How to make mathematics interesting and simple?

How to make mathematics interesting and simple?

1.गणित को रोचक व सरल कैसे बनाएं(How to make mathematics interesting and simple?)-

How to make mathematics interesting and simple?

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गणित विषय की जटिलता के कारण गणित विषय सामान्य विद्यार्थियों में अपनी जगह नहीं बना पाया है ।इस आर्टिकल में हम गणित विषय को सरल व रोचक बनाने के कुछ टिप्स बता रहे हैं ।यदि इन पर अमल किया जाए तो गणित विषय को सरल व रोचक बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों को प्रेरित करके गणित विषय से कुछ समय के लिए ही जोड़ा जा सकता है लेकिन जब उनके सामने गणित की कठिनाइयां और जटिलताएं सामने आती है तो भाग खड़े होते हैं ।इसलिए गणित को सामान्य व्यक्ति से जोड़ने के लिए कुछ उपाय करने जरूरी है ।हमारे विचार से गणित को सरल करने के कुछ तरीके हैं जिन्हें प्रस्तुत किया जा रहा है।
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2.गणित प्रयोगशाला का गठन(Formation of Mathematics Laboratory)-

प्रत्येक विद्यालय तथा शिक्षण संस्थान में गणित की प्रयोगशाला होना आवश्यक है। गणित का सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने से विद्यार्थियों के गणित ठीक से समझ में नहीं आती है ।यदि गणित विज्ञान को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ उसका प्रैक्टिकल ज्ञान भी प्रदान किया जाए तो गणित को समझने में आसानी होगी। जैसे यदि प्रिज्म के आयतन तथा सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल के बारे में बताया जाए तो विद्यार्थियों के मन में एक प्रकार की जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि प्रिज्म की आकृति कैसी होती है और उसका आयतन व क्षेत्रफल निकालने से क्या तात्पर्य है?यदि प्रिज्म को प्रयोगशाला में दिखाकर फिर उसका आयतन व क्षेत्रफल समझाया जाए तो उनके मस्तिष्क में प्रिज्म की कांसेप्ट क्लीयर हो जाती है।

3.शिक्षकों का दायित्व(Teachers responsibility)-

विद्यार्थियों पर सबसे अधिक प्रभाव शिक्षकों का पड़ता है और विद्यार्थी शिक्षकों के सीधे संपर्क में आते हैं। गणित विषय को रोचक व सरल बनाकर प्रस्तुत करने का सबसे बड़ा दायित्व शिक्षकों का है।यदि गणित शिक्षक समर्पित भाव से विद्यार्थियों को पढ़ाएं तो काफी हद तक गणित की समस्याएं कक्षा में ही हल की जा सकती है ।शिक्षक को व्यक्तिगत तौर पर यह पता होता है कि अमुक विद्यार्थी का मानसिक व बौद्धिक स्तर कैसा होता है ?व्यक्तिगत विद्यार्थियों के सम्मुख गणित शिक्षण में व्यावहारिक स्तर पर आ रही कठिनाइयों और समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यदि उनका समाधान नहीं हो पा रहा है तो आपस में साझा करके उनका समाधान खोजा जा सकता है। उच्च स्तर की कक्षाओं के विद्यार्थियों में गणितीय संबोधनों का उच्चारण करने का अभाव पाया जाता है अर्थात् वे ईटा,जाई,साईं जैसे प्रतीकों का संबोधन ही नहीं कर पाते हैं।इसका कारण है कि प्राथमिक स्तर तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर गणित में रुचि नहीं होना जिससे कि मूलभूत क्रियाओं पर मजबूत पकड़ नहीं हो पाती है। प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों पर गणित शिक्षक को ध्यान देकर गणित को सरल व रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिससे विद्यार्थियों को उच्च कक्षाओं में किसी प्रकार की कठिनाई ना आए। प्राथमिक कक्षाओं में गणित को रोचक बनाने हेतु खेल, संगीत ,पहेलियां तथा मॉडल्स का उपयोग किया जा सकता है।
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4.गणित को एंजॉय करके सिखाए(Enjoy mathematics by teaching)-

