्या होती है अभाज्य जोड़ा कहलाती है जैसे 5 व 7,3व 5,11व 13, 17व 19,29 व 31इत्यादि।

(2.)सह-अभाज्य संख्याएँ (Co-Prime Numbers) -

दो संख्याएँ जिनमें 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड न हो अर्थात् जिसमें 1 के अतिरिक्त स्वयं से विभाजित होने के अतिरिक्त अलग-अलग किसी अन्य संख्या से विभाजित हो सकती हो परन्तु दोनों केवल 1 से विभाजित हो तो ऐसी संख्याएँ सह-अभाज्य संख्याएँ कहलाती है।

(3.)सम्मिश्र संख्याएँ (Complex Numbers) -

  सम्मिश्र संख्याओं का जनक वास्तविक संख्याएँ होती है। इसलिए सम्मिश्र संख्याओं का अध्ययन करने से पूर्व पाठक को वास्तविक संख्याओं तथा उसके गुणधर्मों जैसे क्रमीकरण, उच्चक, निम्नक, पूर्णता आदि के बारे में परिचित हो जाना चाहिए। सम्मिश्र संख्याओं पर कई प्रकार से विचार किया जाता है। (1.)एक क्षेत्र के अवयव के रूप में (2.)एक समतल के बिन्दु के रूप में (3.)एक द्विविम सदिश के रूप में। तीनों ही रूप में सम्मिश्र संख्या निकाय अपने जनक वास्तविक संख्या निकाय से मिलते जुलते है।
इसका साधारण उदाहरण है x^2+1=0।इस प्रकार के बहुपद का हल ज्ञात करने के लिए ऐसे क्षेत्र की खोज की जाए जिसमें Rअन्तर्विष्ट हो तथा बीजत: संवृत्त (Algebraiccally closed) हो। ऐसा क्षेत्र जो उपर्युक्त प्रतिबन्धों को सन्तुष्ट करता है, R का विस्तार क्षेत्र कहलाता है। इसे C से व्यक्त करते हैं और यह सम्मिश्र संख्याओं का क्षेत्र कहलाता है। इसे C से व्यक्त करते हैं और यह सम्मिश्र संख्याओं का क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र के अवयवों को सबसे सरल तथा युक्ति संगत माँग में वास्तविक संख्याओं के क्रम युग्म (Ordered Pairs) से व्यक्त करते हैं अर्थात् C=R x R
यदि यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें ।यदि आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।हम आपके लिए इसी प्रकार के टाॅपिक ढूँढकर लाते हैं इसलिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.सम्मिश्र  डोमेन में प्राइम नंबर वास्तव में काफी सरल हैं(Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple)-

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

Q (√−35) के बीजगणितीय पूर्णांकों की वलय  में कुछ प्राइम्स। बाईं ओर खोखली हरी बिंदी −5 है, सबसे बायीं पूर्ण सियान बिंदी /9/2 + (√−35)/2 है। यह आरेख अलोनसो डेल अर्टे द्वारा जावा प्रोग्राम के संस्करण 0.95 द्वारा निर्मित किया गया था।
एक से अधिक मौकों पर मैंने कहा है कि तथाकथित "सम्मिश्र " संख्याएँ बिल्कुल भी सम्मिश्र नहीं हैं।
ऐसा ही एक अवसर था जब मैं अपने प्रशिक्षक और सहपाठियों को इंटीग्रेट डेट्रायट में अपने जावा कार्यक्रम को दिखा रहा था जो द्विघात काल्पनिक रिंगों में अभाज्य संख्याओं के आरेख बनाता है।
"हम क्या देख रहे हैं?" वॉन वॉकर, मेरे सहपाठियों में से एक ने पूछा (हमने कुछ सप्ताह पहले स्नातक किया था)। यह एक वैध प्रश्न था जिसे मैंने ठीक से संबोधित नहीं किया था। हालांकि मुझे लगता है कि मैं कम से कम यह कह सकता था कि इसे सम्मिश्र समतल  में अभाज्य संख्याओं के साथ करना है।
यह कुछ ऐसा नहीं है जिसे मैं 30 सेकंड या उससे कम समय में समझा सकता हूं। और यहां तक ​​कि अगर मैं इसे इतने कम समय में समझा सकता हूं, तो स्पष्टीकरण में अभी भी कुछ बुनियादी गणित पृष्ठभूमि की आवश्यकता होती है जो स्पष्टीकरण सुनने वाले व्यक्ति को हाई स्कूल गणित से याद नहीं हो सकती है।
या बिल्कुल भी नहीं पढ़ाया गया होगा। अब मैं उस पृष्ठभूमि का संक्षिप्त विवरण देने की कोशिश करूँगा और फिर यह स्पष्टीकरण कि यह क्या है कि मेरा जावा प्रोग्राम चित्र बनाता है।
मैं इसे 30 सेकंड में समझा नहीं सकता, लेकिन शायद मैं इसे 30 मिनट में समझा सकता हूं। अगर मैं इसे अच्छी तरह से समझाता हूं, तो आप यह सोचकर दूर चले जाएंगे कि हालांकि यह एक अपरिचित अवधारणा है, यह वास्तव में काफी सरल है।

3.अभाज्य सँख्या(Prime numbers)-

उम्मीद है कि यह पढ़ने वाला हर कोई जानता है कि सम्मिश्र संख्याएं क्या हैं, और कम से कम मूल परिभाषा को जानता है। लेकिन यहां भी कुछ अपरिचित बारीकियां हैं।
Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

पूर्णांकों का डोमेन,…, −3, ,2, ,1, 0, 1, 2, 3,… को गणितज्ञों द्वारा Z (एक बोल्ड कैपिटल जेड, एक ब्लैकबोर्ड बोल्ड जेड का उपयोग भी किया जा सकता है) के रूप में नोट किया गया है।
Z में एक नंबर p, −1 या 1 के अलावा, एक अभाज्य संख्या है, यदि यह केवल −p,1और p से ही विभाज्य है, और Z से कोई अन्य पूर्णांक नहीं है। उदाहरण के लिए, -103 इसलिए प्राइम है क्योंकि यह केवल विभाज्य है -103, −1, 1 और 103 तक।
एक मजबूत परिभाषा के लिए यह आवश्यक है कि यदि p ,a × b (या ab को विभाजित करता है, जैसा कि गणितज्ञ इसे लिखना पसंद करते हैं),  तोa या  b को p से विभाज्य होना चाहिए (वे दोनों p से विभाज्य हो सकते हैं, महत्वपूर्ण बात यह है कि कम से कम उनमें से एक है)।
उदाहरण के लिए, 2 एक अभाज्य संख्या है, क्योंकि a और b के किसी भी संभावित विकल्प के लिए ऐसा है कि ab एक सम संख्या है, हम पाएंगे कि या तो a या b सम भी है, शायद दोनों।
उदाहरण के लिए, −2 × −7 = 14, जो 2 से विभाज्य है, और यद्यपि −7, 2 या −2   से विभाज्य नहीं है। एक बिल्कुल आसान और स्पष्ट तथ्य।
इसके विपरीत, हम देखते हैं कि 4 एक अभाज्य संख्या नहीं है, उदाहरण के लिए, हालाँकि 2 × 14 = 28 ,4 से विभाज्य है, न तो 2 और न ही 14 ,4 से विभाज्य है।
यह अभी भी आवश्यक है कि p, −1 या 1 न हो। भले ही हम इनमें से किस परिभाषा के अनुसार चलें, 1 एक अभाज्य संख्या नहीं है। यह पूरी तरह से उन संख्याओं के आंतरिक गुणों के कारण है, न कि सामान्य रूप से अज्ञात कारणों के लिए जो आमतौर पर ट्राउट किए गए हैं।
बात यह है कि −1 और 1 इकाइयाँ हैं। इकाइयों द्वारा गुणा करने से अलग-अलग कारक नहीं बनते हैं।
उदाहरण के लिए −28 का अभाज्य गुणनखण्ड , 2² × (−7) or (−1) × 2² × 7 or (−2)² × −7 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है या जो भी अन्य संयोजन हमें −28 देगा, लेकिन वे सभी को हमारे चयन के एक विहित रूप में उबाला जा सकता है।
यह अद्वितीय कारक का सिद्धांत है, और इसका मतलब है कि Z एक अद्वितीय कारक है। विहित रूप एक मानव आविष्कार है, जो हमारे सनक पर परिवर्तन के अधीन है, लेकिन अंतर्निहित सिद्धांत शाश्वत है।
अभाज्य संख्याओं के लिए यहाँ दी गई पहली परिभाषा वास्तव में अप्रासंगिक संख्याओं के लिए एक परिभाषा है, जो कुछ डोमेन में वास्तव में दूसरी परिभाषा के अनुसार नहीं हो सकती है। कम से कम Z में, यह एक अंतर के बिना एक अंतर है।

