Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values

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1.वैदिक गणित पढ़ा छात्रों में विकसित करेंगे भारतीय संस्कार का परिचय (Introduction to Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values)-

Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values
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इस आर्टिकल में बताया गया है कि वैदिक गणित की पढ़ाई कराकर विद्यार्थियों में भारतीय संस्कार विकसित किए जाएं। इसमें बताया गया है कि इस वक्त जो शिक्षा दी जा रही है वह राष्ट्र केन्द्रित नहीं है। यह ठीक बात है कि वैदिक गणित के सूत्रों से कैलकुलेशन आसान हो जाता है। जैसे 45 x 45 का मान वैदिक गणित से तत्काल बताया जा सकता है कि इसका मान 2025 प्राप्त होगा। हमारा मानना है कि वर्तमान गणित के स्थान पर वैदिक पढ़ाया जाना इसलिए उचित नहीं है क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर माॅडर्न गणित ही पढ़ाई जाती है अतः माॅडर्न गणित को हटा दिया जाएगा  तो भारतीय बालक-बालिकाएं गणित में पिछड़ जाएंगे। इसलिए वैदिक गणित को माॅडर्न गणित के पूरक गणित के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। हाँ, यह अवश्य है कि वर्तमान में युवाओं में संस्कारों का अभाव है, इसका कारण है कि भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव। यदि बालक-बालिकाओं को नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा भी पढ़ाई जाए तो बालक-बालिकाएं संस्कारवान होंगे। नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम इस प्रकार का होना चाहिए जो सार्वभौमिक हो।दूसरा कारण है कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में सैद्धांतिक शिक्षा दी जाती है तथा व्यावहारिक शिक्षा का अभाव है। इसलिए सैद्धान्तिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक व चारित्रिक शिक्षा भी दी जाए। भारतीय शिक्षा पद्धति तथा पाश्चात्य शिक्षा पद्धति में से वे बाते सम्मिलित की जानी चाहिए जो बालकों के हित में हो तथा आधुनिक युग के अनुकूल हो। पाश्चात्य गणित शिक्षा का यह अर्थ नहीं है कि वह विद्यार्थियों के अनुकूल नहीं है तथा भारतीय शिक्षा का यह अर्थ नहीं है कि वह पूरी तरह सही है। आधुनिक युग के अनुकूल तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर गणित शिक्षा में भारतीय बालक-बालिकाएं पिछड़ न जाएँ इसको ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम रखा जाना चाहिए। कुछ विद्वान भारतीय शिक्षा पद्धति के घोर आलोचक है और उसे घिसी-पिटी, पुरातन अर्थात् आउट आफ डेटेड, दकियानूसी समझते हैं तथा कुछ विद्वान पाश्चात्य शिक्षा को उन्मुक्त, स्वच्छन्द, सैद्धान्तिक मानते है अर्थात्‌ भारतीय परिवेश के अनुकूल नहीं मानते हैं। हमारे विचार से बालक-बालिकाओं के हित को ध्यान में रखते हुए तथा आधुनिक युग से कदम मिलाकर चल सके एवं आत्मनिर्भर हो सके, बालक-बालिकाओं में संस्कारों का निर्माण हो सके इस प्रकार के पाठ्यक्रम को सम्मिलित किया जाना चाहिए। प्राचीनकाल की आवश्यकताएं, परिस्थितियां तथा समय अलग तरह का था। वर्तमान समय की आवश्यकताएं, परिस्थितियाँ तथा समय अलग तरह का है अर्थात् बहुत कुछ बदल चुका है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए गणित का सिलेबस तय करना चाहिए।
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2.वैदिक गणित पढ़ा छात्रों में विकसित करेंगे भारतीय संस्कार(Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values)-

Wed, 31 Oct 2018
- यूपी बोर्ड ने जारी किया सिलेबस, अगले सेशन से होगा लागू
GORAKHPUR: यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक इंटर कॉलेजेज में वैदिक गणित की पढ़ाई करा छात्रों में भारतीय संस्कार विकसित किए जाएंगे. इसके लिए बोर्ड की ओर से सिलेबस पर काम लगभग पूरा हो गया है और जल्द ही बाजार में इसकी किताबें भी आ जाएंगी. अगले सत्र से स्कूलों में इसे लागू कर दिया जाएगा. यह प्रस्ताव विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से बोर्ड को भेजा गया था जिस पर बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है.
बता दें, यूपी बोर्ड अंतर्गत आने वाले माध्यमिक इंटर कॉलेजेज में वैदिक गणित पढ़ाए जाने के लिए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया था. जिसे स्वीकार कर लिया गया है. संस्थान का कहना है कि इस वक्त की शिक्षा राष्ट्र केंद्रित नहीं है, इसमें पश्चिमी सभ्यता की छाप है. इसको दूर करने और अपनी शिक्षा को देश केंद्रित बनाने के लिए बोर्ड को 32 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा गया था. इसमें वैदिक गणित को बोर्ड ने स्वीकृत कर लिया है. इसके अलावा इतिहास को सही तरीके से प्रस्तुत करने और कई योद्धाओं जिनकी गाथाएं नहीं हैं, उन्हें शामिल करने का भी प्रस्ताव है. अब अगले सत्र में जितने बदलाव हो जाएंगे उसके बाद संस्थान फिर से अन्य बदलावों को लागू करने के लिए प्रयास करेगा.
कोट्स
वैदिक गणित में संस्कृत के सूत्रों से गणित के सूत्रों को पढ़ाया जाता है. इससे कैलकुलेशन काफी आसान हो जाता है. बारह साल पहले भी इसे शुरू किया गया था, लेकिन एक दो साल में ही इसे बंद कर दिया गया. हालांकि, अब तक इसका कोई सिलेबस और किताबें नहीं आईं हैं.
- सुधीर पांडेय, गणित शिक्षक
मॉडर्न सिलेबस में निश्चित तौर पर पश्चिमी सभ्यता की छाप बढ़ती जा रही है. जिसे दूर किया जाना चाहिए. वैदिक गणित पहले पढ़ाई जाती थी, तब भारतीय सभ्यता की छाप भी नजर आती थी, लेकिन जब से वैदिक गणित बंद हुआ उसके बाद से पश्चिमी सभ्यता की छाप भी बढ़ती हुई नजर आ रही है. इसलिए बच्चों में भारतीय सभ्यता की भी जानकारी के लिए वैदिक गणित की बेहद जरूरत है.
- पंकज दुबे, गणित शिक्षक
वैदिक गणित की पढ़ाई के लिए कवायद शुरू हो चुकी है. अगले सत्र से बच्चों को पढ़ाए जाने का सिलसिला प्रारंभ होगा.
- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, डीआईओएस

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