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यदि गणित विषय को एंजॉय करते हुए सीखाया जाए तो गणित को रोचक बनाया जा सकता है ।गणित को पढ़ाते समय कभी-कभी जोक्स का उपयोग भी करना चाहिए।
जैसे एक बच्चे ने कहा कि सर जी लोग हिंदी और इंग्लिश में ही बात करते हैं, मैथ में क्यों नहीं ?
टीचर ने उत्तर दिया- ज्यादा तीन-पांच मत कर, नौ दो ग्यारह हो जा वरना पांच-सात खींचकर थप्पड़ मारूंगा , तुझे 6 की जगह 36 नजर आएंगे और 32 के 32 दांत बाहर आ जाएंगे।
इसी प्रकार एक छात्रा को मैंने कहा-मैं घर जाकर भोजन करके आ जाता हूं ।
छात्रा ने कहा -सर मैं आपको यही भोजन करा सकती हूं।
मैंने कहा -कैसे ?
छात्रा ने उत्तर दिया- माना यह दाल है ,माना यह रोटी है ।अब खा लो ‌।मेरी हंसी रोके नहीं रुक रही थी।
इसी प्रकार के और उदाहरण लिए जा सकते हैं एक और उदाहरण लीजिए ।एसएससी के बेच के एक शिक्षक समय और दूरी पढ़ा रहे थे। प्रश्न इस प्रकार था-
प्रश्न -एक कुत्ता एक मिनट में इतना छलांग लगाता है, खरगोश एक मिनट में इतना छलांग लगाता है तो कितने समय में कुत्ता खरगोश को पकड़ लेगा?
सवाल बोर्ड पर बताने के बाद टीचर ने दुबारा बच्चों से पूछा कोई समस्या?
एक बालक मासूमियत से पूछा- सर "कुत्ता और खरगोश है तो दोनों जानवर ही"?
टीचर ने कहा-हां
बालक ने कहा -इसकी क्या गारंटी है कि दोनों एक ही दिशा में भागेंगे? हो सकता कुत्ता इधर भागे और खरगोश उधर।

5.खूबसूरती से गणित को रोचक बनाए(Make math interesting from beauty)-

यह यूनिवर्स में सिर्फ 5 है।जो संख्याओं के वर्गों का योग करके अंको को बदलकर( इकाई के अंक की जगह दहाई का और दहाई के अंक की जगह इकाई का अंक रखने पर) और उनका वर्ग करके जोड़ने पर बराबर होता है।
142+872=412+782  
152+752=512+572
172+842=712+482    
262+972=622+792
272++962=722+692
इसी तरह गणित के अन्य तथ्यों जिनका उपयोग करके गणित में खूबसूरती लाई जा सकती है।

6.इच्छाशक्ति बढ़ाएं(Increase will power)-

बहुत से विद्यार्थी गणित के सवालों और जटिलताओं को देखकर उनमें गुस्सा ,चिंता,शर्म,ऊब तथा नाउम्मीदी जैसी भावनाएं व्यक्त होती है जो कि नकारात्मक सोच है। ऐसी भावनाएं बालकों की सफलता में बाधक होती है ।इसलिए शिक्षक तथा माता-पिता को बच्चों की इच्छाशक्ति को बढ़ाना चाहिए,उन्हें प्रेरित करना चाहिए। उन्हें प्रेरक प्रसंग सुनाएं। गणित से सम्बन्धित कोई कथा, कहानी या कोई सुभाषित,सुक्ति के माध्यम से प्रेरित करते रहना चाहिए जिससे बालकों में सकारात्मकता आए।

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नकारात्मकता मस्तिष्क की क्षमता को कम करती है,निष्क्रिय कर देती है। इसलिए उनमें सकारात्मक सोच को विकसित करना चाहिए। सकारात्मक सोच से विद्यार्थियों में खुशी,रुचि, आनंद,उत्साह जैसी भावनाएं जाग्रत होती है,पनपती हैं। इन भावनाओं के सक्रिय होने से मस्तिष्क अधिक सक्रिय व सजग हो जाता है ।ऐसे भाव पैदा करने के लिए उन्हें प्रेरक प्रसंग सुनाने चाहिए।
गणित में दिलचस्पी रखने वाले विद्यार्थियों में से बेहतर अंक पाने वाले बच्चे शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करते हैं। गणित के अध्ययन के प्रति सकारात्मक भावनाएं और इसमें सफलता एक दूसरे को मजबूत करती है। शोधकर्ता रीन हार्ड पेरुकन ने कहा है कि विद्यार्थियों में भावनाएं, गणित संबंधी उपलब्धि को प्रभावित करती है ।जो विद्यार्थी ज्यादा तेज होते हैं उन्हें बेहतर ग्रेड तथा अंक मिलते हैं ।लेकिन जिन विद्यार्थियों की गणित में रूचि होती है,वे बेहतर उपलब्धि हासिल करते हैं ।जर्मनी के म्यूनिख स्थित ludwig-maximilians-university के शोधकर्ताओं ने पाया कि विद्यार्थियों की सीखने की प्रवृत्ति और ज्ञान संबंधी प्रदर्शन पढ़ाई के दौरान खुशी,चिंता और ऊब जैसी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से प्रभावित होती है।
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7.गणित को योजनाबद्ध तरीके से पढ़ें (Read math systematically)-