4.बीजगणितीय पूर्णांक(Algebraic integers)-

आप उच्च विद्यालय बीजगणित में सरल द्विघात समीकरणों को हल करने की अस्पष्ट याद रख सकते हैं। समीकरण जैसे x² - 2 = 0।
आप शायद पहले से ही उस एक का जवाब जानते हैं, लेकिन हो सकता है कि होमवर्क या परीक्षा के संदर्भ में आपको कदम दिखाने की उम्मीद की गई हो।
तो शायद पहले आप दोनों पक्षों को 2 जोड़ते हैं, समीकरण को x² = 2 में बदल देते हैं। फिर, दोनों पक्षों के वर्गमूल लेते हुए, आपको x = √2, लगभग 1.4 मिलता है।
दूसरे समाधान को प्राप्त करने के लिए -1 से गुणा करें, x =−√2, लगभग 1.4। फिर, इस तथ्य को याद करते हुए कि एक ऋणात्मक संख्या एक ऋणात्मक संख्या एक धनात्मक   संख्या है, हम पाते हैं कि -1.4 × -1.4 = 1.96, जो कि 2 के 0.04 छोटा है।
इस बिंदु पर मैं संख्यात्मक परिशुद्धता के बारे में बहुत चिंतित नहीं हूं। यदि मुझे अधिक दशमलव स्थानों की आवश्यकता है, तो मैं इसे केवल एक कैलकुलेटर में पंच करूंगा।
यहां थोड़ा और कठिन है: x² + 2x - 1 = 0. दोनों पक्षों को 1 जोड़कर, हम x² + 2x = 1. प्राप्त करते हैं और अब कृपया मुझे विनोद करें, चलो फिर से दोनों पक्षों को 1 जोड़ दें, जिससे हमारा समीकरण x² + 2x  + 1 = 2हो जाएगा।
यह अगला चरण थोड़ा जादुई लग सकता है: बाएं हाथ को फिर से लिखना (x + 1)².।आपको इसके लिए मेरा शब्द नहीं लेना है, आप इसे FOIL (First Product + Outer Product + Inner Product + Last Product) का उपयोग करके सत्यापित कर सकते हैं। सत्यापित करें कि (x + 1) (x + 1) =x² + x + x + 1 = x² + 2x + 1।
तो हमारा समीकरण अब (x + 1)² = 2. दोनों पक्षों के वर्गमूल को लेते हुए, हमें x + 1 = √2 मिलता है। फिर समाधान x = +1 + √2प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों से 1 घटाएं। अन्य समाधान को "संयुग्मी " कहा जाता है: x = -1 - √2।
बहुपद x² − 2 और  x² + 2x − 1 एक जैसे हैं कि वे दोनों को ax² + bx + c के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। पहले बहुपद में ,  b= 0 और c = -2, जबकि बाद के बहुपद में, b = 2 और c = −1। लेकिन दोनों में a = 1।
इसलिए यदि a, b और c, Z से सभी पूर्णांक हैं, तो संबंधित संख्या x बीजीय डिग्री 2 के साथ बीजीय संख्याएं हैं (2 बहुपद में सबसे अधिक प्रतिपादक है)।
और यदि a = 1 है, तो x बीजीय डिग्री 2 का बीजगणितीय पूर्णांक है। इसका मतलब है कि संख्या −√2, √2, -1 + √2 और -1 - √2, Z से पूर्णांक नहीं हैं, लेकिन वे बीजगणितीय पूर्णांक हैं, जिनमें बीजगणितीय डिग्री 2 है।
इसके अलावा, वे Z [√2] नामक संख्याओं के एक डोमेन का हिस्सा होते हैं, जिसमें m + n√2, जिसमें m और n दोनों ही Z से पूर्णांक होते हैं, की संख्या शामिल होती है।
Z [√2] से किसी भी दो बीजगणितीय पूर्णांकों को जोड़ें या गुणा करें और परिणाम Z [√2] से एक और बीजगणितीय पूर्णांक है। Z [√2] से एक बीजगणितीय पूर्णांक को दूसरे से विभाजित करें और परिणाम Z [√2] में भी हो सकता है या नहीं भी हो सकता है, इसलिए Z में विभाजन की अवधारणा Z [√2] में उसी तरह लागू होती है जिस तरह से यह Z में होता है।
जर्मन गणितज्ञ जेड [√2] "रिंग्स" जैसे डोमेन को कहते हैं, इस तथ्य को उजागर करते हुए कि वे इसके अलावा बंद हैं (इसे भी घटाव का मतलब समझा जाता है) और गुणा, हालांकि जरूरी नहीं कि विभाजन द्वारा।
उदाहरण के लिए, √2 + (−1 +√2) = -1 + 2√2, जो x² + 2x − 7 = 0. और √2 (−1 + √2) = 2 - √2 का हल है जो x² - 4x + 2 = 0 का हल है।
Z के परिचित पूर्णांक भी बीजीय पूर्णांक हैं। उदाहरण के लिए, x = −7, x + 7 = 0. का एकमात्र हल है। बीजगणितीय डिग्री 1 है (घातांक 1 छोड़ दिया गया है लेकिन संदर्भ से समझा जाता है)।
और Z, Z[ √2] जैसे डोमेन के भीतर समाहित है, ऐसे में Z की संख्या अभी भी m + n √2 के रूप में है, केवल n = 0।
1/2 (एक आधा) की तरह एक संख्या एक बीजीय संख्या है लेकिन एक बीजीय पूर्णांक नहीं है। हम देखते हैं कि x = 1/2, 2x - 1 का एक समाधान है, और इसलिए उच्चतम घातांक के साथ x से जुड़ा गुणांक 2 है, 1 नहीं।
हालांकि, 1/2 + (√5) / 2 जैसी संख्या एक बीजीय पूर्णांक हो सकती है। वह विशेष रूप से x² - x - 1. दो समाधानों में से एक है। यह x एक विशेष संख्या है जिसे स्वर्ण अनुपात कहा जाता है और जिसे आमतौर पर ग्रीक अक्षर φ  (लोअरकेस फाई ) द्वारा दर्शाया जाता है। लेकिन यह एक और दिन के लिए एक विषय है।
अब तक आप बिना किसी समस्या के एक विशिष्ट वैज्ञानिक कैलकुलेटर के साथ पीछा कर सकते थे। अगर आप चाहते थे।
यद्यपि आप कभी-कभार मशीन की शुद्धता का नुकसान देख सकते हैं, उदाहरण के लिए, 0.99999999 या 1.00000001 जब आप बिल्कुल 1 की उम्मीद करते हैं (यही कारण है कि जावा यूनिट परीक्षण ढाँचा JUnit आपको एक स्वीकार्य विचरण निर्दिष्ट करता है, जब फ़्लोटिंग पॉइंट संख्या बराबर होती है)।
बीजगणितीय पूर्णांकों के अगले समूह के लिए, हालांकि, आपको आसपास कुछ काम करने की आवश्यकता होगी यदि आप ऊपर दिए गए चित्र की तरह एक कैलकुलेटर पर चलना चाहते हैं।

5.काल्पनिक और जटिल संख्या(Imaginary and complex numbers)-

यदि x² − 2 = 0 को हल करना आसान है, x² + 2= 0 को हल करना भी आसान होना चाहिए, है ना? X² = -2 प्राप्त करने के लिए दोनों ओर से 2 घटाएं। यदि आपने, √−2 को पंच किया है, तो आपका कैलकुलेटर स्वयं नष्ट नहीं होगा, लेकिन यह सबसे अधिक संभावना है कि एक त्रुटि स्थिति में लॉक होगा।
Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

Prime Numbers in Complex Domains Are Actually Quite Simple

ऐसा लगता है कि कोई वास्तविक संख्या अपने आप से गुणा नहीं होगी, एक ऋणात्मक संख्या होगी। हमने पहले देखा था कि -1.4 × −1.4 = +1.96, .-1.96 नहीं। संख्यात्मक परिशुद्धता में कोई वृद्धि हमें -2 के करीब कुछ भी नहीं देगी।
बीजगणित में अक्सर यह याद रखना उपयोगी होता है कि √(ab) = (√a)(√b)। आपको यह हाई स्कूल बीजगणित से याद हो सकता है। दुर्भाग्य से यहाँ कोई मदद नहीं है: √−2 = (√−1)(√2, इसलिए हम अभी भी एक नकारात्मक संख्या के वर्गमूल के साथ काम कर रहे हैं।
गणितज्ञों ने चार शताब्दियों पहले इस तरह की समस्याओं से निपटा था। जिस समाधान के साथ वे आए थे, वह कल्पना करना था कि समाधान x² = −2 जैसे समीकरणों के लिए मौजूद हैं।
उन्होंने इन संख्याओं के प्रमुख को बुलाया जिन्हें उन्होंने "काल्पनिक" इकाई की कल्पना की और इसे प्रतीक i दिया।i² = −1 के बाद से, यह निम्नानुसार है कि √−2 = i√2 अर्थात, i से लगभग 1.4 गुणा।
फिर समीकरण x² = −2 के दो समाधान हैं, i√2और -i√2, जैसे x² = 2 के दो समाधान हैं, √2 और −√2। संख्यात्मक रूप से, i√2 लगभग 1.4142i है और -i√2 लगभग −1.4142i है।
और इसलिए उन्होंने कहा कि −1 और √2 जैसी संख्याएं वास्तविक हैं, लेकिन मैं और √−2  जैसी संख्याएं काल्पनिक हैं, भले ही वे संख्याओं की एक पूरी तरह से सुसंगत प्रणाली की ओर ले जाती हैं।
यहां मनोवैज्ञानिक कठिनाई यह है कि वास्तविक संख्याएं ठोस चीजों को मापती हैं, लेकिन काल्पनिक संख्याएं उन चीजों को मापती हैं जिन्हें हम अभी भी पूरी तरह से नहीं समझते हैं, जैसे कि उप-परमाणु कणों की स्पिन।
यह सब महान गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गॉस से पहले एक सदी के बारे में था, जिन्होंने महसूस किया कि तथाकथित काल्पनिक संख्याएं "वास्तविक" संख्याओं के समान वास्तविक हैं।
अब हमारे पास यह बताने के लिए इंजीनियर और भौतिक विज्ञानी हैं कि काल्पनिक संख्या वास्तव में वास्तविक हैं। और मीडियम की अपनी ब्रेट बेरी भी, जिन्होंने एक साल पहले के एक लेख में इसे बहुत अच्छी तरह से समझाया था।
हालांकि, दुर्भाग्यपूर्ण शब्दावली और संकेतन अटक गए हैं, यहां तक ​​कि महान बुद्धि के लोगों को भी लगता है कि काल्पनिक और सम्मिश्र  संख्या किसी भी तरह उनकी समझ से परे हैं।
जैसा कि यह पता चला है, काल्पनिक और सम्मिश्र  संख्याओं के बारे में अच्छे सौदे को समझने के लिए सिर्फ आधा याद किया गया हाई स्कूल बीजगणित पर्याप्त है।
एक "सम्मिश्र " संख्या बस एक "वास्तविक" भाग और एक "काल्पनिक" भाग के साथ एक संख्या है। काल्पनिक भाग वास्तविक भाग में जोड़ा जाता है, या इसके विपरीत।
बीजगणितीय रूप से, यदि m और n "वास्तविक" संख्याओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो ni (काल्पनिक इकाई i से गुणा n) एक विशुद्ध रूप से "काल्पनिक" संख्या का प्रतिनिधित्व करता है और m + ni एक "सम्मिश्र " संख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
सम्मिश्र  संख्याओं के लिए,मैं उपयोग करूँगा समीकरण x² + 2x + 3 = 0 का हल है। पहले की तरह, हम "c" शब्द को दूसरी तरफ स्विच करते हैं: x² + 2x = −3।
अब पहले की तरह, मुझे दोनों पक्षों में 1 जोड़ने के लिए प्रेरित करें:x² + 2x + 1 = −2। यह हमें पहले की तरह ही "जादुई" पुनर्लेखन करने में सक्षम बनाता है: (x + 1)² = −2। दोनों पक्षों के वर्गमूल को लेना और दोनों पक्षों से 1 को घटाना हमें एक समाधान देता है: x = −1 + √−2।
दूसरा समाधान है, पहले की तरह, संयुग्म, अर्थात् x = x = −1 - √−2। इन दोनों समाधानों में, वास्तविक भाग ,1 है। एक समाधान में, काल्पनिक भाग √−2 या i√2 है, दूसरे समाधान में काल्पनिक भाग or −√−2या -i √2 है।
जैसे 1/2 एक बीजीय संख्या है, लेकिन एक बीजीय पूर्णांक नहीं, i / 2 भी एक बीजीय संख्या है, लेकिन एक बीजीय पूर्णांक नहीं है। बाद वाली संख्या समीकरण 4x² + 1 = 0 के समीकरण का हल है।
लेकिन −1/2 + (√−3)/2, x² + x + 1 = 0. का एक समाधान है। यह x³ - 1 = 0 का एक हल भी है (किसी विशेष डिग्री का बीजगणितीय पूर्णांक समीकरणों का हल हो सकता है। उच्च बीजीय डिग्री), और इस तरह यह एक विशेष संख्या है जिसे कभी-कभी ग्रीक अक्षर ω (लोअरकेस ओमेगा, डब्ल्यू के साथ भ्रमित नहीं) द्वारा दर्शाया जाता है।