गणित को रोचक बनाने के लिए गणित को सरल से कठिन की ओर पढ़ाया जाना चाहिए। सामान्य तथा निम्न स्तर के बालकों को यदि प्रारंभ में ही कठिन टॉपिक पढ़ाया जाएगा तो वे उससे घबराकर छोड़ देंगे और गणित में अरुचि उत्पन्न हो जाएगी ।इसलिए गणित विषय को कठिन,मध्यम तथा सरल भागों में विभाजित करके जो सरल टॉपिक हैं उनको पहले पढ़ाएं। सरल टाॅपिक को पहले पढ़ाते समय,पिछली कक्षाओं की कमजोरी को भी साथ-साथ में दूर करते जाएं। जब पिछली कक्षाओं की कमजोरी और सरल टॉपिक पढ़ा दिए जाए तो उसके पश्चात मध्यम स्तर के टॉपिक जो न तो कठिन है और ना ही सरल टॉपिक है ,उनको पढ़ाया जाना चाहिए। सबसे अंत में कठिन टाॅपिक को पढ़ाया जाना चाहिए।

8.गणित की पुनरावृत्ति भी करें(Revise maths)-

गणित विषय को रोचक व सरल बनाने के लिए गणित की बार-बार पुनरावृत्ति करें।जो कठिन विषय है उनकी दो से अधिक बार पुनरावृत्ति करें। बार-बार पुनरावृत्ति करते समय इस बात का ध्यान रखें कि पुनरावृत्ति में नवीनता लाएं। एक ही तरीके व एक ही सवाल को करने से विद्यार्थी बोर हो जाते हैं ।इसलिए पुनरावृत्ति में नवीनता का समावेश भी होना चाहिए।

9.अतिरिक्त कालांश में गणित पढ़ाएं(Teach math in extra time)-

जो विद्यार्थी कमजोर है उनको गणित विषय को अतिरिक्त कालांश में पढ़ाया जाना चाहिए। अतिरिक्त कालांश में उनकी पिछली कक्षाओं की कमजोरी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। बहुत से बालक उच्च कक्षाओं में जाने के बाद भी जोड़,बाकी,गुणा,भाग तथा भिन्नों के जोड़,गुणा,भाग,बाकी,ल.स.प.,म.स.प. इत्यादि गणित की प्राथमिक जानकारी में पकड़ मजबूत बनाएं।

10.खेल,संगीत,माॅडल्स व पहेलियों का उपयोग(Use of games, music, models and puzzles)-

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विद्यार्थियों की खेल, संगीत,माॅडल्स में बहुत रुचि होती है। इसलिए प्राथमिक व उच्च प्राथमिक कक्षाओं में खेल, संगीत,मॉडल्स व पहेलियों के माध्यम से गणित को पढ़ाया जाना चाहिेए।

11.ध्यान व योग करें(Meditate and do yoga)-

मस्तिष्क पर अत्यधिक दबाव डालने से तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है अतःतनाव से बचने के लिए रोजाना सुबह ध्यान व योग करें ।शरीर स्वस्थ रहेगा तो ही आप समर्पित होकर गणित जैसे विषय की तैयारी कर सकेंगे। ध्यान करने के लिए सुखासन में बैठकर आंखें बंद करके शरीर को बिल्कुल विश्राम की अवस्था में रखकर प्रकाश ज्योति का ध्यान करें। दूसरा तरीका यह है कि दोनों भोंहो (भ्रुमध्य) अर्थात्आज्ञा चक्र में मन को एकाग्र करने की कोशिश करें ।तीसरा तरीका यह है कि दीपक की ज्योति का ध्यान करें ।शुरु शुरु में थोड़ा उच्चाटन होगा ।मन इधर-उधर भटकेगा लेकिन बार-बार अभ्यास करते रहें ।मन में फालतू, दुनियादारी के विचार आए तो उनको कंपनी न दें। बार-बार उच्चाटन होने से हो सकता है कि आप ध्यान करना छोड़ दें और यह सोचे कि ऐसा करना हमारे बस में नहीं है।हताश न हों, धैर्य रखें। इसलिए मन को एकाग्र करने अर्थात् ध्यान करने के साथ-साथ आपको धैर्य भी रखना चाहिए ।ध्यान और धैर्य दोनों का होना जरूरी है ।जब मन एकाग्र होने लगेगा तो आपको  पढ़ा हुआ ठीक से याद रहेगा। पढ़ने में भी मन लगेगा।

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