6.Irreducible का अर्थ हमेशा अभाज्य  नहीं होता है(Irreducible does not always mean prime)-

Z [√2] में एक संख्या को Z [√2] में एक अन्य संख्या से विभाज्य कहा जाता है, यदि विभाजन का परिणाम Z [√2] में भी एक संख्या है। इसी तरह, Z [√ -2] में एक संख्या को Z [√-2] में एक अन्य संख्या से विभाज्य कहा जाता है, यदि विभाजन का परिणाम Z [√ -2] में भी एक संख्या है।
इसका अर्थ है कि Z में अभाज्य संख्याएँ Z [√2], Z [√−2] या बीजगणितीय पूर्णांकों के अन्य डोमेन में आवश्यक नहीं हैं।
विशेष रूप से, x को x² + bx + c = 0के हल के रूप में Z में एक अभाज्य के रूप में दिया जाता है, यह पता चलता है कि c प्रासंगिक द्विघात पूर्णांक रिंग में x द्वारा विभाज्य है।
उदाहरण के लिए, Z [√2] में, हम देखते हैं कि 2 ,√2 से विभाज्य है, क्योंकि 2 को √2 द्वारा विभाजित किया गया है, [2 है। इसी प्रकार, Z [√−2] में, हम देखते हैं कि 2 ,√−2 से विभाज्य है, क्योंकि 2 को √−2 से विभाजित किया गया है, -√−2 है।
इसलिए दोनों डोमेन में, 2 न तो अप्रासंगिक है और न ही अभाज्य  है। दोनों √2 और √-2 उनके संबंधित डोमेन में अभाज्य  हैं, जैसे कि संख्या 1 + √-2 और 3 - √2हैं (पूर्व में x² − 2x + 3और पूर्णांक 3 से मेल खाती है, x² − 6x + 7के बाद वाले और पूर्णांक 7)।
Z [√2] और Z [[√-2] दोनों ही अनोखे कारक डोमेन हैं, और आदर्श डोमेन भी हैं। "आदर्शों" की अवधारणा भी एक सरल अवधारणा है जो मुझे समझाने में आधे घंटे से अधिक समय लेगी।
यहाँ यह कहना पर्याप्त है कि इसका अर्थ है कि इन दोनों डोमेन में सभी अभाज्य संख्याएँ अपरिमेय हैं और सभी अपरिमेय संख्याएँ भी अभाज्य हैं। ठीक उसी तरह जैसे Z।
लेकिन काल्पनिक द्विघात  पूर्णांक रिंगों के विशाल बहुमत में, कई संख्याओं में एक से अधिक भिन्न-भिन्न गुणनखण्ड  हैं। वास्तव में, Z [√−2] एक अलग अल्पसंख्यक में है, केवल नौ रिंगों में से एक है।
विशुद्ध रूप से असली वलयों  के बीच Z [√2] के लिए, यह एक खुला प्रश्न है जो मुझे यहाँ नहीं मिला।
एक काल्पनिक द्विघात पूर्णांक रिंग में कई अलग-अलग कारकों का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण Z [√−5] में 6 है, जहां हमारे पास (1 -√−5) (1 + √−5) = 6. लेकिन 2 और 3 भी हैं Z [√−5] में, और यह भी सच है कि 2 × 3 = 6।
हम सत्यापित करते हैं कि इस रिंग में 1 + √−5 या तो 2 या 3 से विभाज्य नहीं है: 1/2 +√−5) / 2 के लिए न्यूनतम बहुपद 2x² - 2x + 3 और 1/3+√−5 के लिए न्यूनतम बहुपद है 3x² − 2x + 2 है।
यह वैसा ही है जैसे 6 ,Z में 4 से विभाज्य नहीं है। लेकिन Z में, 4 और 6 दोनों 2 से विभाज्य है, और 6, 3 से विभाज्य है।

7.चित्र बनाना(Drawing the diagrams)-

हाई स्कूल से आपको शायद वास्तविक संख्या रेखा याद है। यह लगभग हमेशा क्षैतिज होता है, अक्सर केंद्र में 0 के साथ नकारात्मक संख्या 0 के बाईं ओर और दाईं ओर धनात्मक  संख्या होती है।
आम तौर पर वास्तविक संख्या रेखा को केंद्र में 0 के साथ दिखाया जाता है। हम लाइन पर देख सकते हैं, उदाहरण के लिए, -3, ,-2,-1, 0, 1, 2, 3. काल्पनिक संख्या रेखा को केंद्र में 0 के साथ भी दिखाया जा सकता है। उदाहरण के लिए,-3i, −2i, ,-i, 0, i, 2i, 3i।
चूँकि 0 विशुद्ध रूप से वास्तविक और विशुद्ध रूप से काल्पनिक दोनों है, यह केवल इसके लिए वास्तविक और काल्पनिक संख्या रेखाओं का जंक्शन होना मायने रखता है। और उन्हें लंबवत रेखाओं के रूप में जुड़ने के लिए, ताकि 1, i से 90 डिग्री पर हो।
फिर गुणा को सम्मिश्र समतल  में रोटेशन के रूप में देखा जा सकता है। 90 डिग्री को स्थानांतरित करने के लिए मुझे i गुणा करें। पूण: और 90 डिग्री स्थानांतरित करने के लिए मैं फिर से  iगुणा करता हूं। 180 डिग्री स्थानांतरित करने के लिए -1 से गुणा करें। और 360 डिग्री को स्थानांतरित करने के लिए 1 से गुणा करें और वापस शुरू करें जहां आपने शुरू किया था।
हम अब काल्पनिक संख्या रेखा पर विशुद्ध रूप से काल्पनिक संख्याओं का पता लगा सकते हैं, उसी प्रकार हम वास्तविक संख्या रेखा पर विशुद्ध रूप से वास्तविक संख्याओं का पता लगा सकते हैं। यहाँ उदाहरण के लिए √−2 है:
मजेंटा डॉट √−2 का अनुमानित स्थान देता है।
ऊपर दिए गए आरेख में, मैंने एक माउस के साथ क्लिक किया जहां मुझे लगा कि √−2के लिए डॉट को जाना चाहिए। यहां तक ​​कि कुछ खराबी के लिए अनुमति देते हुए, यह सही नहीं दिखता है, यह 1.4 की तुलना में 1.3 की तरह दिखता है। इसे थोड़ा नंगा करने की जरूरत है।
"सम्मिश्र " संख्याएँ, गैर-वास्तविक भाग और ग़ैर-काल्पनिक काल्पनिक भाग वाली संख्याएँ कहाँ हैं? आसान: वास्तविक और काल्पनिक कुल्हाड़ियों पर उचित बिंदुओं से खींची गई लंबवत रेखाओं के चौराहे पर।
उदाहरण के लिए, यहां हम 1 + √2 का पता लगाते हैं:
मजेंटा डॉट 1 + √−2 का अनुमानित स्थान देता है।
मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि मैंने 1 से निकलने वाली ब्लू वर्टिकल लाइन को कहाँ रखा है, लेकिन √−2 के लिए ब्लू लाइन का मेरा स्थान निशान से थोड़ा कम हो गया।
पिछले दो पूर्ववर्ती आरेख दोनों को एक TeX फ़ाइल की पीडीएफ के आधार पर फ़ोटोशॉप एलिमेंट्स में बनाया गया था। अधिकांश तत्व कंप्यूटर द्वारा रखे गए थे, लेकिन दोनों आरेखों में "मैन्युअल रूप से" तत्व शामिल हैं।
यह एक ग्रिड खींचने के लिए अधिक मज़बूती से सटीक होगा जिसमें ऊर्ध्वाधर लाइनें एक इकाई को अलग-अलग और क्षैतिज रेखाओं को अलग-अलग √2 इकाइयों में विभाजित किया जाता है। यदि हमारी इकाई 40 पिक्सेल है, तो √2 इकाइयाँ 56 या 57 पिक्सेल हो सकती हैं (कोई भी प्रदर्शन वास्तव में 56.5685424949238 पिक्सेल नहीं कर सकता है)।
और फिर मैं यूनिटों के लिए डॉट्स और प्राइम नंबरों के लिए, एक-एक करके, हाथ से क्लिक करता हूँ?
मैंने वास्तव में Z [i], Z [√−2] और Z [ω] के लिए किया था। जैसे ही मैं उन कार्यों के साथ आगे बढ़ा, मेरे लिए यह स्पष्ट हो गया कि मैं अपने कंप्यूटर की नंबर-क्रंचिंग पावर का उपयोग कर रहा था।

8.आरेखों को खींचने के लिए कंप्यूटर पर प्रोग्रामिंग करना(Programming the computer to draw the diagrams)-

कार्यक्रम के लिए स्पष्ट पसंद पहले वुल्फराम मैथमेटिका में था। आखिरकार, वो जो गॉर्सियन प्रिम्स (Z [i] में primes) और Eisenstein primes (Z [ω] में प्राइम) के बारे में वोल्फ्राम मैथवर्ल्ड पेज के लिए इस्तेमाल करते हैं।
और निश्चित रूप से मैं मैथवर्थ के पन्नों पर लोगों की तुलना में अधिक रंगीन चित्र बनाने के लिए गणितज्ञ कार्यक्रम कर सकता था। लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मेरे घर के कंप्यूटर पर वुल्फराम मैथमेटिका वास्तव में कभी नहीं थी।
दूसरी ओर, जावा को लगभग किसी भी कंप्यूटर पर स्थापित किया जा सकता है (हालांकि कुछ कैविएट क्षितिज पर लूम कर सकते हैं)। समस्या यह है कि जटिल संख्या से निपटने के लिए इसमें कोई सहज सुविधा नहीं है।
फोरट्रान(FORTRAN) की तरह, C #, सम्मिश्र  संख्याओं के समर्थन के साथ बनाया गया है। लेकिन संख्याओं का प्रतिनिधित्व "बीजगणितीय" के बजाय "संख्यात्मक रूप से" किया जाता है। इसका संभावित अर्थ यह हो सकता है कि, उदाहरण के लिए, जब हम 3 ठीक अपेक्षा करते हैं, तो हमें 2.99999999 + 0.00000001i मिलते हैं।
इसलिए मैंने इन नंबरों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जावा में वस्तुओं का एक पदानुक्रम बनाने का फैसला किया "प्रतीकात्मक रूप से," इस तरह का गणित कैसे करता है।
तो 1 + √−2, 1.00000000 + 1.41421356i नहीं है, लेकिन पूर्णांक 1 के बराबर "नियमित" भाग के साथ एक वस्तु, और एक "surd" भाग भी पूर्णांक 1 के बराबर है, जो वर्गमूल द्वारा गुणा किया जाता है - 2।
गणना बीजगणितीय पूर्णांक वस्तुओं के "फ़ील्ड" पर की जाती है (यहां मेरा अर्थ "प्रोग्रामिंग अर्थ में" फ़ील्ड "है, गणितीय अर्थ नहीं है), और फ़्लोटिंग पॉइंट संख्याओं के जोड़े में रूपांतरण केवल तभी होता है जब बिल्कुल आवश्यक हो।
आरेखों के वास्तविक आरेखण के लिए, मुझे एहसास हुआ कि मुझे पहिया को फिर से आविष्कार करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि, किसी कारण से मैं अब काफी स्पष्ट नहीं कर सकता, मैंने फैसला किया कि मैं शुद्ध जावा एडब्ल्यूटी का उपयोग करूंगा, कोई जावा स्विंग नहीं।
कुछ अप्रत्याशित समस्याओं और बदसूरत कीचड़ से निपटने के बाद, मैंने सभी के बाद जावा स्विंग का उपयोग करने का फैसला किया। पिक्सर भले ही ज्यादा स्विंग के बारे में न सोचे, लेकिन मेरे उद्देश्य के लिए, यह पर्याप्त से अधिक है।
जहां मुझे इन आरेखों को खींचने में घंटों या दिन लग सकते हैं, मेरा जावा प्रोग्राम उन्हें सेकंड में आकर्षित कर सकता है, या मिलीसेकंड की तुलना में अधिक संभावना है। कुछ दूसरों की तुलना में अधिक दिलचस्प हैं, लेकिन निश्चित रूप से इनमें से किसी एक पर कुछ सीपीयू घड़ी चक्र खर्च करने में दुख नहीं होता है।
यहां Z [√−5] का उदाहरण दिया गया है, प्रति यूनिट अंतराल पर 22 पिक्सेल और इसके बारे में एक डॉट व्यास है।

9.Z [√−5] में अपराधों का आरेख(Diagram of primes in Z[√−5])-

केंद्र में ब्लैक डॉट 0. है। अभी के लिए कार्यक्रम केवल शून्य-केंद्रित आरेख खींच सकता है। -1 और 1 की इकाइयाँ 0 के बाएँ और दाएँ सफेद बिंदु हैं।
खोखले हरे डॉट्स -2 और 2 हैं, जो −√−5 और √−5 (ऊपर और नीचे पूर्ण हरे रंग के डॉट्स) के लिए एक विशेष संबंध रखते हैं। 0 के बाईं और दाईं ओर पूर्ण हरा डॉट्स -5 और 5 हैं।
वास्तविक संख्या रेखा पर खोखले नीले डॉट्स (आप ऊपर दिए गए आरेख में उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते हैं या नहीं देख सकते हैं) वे संख्याएँ हैं जो Z में अभिलिखित हैं, लेकिन Z [√−5] में वे अप्रासंगिक हैं लेकिन अभाज्य नहीं हैं। 7 की तरह, चूंकि यह 14 को विभाजित करता है, लेकिन 3 नहीं 3 − √−5 और न ही 3 + √−5, जो दोनों x² − 6x + 14 = 0के समाधान हैं।
और पूर्ण सियान डॉट्स संख्याएँ हैं जो इस डोमेन में अप्रासंगिक और प्रमुख दोनों हैं। कार्यक्रम के साथ, आप 2 पिक्सेल प्रति यूनिट अंतराल के लिए सभी तरह से ज़ूम कर सकते हैं।
Z [√−5] में अपराधों का आरेख, प्रति यूनिट अंतराल में 2 पिक्सेल तक ज़ूम किया गया।
यदि आप के लिए आरेख देखना चाहते हैं, कहते हैं, Z [√−10], प्रोग्राम में आप Control-D या Command-D दबा सकते हैं और उस संख्या में दर्ज कर सकते हैं, (10 (आप 10 भी दर्ज कर सकते हैं और यह चुपचाप बदल जाएगा यह -10)।
कार्यक्रम का पता लगाने के लिए यहां एक दिलचस्प अनुक्रम है: −7, −11, ,19, −43, −67, −163:
Q(√−7) के बीजगणितीय पूर्णांकों की अंगूठी में अपराधों का आरेख।
वास्तव में अभी तक कुछ भी नहीं देख रहा है, है ना?
Q(√−11) के बीजीय पूर्णांक की वलय  में अपराधों का आरेख।
Q(√−19) के बीजगणितीय पूर्णांकों की वलय में अपराधों का आरेख।
Q(√−43) के बीजगणितीय पूर्णांकों की वलय में अपराधों का आरेख।
रुको, वहाँ कुछ है ...
क्यू (√−67) के बीजगणितीय पूर्णांकों की अंगूठी में अपराधों का आरेख।
यह आरेख के बीच में इस पास्ता शेल (जैसे आप उनमें से एक रिकोटा पनीर के साथ भर सकते हैं) की तरह है, लेकिन इसके बजाय भरण स्लिट लंबाई-वार, भरण स्लिट चौड़ाई-वार है।
Q (√−163) के बीजीय पूर्णांक की वलय में अपराधों का आरेख।
एक व्यक्ति जिसे मैंने इन "स्टार वार्स डॉट्स" के नाम से दिखाया था, लेकिन चूंकि मेरे पास डिज्नी से लाइसेंस नहीं है, इसलिए मुझे लगता है कि मैं इसे कॉल नहीं कर सकता।
यह उनमें से आखिरी है। हो सकता है कि महान जर्मन गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गॉस ने दो दशक पहले अपने मन में इस चित्र को देखा हो, हालांकि अलग-अलग रंगों के साथ, लेकिन जहां तक ​​मुझे पता है कि उन्होंने कभी इसे आकर्षित नहीं किया और न ही इसे स्केच किया।
अन्य नकारात्मक संख्याएं हैं जो आरेख का उत्पादन करती हैं जो अन्य कारणों से दिलचस्प हैं।
कार्यक्रम के लिए निष्पादन योग्य जार मुश्किल से 100KB है, लेकिन यह मेगाबाइट के मूल्य के आरेख का उत्पादन कर सकता है। मैंने इनमें से बहुत सारे चित्र देखे हैं, लेकिन उनमें से शायद ही कोई हो। मुझे निश्चित रूप से उम्मीद है कि अन्य लोग मेरे कार्यक्रम का उपयोग उन दिलचस्प आरेखों को खोजने के लिए करेंगे जिनकी मैंने अनदेखी की है।
मैं इस परियोजना की कल्पना करता हूं कि अंततः पूरी टीम द्वारा काम किया जा रहा है, शायद संस्करण 3.0 या 2.0 तक। लेकिन वर्जन 1.0 मुझे दो या तीन चीजों को छोड़कर, वेब पर कॉपी किए गए सभी के लिए होगा।
सभी स्रोत कोड और यूनिट परीक्षण मेरे GitHub पेज से उपलब्ध हैं। वहां आपको एक निष्पादन योग्य JAR फ़ाइल (संस्करण 0.97, या यह 0.98 या 0.99 हो सकती है यदि यह अभी तक 1.0 नहीं है) और साथ ही कुछ नमूना आउटपुट भी।
यह परियोजना परीक्षण-संचालित विकास परियोजना के रूप में शुरू नहीं हुई थी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे इसे उस प्रोग्रामिंग दर्शन में बदल दिया है। प्रत्येक नई सुविधा जिसे मैं प्रोग्राम में जोड़ता हूं (उन लोगों को छोड़कर जो एडब्ल्यूटी या स्विंग पर निर्भर हैं) एक स्टब, फिर एक परीक्षण और फिर वास्तविक विशेषता के साथ शुरू होता है।
अंतत: मैं विशुद्ध रूप से वास्तविक संख्याओं के डोमेन में अभाज्य संख्याओं के आरेख बनाने के लिए कार्यक्रम की क्षमता जोड़ूंगा। वे "जटिल" संख्या के डोमेन की तुलना में बहुत अधिक जटिल हो जाते हैं।
फ़ोटोशॉप तत्वों में चारों ओर क्लिक करके बनाए गए चित्र में यहाँ Z [√2] का स्वाद है:
Z [√2] में अभाज्य संख्याओं के आरेख पर "मैनुअल" प्रयास।
मैं इस आरेख की शुद्धता के लिए व्रत नहीं कर सकता।यहां कोई जटिल संख्या नहीं है, लेकिन जब मैं कार्यक्रम लिखने के लिए चारों ओर मिलता हूं, तो निश्चित रूप से निपटने के लिए जटिल मुद्दे होते हैं।
किसी दिए गए काल्पनिक डोमेन की जटिल संख्याओं के साथ यह बहुत आसान है क्योंकि संख्याओं को बड़े पैमाने पर जटिल विमान में जगह दी जाती है, बजाय एक वास्तविक रूप से यादृच्छिक पैटर्न में वास्तविक संख्या रेखा पर क्लस्टर किए।
Read more

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

1.गणित समानता: जब एक सफेद पुरुष पार्क से बाहर निकलता है का परिचय (Introduction of Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park)-
इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित सीखने के लिए सबके साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए। बौद्धिक रूप से यह विचार सुलझा हुआ तथा अच्छा लगता है परन्तु व्यावहारिक रूप से इस पर विचार करें तो यह कार्य बहुत कठिन है। क्या समानता लाने के लिए मोटे व्यक्ति को समान करने के लिए उसको छीला जा सकता है? व्यावहारिक रूप में यह कार्य कठिन है। संसार में हर चीज के दो पहलू होते जैसे शुभ-अशुभ, न्याय-अन्याय, हानि-लाभ, ऊँच-नीच, जय-पराजय इत्यादि। अर्थात् एक के बिना दूसरा असंभव है।जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं चित्त और पट। उसी प्रकार संसार में जो चीजे हैं उसके दो पहलू होते हैं। यहाँ कहने का यह तात्पर्य नहीं है कि समानता लाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। वस्तुतः जब तक हम कि किसी भी बात के पक्ष-विपक्ष की पूरी जाँच-पड़ताल नहीं कर लेते हैं तब तक उस पर चलना या कदम बढ़ाना हमारे लिए समस्या पैदा कर सकता है। समानता का अधिकार भी उसी तरह है। समानता लाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए परन्तु इसमें शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करना नामुमकिन है। 
आर्टिकल पसन्द आये तो अपने मित्रों के साथ शेयर  व लाईक करे। यदि आपकी कोई समस्या हो या सुझाव हो तो कमेंट करके बताए। इस आर्टिकल को पूरा पढ़े। 

(1.)गणित के इतिहास व गणितज्ञों के बारे में भेदभाव (Discrimination about the history of mathematics and mathematicians)-

हमारे विद्यालयों के पाठ्यक्रम में गणित के इतिहास के अध्ययन को कोई स्थान नहीं दिया गया है। इसका कारण यह है कि पाठ्यक्रम निर्माता वर्तमान परिस्थितियों में गणित के इतिहास की विशेष उपयोगिता नहीं समझते हैं। यदि गणित के इतिहास का अध्ययन विद्यार्थियों को कराया जाये तो उन्हें आनंद एवं परितोष की अनुभूति होगी।
गणित के इतिहास के अध्ययन से विद्यार्थियों को यह विषय गतिशील एवं प्रगति का सूचक लगेगा तथा इस विषय के अध्ययन में उनकी रुचि का विकास होगा। विद्यार्थियों को गणित के अनेक उपविषयों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी मिलने से उन्हें मानवीय प्रयासों एवं चिन्तन का महत्त्व समझ में आएगा।
गणित के इतिहास का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रभाव यह होगा कि विद्यार्थी यह समझेंगे कि अन्ततोगत्वा मानवीय समस्याएं ही हैं तथा उन्हें अनेक प्रकार से हल किया जा सकता है। मानवीय प्रगति के साथ-साथ अनेक समस्याओं का उद्भव होता रहा है तथा गणित के ज्ञान का उपयोग इन समस्याओं को हल करने में सदैव उपयोगी सिद्ध हुआ है। मानव की प्रगति गणित विषय के विस्तार एवं चिंतन के साथ जुड़ी हुई है। गणित के इतिहास के अध्ययन से विद्यार्थियों में सही प्रकार की आदतों का निर्माण करना सम्भव हो सकता है जिससे कि वे समझें कि गणित का विकास किस प्रकार मानव प्रगति का एक महत्त्वपूर्ण भाग रहा है। गणित विषयवस्तु की जितनी भी शाखाएं एवं नवीन क्षेत्र विकसित हुए हैं वे सब मनुष्य की आवश्यकताओं एवं समस्याओं के हल करने की प्रक्रिया की देन हैं तथा भविष्य में यदि मनुष्य ऐसे प्रयास करता रहेगा तो गणित की उत्तरोत्तर प्रगति होगी तथा मनुष्य की भौतिक समस्याओं के गणितीय हल अधिक सुगम एवं उपयोगी होंगे।
गणित की जीवनियां भी गणित-इतिहास का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। भारत एवं अन्य देशों के गणितज्ञों का अध्ययन विद्यार्थियों में परिश्रम एवं सतत प्रयासों में निष्ठा पैदा कर सकेगा तथा उनमें यह भावना विकसित कर सकेगा कि गणित विषय की प्रकृति अन्तर्राष्ट्रीय है तथा धरती के सभी मानव गणित के विकास में, अपनी परिस्थितियों के अनुसार महत्त्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। गणित के विकास का इतिहास स्वयं में इतना रोचक है कि अध्ययन करते समय विद्यार्थी भाव-विभोर होकर यह सोचने लगते हैं कि यदि गणित विषय का विकास नहीं हुआ होता तो आज हमारी सभ्यता और संस्कृति कितनी पिछड़ी हुई होती तथा मनुष्य आज भी आदि मानव स्तर का पशुवत जीवन व्यतीत करता होता। मनुष्य के लिए 'गणित का इतिहास' अत्यन्त उपयोगी एवं उत्साहवर्धक सामग्री प्रस्तुत करता है। गणित एक मनुष्य-रचित विज्ञान है।
प्राचीन महान् गणितज्ञों का गणित के कार्य को खड़ा करने में कितना योगदान है यह सब हम भुला चुके हैं। उनको न तो याद करते हैं और न हम उनके बारे में जानते हैं। आज कोई गणितज्ञ छोटा सा भी कार्य कर देता है तो तत्काल दुनिया की नजरों में आ जाता है जबकि नींव का कार्य महत्त्वपूर्ण होता है कँगूरा खड़ा करने में ज्यादा कोई मेहनत नहीं लगती है और वह उतने समय तक ही खड़ा रह सकता है जितनी उसकी नींव मजबूत होगी।

(2.)गणित में श्वेत लोगों द्वारा अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव (White people discriminate against black people in mathematics)-

यह विचार श्वेत लोगों द्वारा अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव करने के कारण उत्पन्न हुआ है। शिक्षा में तथा गणित में भेदभाव करने व समानता के अधिकार से वंचित करने के कारण अश्वेत पिछड़े हुए रह गए और उनका उचित विकास नहीं हो सका। फलस्वरूप उनमें असंतोष पनप गया जिसका परिणाम यह हुआ कि आपस में लड़ाई-झगड़ा व दंगा-फसाद होने लगे। इसलिए समानता की शुरुआत करना अच्छी पहल है परन्तु यदि इसके परिणाम पर भी कुछ पहले ही विचार कर लिया जाए तो बाद में पश्चाताप नहीं होगा। रंग के आधार पर असमानता नहीं होना चाहिए। सभी को गणित शिक्षा तथा अन्य अधिकार समान रूप से प्राप्त करने का अधिकार है। यह सैद्धान्तिक बात है परन्तु व्यवहार में इसका पालन करना कितना कठिन है इसे हम सब भलीभाँति जानते हैं। 

(3.)गणित में महिलाओं के साथ भेदभाव (Discrimination against women in mathematics)-

महिलाओं के हर क्षेत्र में पिछड़ने का मूल कारण है स्त्री शिक्षा का अभाव। जो नारी शिक्षा ग्रहण करने में रूचि नहीं लेती हैं या जिनके अभिभावक नारी शिक्षा पर ध्यान नहीं देते है वे नारियाँ पिछड़ी हुई रह जाती हैं। इस प्रकार की नारियाँ या मनुष्य जैसे -तैसे अपने जीवन को बोझ की तरह ढोकर जैसे आए थे वैसे ही मृत्यु के मुख में चले जाते हैं।
नारी को शिक्षा का अवसर दिया जाए तो ज्ञान व बुद्धि में वह भी आगे बढ़ सकती है। वर्तमान युग में नारी व पुरुष को समानता का अधिकार देने के कारण नारी शिक्षा में वृद्धि हुई है। इसलिए धीरे -धीरे हर क्षेत्र में नारी आगे बढ़ रही। 'नोबेल ऑफ मैथ ' जिसे गणित का नोबल पुरस्कार कहा जाता है ,एक महिला को मिलना शुभ संकेत है.यह  करेन उहलेनबेक को मिला है। 
आर्टिकल को ध्यान से पूरा पढ़ें और अगर पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर करें तथा लाईक करें। यदि आपका कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं।

2.गणित समानता: जब एक सफेद पुरुष पार्क से बाहर निकलता है(Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park)-

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

कैलिफोर्निया के खूबसूरत पाम स्प्रिंग्स में 59 वें वार्षिक सीएमसी-दक्षिण गणित  सम्मेलन का आज आखिरी दिन था। यह पहली बार था जब मैंने इस सम्मेलन में भाग लिया। इसने मेरी अपेक्षाओं को आसानी से पार कर लिया। सम्मेलन का सामान्य वाइब / ऊर्जा वह है जो प्रगतिशील व्यवधान के साथ भारी रूप से जुड़ा हुआ है।
जो बताता है कि आज गणित शिक्षा के सबसे जीवंत और चुनौतीपूर्ण विचारों को सुनने के लिए 3500 लोगों ने रेगिस्तान की ओर प्रस्थान किया।
और, हां मुझे पाम स्प्रिंग्स के रेगिस्तान की सुंदरता का आनंद लेना चाहिए। हालाँकि, मुझे इस सम्मेलन के अपने सबसे यादगार अनुभव को साझा करने की आवश्यकता है।
अभी।
जब चुनौतीपूर्ण प्रस्तुतियों और यथास्थिति को चुनौती देने की बात आती है, तो शायद इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक क्रिस शोर की तुलना में कोई और अधिक चुनौतीपूर्ण प्रस्तुति नहीं थी। सम्मेलन से कुछ हफ्ते पहले, क्रिस मेरे साथ जुड़ा और मुझे बताया कि वह अपनी प्रस्तुति में मेरे विचारों / उद्धरणों में से एक का उपयोग कर रहा था।
मुझे महसूस नहीं हुआ कि मेरे शब्दों को एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा।
उपरोक्त स्लाइड का सार यह है कि ज्ञान / रुचि का यह सामान्य स्टीरियोटाइपिंग है - गोरे लोग सामग्री के बारे में बात करते हैं और इक्विटी के बारे में गैर-सफेद बात करते हैं। स्वाभाविक रूप से अपवाद हैं, लेकिन मुझे और अधिक गैर-श्वेत गणित शिक्षकों को सामग्री में नेता बनने और अधिक श्वेत शिक्षकों को कठिन, लेकिन महत्वपूर्ण, इक्विटी में बातचीत - और वास्तव में गहरे जाने पर देखना पसंद आएगा।
क्रिस शोर ने चुनौती ली। और, जैसा कि इस ब्लॉग के शीर्षक से पता चलता है, उन्होंने गणित शिक्षा की स्थिति के बारे में कठिन और कभी-कभी असहज विचारों को संबोधित करते हुए, इसे पार्क से बाहर खटखटाया। कि गहरे पक्षपाती हैं जो व्यवस्थित रूप से घिरे हुए हैं। उनकी 90 मिनट की प्रस्तुति नस्ल, वर्ग और लिंग के आधार पर हर रोज होने वाले भेदभाव को साबित करने के लिए आंकड़ों की एक भावनात्मक खुदाई थी।
नीचे कुछ स्लाइड्स हैं जो दर्शकों के साथ गूंजती हैं ...
दीवार में बहुत सी ईंटें

3.समानता या वक्ष(Equity or Parity)-

परिवर्तन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में विशेषाधिकार का उपयोग करना
जो संभव के रूप में उच्च के रूप में ऊपर उठाया जा करने की आवश्यकता है
अंतराल, अंतराल, अंतराल ...
कक्षा के दरवाजे पर अपने पूर्वाग्रह की जाँच करें
यह समय गणित की शिक्षा के भविष्य के लिए इस कहानी को लिखने का है
पूरी प्रस्तुति कठिन सच्चाइयों को साझा करने और अप्रभावी और एकीकृत उद्देश्य के साथ शर्मनाक आंकड़ों को उजागर करने का एक मानवीय समरूपता थी - जो कि चलने का समय है "गणित सभी के लिए है।"
शायद बेहतर है, कि सभी गणित सभी के लिए है।
क्रिस शोर अपने स्पीकर की स्थिति का इस्तेमाल कर सकते थे और सबसे अधिक यात्रा करने वाले गणितीय मार्ग को ले सकते थे। उसने नहीं किया जिस सड़क पर वह गया था उसमें उच्च जोखिम थे, लेकिन पुरस्कार भी अधिक हैं। लेकिन वास्तव में, इक्विटी मुद्दों को संबोधित करने में एक नैतिक अनिवार्यता है। यदि नहीं, तो लोगों और संस्थानों ने गणित के बारे में अपने विचार व्यक्त किए होंगे, 21 वीं सदी की गणित शिक्षा के साथ पूरी तरह से संचालित होने वाली आवृत्ति पर काम करना।
व्यवधान की आयु विशेष रूप से… ट्रस्ट के विघटन के बारे में है। ट्रस्ट को हर रोज़ लोगों के माध्यम से क्षैतिज रूप से पुनर्वितरित और स्थानांतरित किया जा रहा है, पारंपरिक स्तंभों के माध्यम से काटकर जो सीधे खड़े होते हैं।
Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

यह सूनामी आने का समय हैट्रस्ट के थर्मोडायनामिक्स
गणित  के शिक्षक विश्वास के गोले बना रहे हैं। उन जनजातियों में, गणित शिक्षा का सबसे शक्तिशाली विचार अनपेक्षित और वितरित किया जा रहा है - इक्विटी।
हालांकि जो असमानता की दीवारें बनाई गई हैं, वे जल्द ही कभी भी नीचे नहीं आएंगी - दुर्भाग्य से - परिवर्तन का वेक्टर सही दिशा में बताया गया है। अंत में, इस बदलाव में जो तेजी आएगी वह यह है कि सभी शिक्षण, तल पर, रिश्तों के बारे में है। रिश्ते जो दया, सहानुभूति और भेद्यता के साथ रंगे हैं। ये रिश्ते कहानियों से जाली हैं।
वह सब कुछ जो मानव है एक कहानी है।
तीन कहानियाँ बड़ी कहानी कहती हैं कि गणित एक मानवीय प्रयास रहा है जिसने इतिहास में हर सांस्कृतिक, वर्ग, नस्ल और लिंग रेखा को पार किया है।
बेटन को शिक्षा के लिए पारित किया गया है। पहले 100 साल या इसके बारे में घर लिखने के लिए कुछ नहीं किया गया है। लेकिन, विचारों और सपनों का लोकतांत्रिकरण गणित की शिक्षा की दीवारों में कुछ गंभीर छिद्रों को पंच करने के लिए कहां और कैसे विश्वास प्रवाह के पुन: अंशांकन के साथ होता है।
और, इसे क्रिस शोर जैसे विशेषाधिकार प्राप्त लोगों से अधिक घरेलू रन की आवश्यकता होगी, जिन्होंने साहसपूर्वक अपने स्वयं के पूर्वाग्रह को सीएमसी-दक्षिण की भीड़ के साथ साझा किया।
धन्यवाद, क्रिस। हम सभी को एक बिंदु पर ले जाने के लिए धन्यवाद - या कम से कम उस बिंदु को देखें - जहां कोई पीछे नहीं है। वहाँ केवल एक और बात है कि जोड़ने के लिए है, और मैं काफ्का इसे घर लाने दूँगा ...
Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park,Franz Kafka

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park



Read more